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छिड़ने वाली है जंग? आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच गोलाबारी, जानें क्या है पूरा विवाद

अज़रबैजान के राष्ट्रपति ने देश के नाम अपने संबोधन में लोगों को भरोसा दिलाया है कि उनकी सेना को कुछ ही नुकसान हुआ है, लेकिन जंग जारी है। दूसरी ओर अर्मेनिया का दावा है कि उन्होंने अपने एक्शन में अज़रबैजान के चार हेलिकॉप्टर, तीन दर्जन टैंक और अन्य सेना के वाहनों को नष्ट कर दिया है।

Armenia, azarbaijan, Warआर्मीनिया और अजरबैजान के बीच जानिए क्या है विवाद।

आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद एक बार फिर जंग का रूप लेने को है। आर्मीनिया और अज़रबैजान विवादित नागोर्नो-काराबाख को लेकर लड़ाई के मैदान में हैं, वहाँ हेलिकॉप्टर और टैंकों को मार गिराने की सूचनाएं आ रही हैं। इस जंग में अबतक 55 लोगों की जान चली गई है, जबकि दो आम लोगों की भी मौत हुई है।

अज़रबैजान के राष्ट्रपति ने देश के नाम अपने संबोधन में लोगों को भरोसा दिलाया है कि उनकी सेना को कुछ ही नुकसान हुआ है, लेकिन जंग जारी है। दूसरी ओर अर्मेनिया का दावा है कि उन्होंने अपने एक्शन में अज़रबैजान के चार हेलिकॉप्टर, तीन दर्जन टैंक और अन्य सेना के वाहनों को नष्ट कर दिया है। नागरनो-काराबख इलाके को लेकर ये पूरा विवाद है, जो कि आधिकारिक रूप से अज़रबैजान में पड़ता है लेकिन अभी अर्मेनिया की सेना का यहां पर कब्जा है।

स्थानीय मीडिया के मुताबिक, इसी इलाके के पास रिहायशी क्षेत्र में शेलिंग शुरू हुई थी और धीरे-धीरे हालात युद्ध के बन गए। अब अज़रबैजान ने बॉर्डर से सटे इलाकों में मार्शल लॉ लागू कर दिया है।

दूसरी ओर अर्मेनिया का कहना है कि जंग की शुरुआत अज़रबैजान ने की है, ऐसे में वो पीछे नहीं हटेंगे। इस लड़ाई के बीच तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगान ने आर्मेनिया को धमकी दी है, जिसका अजरबैजान के राष्ट्रपति ने खुलकर समर्थन किया गया है। इतना ही नहीं, एर्दोगान ने विश्व समुदाय का आह्वान करते हुए कहा है कि क्रूरता के खिलाफ लड़ाई में उनके साथ आएं।

उधर, आर्मेनिया के पुराने सहयोगी रूस ने सीजफायर का ऐलान करने और हालात को सुधारने के लिए बातचीत करने की शुरूआत की है। बता दें कि रूस और तुर्की में पहले ही लीबिया और सीरिया के गृहयुद्ध में तलवारें ख‍िंची हुई हैं। गौरतलब है कि अर्मेनिया और अज़रबैजान पड़ोसी मुल्क हैं, जो एशिया में ही आते हैं।

दोनों ही देश सोवियत संघ (USSR) का हिस्सा रहे हैं, लेकिन 80 के दशक के आखिर में जब USSR का पतन शुरू हुआ तो उसके बाद दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ा। ये पूरा विवाद नागरनो-काराबख इलाके के लिए है, जो अर्मेनिया और अज़रबैजान के बॉर्डर इलाके पर है।

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