Who is Neal Katyal: अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को रद्द कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय आपात स्थितियों के लिए आरक्षित कानून का उपयोग करके शुल्क लगाने में अपने अधिकार का उल्लंघन किया।

इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ के खिलाफ दलील देने वाले वकील नील कात्याल ने कहा कि यह विचार कि हमारे पास एक ऐसी प्रणाली है जो स्वतः सुधार करती है, जो हमें यह कहने की अनुमति देती है कि आप दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हो सकते हैं लेकिन फिर भी आप संविधान का उल्लंघन नहीं कर सकते। मेरे लिए आज का मुद्दा यही है।

भारतवंशी हैं नील कात्याल

बता दें कि नील कात्याल भारतीय मूल के वकील हैं और इस मामले के केंद्र में थे, जहां उन्होंने छोटे व्यवसायों की ओर से करों की अवैधता पर बहस की। उन्होंने एमएस नाऊ के साथ इंटरव्यू के दौरान कहा कि अमेरिकी प्रणाली की सबसे अच्छी बातों में से एक वह है जो आज हुआ। मैं एक अप्रवासी का बेटा, अदालत में जाकर अमेरिकी छोटे व्यवसायों की ओर से यह कह सका, ‘देखो, यह राष्ट्रपति गैरकानूनी तरीके से काम कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की बहुमत वाली पीठ ने व्यापार नीति में अमेरिकी कांग्रेस की सर्वोच्चता को प्रभावी रूप से बहाल कर दिया, और निर्णय लेने में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण की याद दिला दी। कात्याल ने कहा कि मैं अपना पक्ष रखने में सक्षम था, उन्होंने मुझसे बहुत कठिन प्रश्न पूछे, यह एक बहुत ही गहन मौखिक बहस थी और अंत में, उन्होंने मतदान किया और हम जीत गए।

कई अहम पदों पर रह चुके हैं नील कात्याल

नील कात्याल के बारे में बता दें कि वे मिलबैंक एलएलपी के वाशिंगटन डीसी कार्यालय में पार्टनर हैं और फर्म के मुकदमेबाजी एवं मध्यस्थता समूह के सदस्य हैं। उन्होंने अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष 54 मामलों में पैरवी की है। वे अपीलीय और जटिल मुकदमेबाजी पर विशेष ध्यान देते हैं। उनका जन्म 1970 में शिकागो में हुआ था। उनकी माँ एक बाल रोग विशेषज्ञ और पिता एक इंजीनियर थे, दोनों भारत से आकर यहाँ बसे थे। उन्होंने येल लॉ स्कूल से स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

नील कात्याल ने यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द सेकंड सर्किट के गुइडो कैलाब्रेसी और साथ ही यूएस सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस स्टीफन जी. ब्रेयर के लिए क्लर्क के रूप में काम किया। उन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय विधि केंद्र में विधि प्रोफेसर के रूप में भी कार्य किया है। मिलबैंक वेबसाइट पर उनके प्रोफाइल के अनुसार वे विश्वविद्यालय के इतिहास में स्थायी पद और अध्यक्ष पद प्राप्त करने वाले सबसे कम उम्र के प्रोफेसरों में से एक थे।

उन्होंने हार्वर्ड और येल लॉ स्कूलों में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में भी कार्य किया है। उन्होंने 1998-1999 के दौरान न्याय विभाग में उप अटॉर्नी जनरल के कार्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और उप अटॉर्नी जनरल के विशेष सहायक के रूप में भी कार्य किया। संयुक्त राज्य अमेरिका के मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें 2011 और 2014 में संघीय अपीलीय नियमों पर सलाहकार समिति में नियुक्त किया था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या बोले?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए नील कात्याल ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने संवैधानिक सीमाओं पर एक स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि आज अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने कानून के शासन और दुनिया भर के अमेरिकियों के लिए एक मिसाल कायम की। उन्होंने कहा कि इसका संदेश सीधा था कि राष्ट्रपति शक्तिशाली होते हैं, लेकिन हमारा संविधान उससे भी कहीं अधिक शक्तिशाली है। अमेरिका में, केवल कांग्रेस ही अमेरिकी जनता पर कर लगा सकती है।

नील कात्याल ने इस मामले का नेतृत्व करने के लिए लिबर्टी जस्टिस सेंटर और उसकी अध्यक्ष सारा अल्ब्रेक्ट को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जब दूसरे लोग आगे नहीं आ रहे थे, तब उन्होंने लड़ाई का नेतृत्व किया और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा की। उन्होंने इस मामले में शामिल होने वाले पांच छोटे व्यवसाय मालिकों के प्रति आभार भी व्यक्त किया और कहा कि उनके रुख ने “देश भर में हजारों व्यवसायों और लाखों उपभोक्ताओं को महत्वपूर्ण राहत” प्रदान की है।

कात्याल ने मिलबैंक एलएलपी में अपने कानूनी सहयोगियों को धन्यवाद दिया, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि उन्होंने कि जीत का तर्क तैयार करने के लिए कई महीनों तक दिन-रात काम किया।

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ट्रंप ने फिर बढ़ा दिया टैरिफ (Source: IE File Photo)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि उन्होंने ग्लोबल टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर इस बारे में जानकारी दी है, पढ़िए पूरी खबर…