Who is Tarique Rehman: बांग्लादेश में हुए आम चुनावों के नतीजों में बांग्लादेशी नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को दो तिहाई बहुमत हासिल हुआ है, जबकि जमाते-इस्लामी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक काफी खराब रहा है। इसके साथ ही यह लगभग तय हो गया है कि बीएनपी के चीफ तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। इस चुनाव में बीएनपी की जीत ने यह साबित कर दिया है कि तारिक रहमान वर्तमान राजनीति में बांग्लादेश के सबसे शक्तिशाली नेता हैं।
खास बात यह है कि एक वक्त ऐसा था कि बांग्लादेश से उन्हें बाहर जाना पड़ा था और वो 17 साल तक निर्वासित रहे थे, लेकिन अब वक्त बदल गया है क्योंकि बीएनपी की जीत के साथ ही मुल्क की सत्ता की चाभी उनकी पास आ गई है। इसीलिए तारिक रहमान की कहानी के बारे में आपको भी जानना चाहिए।
कौन हैं तारिक रहमान?
तारिक रहमान को बांग्लादेश की राजनीति में तारिक जिया के नाम से पहचाना जाता है। उनकी राजनीतिक पहचान उनके पारिवारिक नाम से जुड़ी रही है। उनकी पहली पहचान यही है कि वो जियाउर रहमान और खालिदा जिया के बेटे हैं। उनका जन्म 1967 में उस समय हुआ था, जब बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान कहलाता था।
साल 1971 के मुक्ति संग्राम (बांग्लादेश की आजादी की जंग) के दौरान तारिक महज चार साल के थे और उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में भी रखा गया था। इसी वजह से उनकी पार्टी बीएनपी उन्हें “युद्ध के सबसे कम उम्र के बंदियों में शामिल” बताकर सम्मानित करती है।
1990 में किया था राजनीति में प्रवेश
तारिक रहमान ने 1990 के दशक में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था। साल 2001 में BNP के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद उनकी राजनीतिक ताकत तेजी से बढ़ी। उस समय उन पर पार्टी और सरकार में पर्दे के पीछे से प्रभाव डालने के आरोप लगे। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने उन्हें BNP की संगठनात्मक रणनीति का मुख्य सूत्रधार बताया।
2025 में बांग्लादेश लौटे थे तारिक रहमान
हालांकि, एक अहम बात यह भी है कि उनका राजनीतिक सफर विवादों से भी घिरा रहा है। साल 2004 के ग्रेनेड हमले सहित कई मामलों में उनका नाम सामने आया। इसके अलावा भ्रष्टाचार के कई मामलों में बांग्लादेश की अदालतों ने उन्हें दोषी ठहराया गया था। साल 2007 में आपातकाल के दौरान उनकी गिरफ्तारी हुई, जिसके बाद इलाज के लिए वह लंदन चले गए थे। तब से वह ब्रिटेन में निर्वासन जैसी स्थिति में रह रहे थे और दिसंबर 2025 में ही बांग्लादेश लौटे थे।
BNP ने तारिक रहमान के नेतृत्व में जीता था चुनाव
BNP का दावा है कि तारिक रहमान राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार हुए, जबकि सत्तारूढ़ अवामी लीग उन्हें कानून से भागा हुआ अपराधी बताती रही थी। चुनाव से पहले तारिक रहमान की मां और पूर्व पीएम खालिदा जिया का निधन हुआ था। उसके बाद बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए बीएनपी की कमान तारिक रहमान के हाथ में ही थी। उनके नेतृत्व में ही बीएनपी को एकतरफा चुनावी जीत हासिल हुई है। बांग्लादेश चुनाव में BNP की एकतरफा जीत, पीएम मोदी ने तारिक रहमान को दी बधाई
