पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज संकट के बीच बांग्लादेश उर्जा संकट के भीषण दौर से गुजर रहा है। बांग्लादेश की राजधानी ढाका के आसपास के ग्रामीण इलाकों को 10 घंटे तक की बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार इस संकट से उबरने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उर्जा को बचाने के जरूरी उपाय कर रही है। साथ ही उर्जा आपूर्ति को सुनिश्चित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। बांग्लादेश के वित्त मंत्री अमीर खुसरो चौधरी ने यह भी स्वीकार किया है कि इस संकट से उबरने में दो वर्ष लग सकते हैं।

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के शुरुआत से ही दुनिया उर्जा आपूर्ति की समस्या से जूझ रही है, तेल-गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है; लेकिन बांग्लादेश की इस संकट के पीछे के और क्या कारण है, इसके क्या प्रभाव पड़ रहें और सरकार क्या कदम उठा रही है, हम इसे समझने का प्रयास यहां कर रहे हैं।

संकट के कारण

एलनजी की आपूर्ति करने वाली अमेरिकी कंपनी एक्सेलरेट एनर्जी के एलएनजी टर्मिनल में गत 21 जुलाई को आग लग जाने के बाद से गैस आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हो गई और गैस से संचालित होने वाले बिजली प्लांटों से बिजली उत्पादन में गिरावट आ गई। द डेली स्टार की सोमवार की रिपोर्ट के अनुसार, 13 अगस्त तक एलएनजी का उत्पादन घटकर केवल 300 एमएमसीएफडी प्रति दिन रह गया था, जबकि देश को रोजाना 3,800 एमएमसीएफडी एलएनजी की जरूरत होती है।

बांग्लादेश अपनी तेल जरूरतों का लगभग 90% और गैस जरूरतों का लगभग 30% आयात से पूरा करता है, जिसके लिए वह खाड़ी देशों पर निर्भर रहता है। अकेले कतर से बांग्लादेश अपने कुल गैस आयात का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है, लेकिन कतर ने पश्चिम में भू-राजनीतिक तनाव के बाद से गैस आपूर्ति को आधा कर दिया है।

लगभग 17.8 करोड़ की जनसंख्या वाले इस देश की उर्जा जरूरतें अधिक हैं, लेकिन घरेलू उत्पादन कम। बांग्लादेश में 29 गैस क्षेत्र हैं, लेकिन वहां भी धीरे-धीरे गैस उत्पादन में गिरावट आ रही है। वित्त वर्ष 2019-20 से 2025-26 के बीच गैस उत्पादन में 28 % कमी आई है, जबकि इसी अवधि में आयात में 143 % का उछाल आया है।

संकट के व्यापक प्रभाव

इस ऊर्जा संकट ने देश के मुख्य आधार, यानी कपड़ा उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाया है, उत्पादन में गिरावट आने और लागत बढ़ने से वैश्विक बाजार में इसकी प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता घट रही है। इसके अलावा, ऊर्जा बचाने के लिए रात 8 बजे के बाद शॉपिंग मॉल और बाजारों को बंद करने के आदेश से खुदरा व्यापार में भी बड़ी गिरावट आई है।

फर्टिलाइजर कारखानों और कृषि क्षेत्र पर भी इसका विनाशकारी असर पड़ा है। बिजली उत्पादन को प्राथमिकता देने के लिए देश की 5 में से 4 सरकारी फर्टिलाइजर फैक्ट्रियों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। खाद कारखाने बंद होने के कारण यूरिया और अन्य उर्वरकों की भारी किल्लत हो गई है, जिससे आगामी फसलों के उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है और देश के सामने खाद्य सुरक्षा का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

भीषण गर्मी के बीच 10-10 घंटे की बिजली कटौती से जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनमें भारी आक्रोश है। लोग बिजली स्टेशन को घेर कर अपना आक्रोश व्यक्त कर रहै हैं। तारीक रहमान सरकार ने बिजली बचाने के मकसद से सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों में कक्षाएं स्थगित या बंद कर दी गई हैं। वहीं, पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी रोकने के लिए ईंधन की दैनिक राशनिंग लागू कर दी गई है, जिससे लोगों का दैनिक कामकाज और यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

सरकार क्या कर रही है?

तात्कालिक उपाय के तौर पर बिजली बचाने और ग्रिड को ठप होने से रोकने के लिए दुकानों, शॉपिंग मॉल और व्यावसायिक गतिविधियों को रात 8:00 बजे तक बंद करने का अनिवार्य आदेश दिया गया है, साथ ही सजावटी रोशनी और होर्डिंग्स को बंद या जल्दी बंद करना अनिवार्य है। इसके अलावा, बिजली खपत घटाने के लिए सभी सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों को समय से पहले बंद या उनके कामकाज को स्थगित कर दिया गया है।

दीर्घकालिक उपाय के तौर पर सरकार राजनयिक प्रयासों के तहत कतर से ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने के लिए बातचीत कर रही है। इसके अलावा बांग्लादेश सरकार ने भारत सरकार से अधिक डीजल उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया है, जिसके जवाब में भारत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।

बांग्लादेश का वर्तमान ऊर्जा संकट केवल एक तात्कालिक आपूर्ति बाधा नहीं है, बल्कि यह देश की आयात पर अत्यधिक निर्भरता और कमजोर घरेलू बुनियादी ढांचे की गहरी समस्या को उजागर करता है। पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और एलएनजी टर्मिनल में दुर्घटना ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में बांग्लादेश को तात्कालिक संकट से उबरने के साथ-साथ दीर्घकालिक संरचनात्मक समस्याओं का समाधान खोजने की भी जरूरत है।

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शेख हसीना के भारत आने के बाद से बांग्लादेश के साथ भारत के संबंध नाजुक स्थिति में बने हुए हैं। इधर तारिक रहमान भी भारत का दौरा करने में हिचकिचा रहे हैं। अब बांग्लादेश ने रविवार को भारत के सामने शर्त रख दी है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान का प्रस्तावित दौरा तब तक आगे नहीं बढ़ सकता जब तक भारत सरकार पूर्व पीएम शेख हसीना और दूसरे वांछित भगोड़ों के प्रत्यर्पण पर कदम नहीं उठाती। पूरी खबर के लिए यहां क्लिक करें।