Ayatollah Alireza Arafi: ईरान ने अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी को देश का अंतरिम (अस्थायी) सर्वोच्च नेता नियुक्त किया है। यह फैसला उस समय लिया गया है, जब लंबे समय से ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्लाह अली खामेनेई की शनिवार सुबह तेहरान पर हुए संयुक्त अमेरिका-इजरायल हवाई हमलों में मौत हो गई।

अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी ईरान के धार्मिक और राजनीतिक ढांचे में लंबे समय से अहम भूमिका निभाते रहे हैं और एक वरिष्ठ धर्मगुरु माने जाते हैं। अब उन्हें ऐसे समय में देश की कमान संभालनी है, जब क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है और देश के भीतर भी अनिश्चितता का माहौल है।

अराफी का उदय

अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी का जन्म 1959 में मेयबोद (यज़्द प्रांत) में हुआ था। वे एक धार्मिक परिवार से आते हैं और उन्होंने अपना जीवन ईरान की धार्मिक और प्रशासनिक संस्थाओं में काम करते हुए बिताया है। उन्होंने ईरान के प्रमुख धार्मिक शिक्षा केंद्र क़ोम में बड़े-बड़े इस्लामी विद्वानों से शिक्षा ली। पढ़ाई के बाद उन्हें मुजतहिद का दर्जा मिला, यानी वे इस्लामिक कानून पर अपने स्वतंत्र फैसले और राय दे सकते हैं।

उनके करियर को पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के समय में नई ऊंचाई मिली। खामेनेई ने उन्हें कई अहम जिम्मेदारियां सौंपीं। अराफी ने पहले मेयबोद और बाद में क़ोम में शुक्रवार की नमाज़ का नेतृत्व किया, जो यह दिखाता है कि शीर्ष नेतृत्व का उन पर पूरा भरोसा था।

इसके अलावा, वे अल-मुस्तफा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के अध्यक्ष भी रहे। यह विश्वविद्यालय ईरान और विदेशों से आने वाले धर्मगुरुओं को शिक्षा और प्रशिक्षण देता है। साल 2019 में उन्हें गार्जियन काउंसिल का सदस्य बनाया गया, जो ईरान में कानूनों और चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की जांच करने वाली बहुत शक्तिशाली संस्था है।

सीएफआर के अनुसार, अराफी के प्रशासनिक और धार्मिक पदों का एक साथ होना उन्हें ईरान के धार्मिक नेतृत्व के केंद्र में मजबूत जगह दिलाता है। उनकी पदोन्नति से यह संकेत मिलता है कि धार्मिक सत्ता की मौजूदा व्यवस्था पहले की तरह ही बनी रहेगी।

नेतृत्व का संवैधानिक रास्ता क्या?

ईरानी संविधान के अनुसार, सर्वोच्च नेता एक वरिष्ठ शिया धर्मगुरु होना चाहिए, जिसका चयन धार्मिक विद्वानों की निर्वाचित संस्था, विशेषज्ञों की सभा द्वारा किया जाता है। मध्य पूर्व संस्थान के अनुसार, खामेनेई की मृत्यु के बाद तेहरान पहले एक अंतरिम नेतृत्व परिषद का गठन करेगा जो विशेषज्ञों की सभा द्वारा नए सर्वोच्च नेता के चयन तक प्रमुख कार्यों का निर्वहन करेगी।

अराफी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब सार्वजनिक और सरकारी मीडिया में खामेनेई के संभावित उत्तराधिकारियों के रूप में कई नामों पर चर्चा हो रही है। जिनमें कट्टरपंथी और अधिक व्यावहारिक धार्मिक गुटों के लोग शामिल हैं। लेकिन गार्जियन काउंसिल और विशेषज्ञों की सभा में उनकी स्थिति ने उत्तराधिकार के निर्णय के समय उन्हें संस्थागत प्रभाव प्रदान किया।

अराफी का दृष्टिकोण और भूमिका

अराफी ने शिया इस्लाम के राजनीतिक रूप से सक्रिय स्वरूप को बढ़ावा देने में मदरसों और धर्मगुरुओं की भूमिका के बारे में सार्वजनिक रूप से बात की है। जिसमें उत्पीड़ितों के साथ एकजुटता और अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण पर ज़ोर दिया गया है। जैसा कि उन्होंने पहले कहा था, “ईरान में मदरसे आम लोगों द्वारा संचालित होने चाहिए, दलितों के साथ एकजुटता दिखाने वाले, राजनीतिक (इस्लामी), क्रांतिकारी और अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण वाले होने चाहिए।”

पर्यवेक्षकों का कहना है कि यद्यपि अराफी को ईरान की धार्मिक नौकरशाही के भीतर व्यापक अनुभव है और उन्हें मजबूत संस्थागत साख प्राप्त है, लेकिन संस्थागत संरचनाओं के बाहर उनका कोई स्वतंत्र राजनीतिक आधार नहीं है, एक ऐसा कारक जो बाहरी संघर्ष और आंतरिक अनिश्चितता दोनों के दौर में उनके नेतृत्व को प्रभावित कर सकता है।

तेहरान में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन

लगभग 37 वर्षों तक ईरान पर शासन करने वाले खामेनेई की 28 फरवरी, 2026 की देर रात अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में हत्या कर दी गई। जिससे उत्तराधिकार प्रक्रिया शुरू हो गई और पूरे देश में शोक का माहौल छा गया।

अराफी का उदय 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सर्वोच्च नेतृत्व में केवल दूसरा परिवर्तन है। एक ऐसा क्षण जो ईरान के राजनीतिक ढांचे और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सामंजस्य बनाए रखने की उसकी क्षमता की परीक्षा लेगा। जैसे ही अराफी ईरान के सर्वोच्च पद पर आसीन होंगे, अंतरराष्ट्रीय ध्यान इस बात पर केंद्रित होगा कि आने वाले महीनों में वह धार्मिक सत्ता और भू-राजनीतिक दबावों तथा घरेलू स्थिरता के बीच संतुलन कैसे बनाए रखेंगे।

खामेनेई की मौत पर IDF ने जारी किया बयान

इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने रविवार को एक बयान जारी कर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की “एक सुनियोजित और व्यापक अभियान” में हुई मौत की पुष्टि की। बयान में बताया गया कि घातक हमलों के दौरान खामेनेई तेहरान में अपने केंद्रीय नेतृत्व परिसर में अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौजूद थे। पूरी खबर पढ़ें।