Israel-Iran War News: अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध 33वें दिन भी जारी है। इसी बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका से सीजफायर की मांग की है। ईरान की नई लीडरशिप पहले के मुकाबले कम कट्टर और ज्यादा समझदार है। हालांकि, ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका तुरंत सीजफायर नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट पूरी सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका अपना मिलिट्री ऑपरेशन जारी रखेगा। वहीं, ईरान ने ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज किया है। अब सभी के मन में एक सवाल आता है कि ईरानी शासन का असली बॉस कौन हैं और ईरानी शासन की सत्ता संरचना के बारे में हम कितना जानते हैं।
ईरान एक इस्लामी धर्मतंत्र है। CFR.org के मुताबिक, ईरान को कंट्रोल करने वाला सिद्धांत सुप्रीम लीडर रुहोल्लाह खुमैनी ने विकसित किया था। उन्होंने 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सत्ता संभाली थी। न्यायविद के संरक्षक के तौर पर जाने जाना वाला यह सिद्धांत खुमैनी की इस इच्छा को दिखाता है कि धार्मिक विद्वान ही व्यवस्था का संचालन करें और इसे इस्लामी कानून के हिसाब से रखें। यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद एक संवैधानिक जनमत संग्रह के माध्यम से किया गया था।
सुप्रीम लीडर
इन सब के टॉप पर देश के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई विराजमान हैं। उन्होंने अपने पिता अली खामेनेई की जगह ली है। सर्वोच्च नेता का ईरानी राज्य के सभी पहलुओं पर वैचारिक और व्यावहारिक दोनों तरह का कंट्रोल है। ईरान के संविधान के मुताबिक, सर्वोच्च नेता ईरान के इस्लामी गणराज्य की सामान्य नीतियों का संचालन करते हैं। इसका मतलब है कि वे ईरान की घरेलू और विदेश नीति दोनों के प्रभारी हैं। सर्वोच्च नेता ईरान के सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ भी हैं और युद्ध या शांति की घोषणा करने का एकमात्र अधिकार उन्हीं के पास है। उन्हें देश की खुफिया और सुरक्षा व्यवस्था पर भी पूरा नियंत्रण हासिल है।
सुप्रीम लीडर न्यायपालिका, राज्य रेडियो और टेलीविजन नेटवर्क और शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के सर्वोच्च कमांडर के सदस्यों की नियुक्ति और बर्खास्तगी भी कर सकते हैं। सर्वोच्च नेता संसद की गतिविधियों की निगरानी करने वाली और सार्वजनिक पद के लिए चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों का निर्णय लेने वाली संस्था, काउंसिल ऑफ गार्डियंस के 12 सदस्यों में से आधे सदस्यों की नियुक्ति भी करते हैं।
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ईरान के राष्ट्रपति
ईरान के राष्ट्रपति सरकार के मुखिया और अयातुल्ला के बाद दूसरे सबसे उच्च पदस्थ अधिकारी होते हैं। हालांकि, संविधान के तहत राष्ट्रपति की शक्तियां सीमित हैं। राष्ट्रपति अधिकतम दो बार चार सालों के कार्यकालों तक ही सेवा कर सकते हैं। राष्ट्रपति सुप्रीम लीडर की इच्छा के अनुसार कानूनों को लागू करते हैं, देश का संचालन करते हैं और कूटनीति का काम करते हैं। राष्ट्रपति मंत्रिमंडल के सदस्यों को मनोनीत करते हैं। इनकी पुष्टि संसद द्वारा की जानी जरूरी है। वे बजट भी तय करते हैं। ईरान में आज तक कोई भी महिला राष्ट्रपति नहीं बनी है।
सर्वोच्च राष्ट्रीय परिषद
ईरान के संविधान के अनुच्छेद 176 के तहत सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को इस्लामी क्रांति, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता को संरक्षित करने का काम सौंपा गया है। इसमें ईरान के राष्ट्रपति, संसद के अध्यक्ष, न्यायपालिका के प्रमुख, सशस्त्र बलों के संयुक्त जनरल स्टाफ के प्रमुख, विदेश मामलों, गृह मामलों और खुफिया मामलों के मंत्री और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर और सेना के कमांडर शामिल हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ईरान के राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के केवल नाममात्र प्रमुख हैं। उन्हें सुप्रीम लीडर के आदेशों का पालन करने का दायित्व सौंपा गया है।
ईरान की संसद
भारत और अमेरिका में दो सदनों वाली संसद होती है। एक ऊपरी सदन और एक निचला सदन। लेकिन ईरान में ऐसा नहीं है। वहां की संसद सिर्फ एक ही सदन वाली है। इसमें 290 सदस्य होते हैं जिनका कार्यकाल चार साल का होता है। अन्य संसदों की तरह, यह निकाय कानून का ड्राफ्ट तैयार करता है, अंतरराष्ट्रीय संधियों की पुष्टि करता है और देश के बजट को मंजूरी देता है। हालांकि, भारत और अमेरिका के उलट इस निकाय की शक्तियां नाममात्र की हैं। इसका कारण ईरान की संरक्षक परिषद है।
संरक्षकों की परिषद
संरक्षक परिषद एक बहुत शक्तिशाली संस्था है। यह संसद द्वारा बनाए गए हर कानून की जांच करती है कि वह शरिया कानून के अनुसार है या नहीं। इसके आधे सदस्यों को सीधे सर्वोच्च नेता नियुक्त करते हैं। इस परिषद ने अब तक संसद के बनाए करीब 40% कानूनों को रद्द कर दिया है।
न्यायतंत्र
ईरान की न्यायपालिका भी सुप्रीम लीडर के कंट्रोल में है। सर्वोच्च नेता न्यायपालिका प्रमुख की नियुक्ति करता है। इसके बाद न्यायपालिका प्रमुख, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और मुख्य लोक अभियोजक की नियुक्ति करता है। ईरान की अदालतें दीवानी और आपराधिक दोनों तरह के मामलों की सुनवाई करती हैं। इन अदालतों के फैसलों के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती। ईरान में एक विशेष धार्मिक न्यायालय भी है। यह नियमित न्यायपालिका से स्वतंत्र रूप से कार्य करता है और केवल सर्वोच्च नेता के प्रति जवाबदेह है। इस धार्मिक न्यायालय के फैसलों के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती है।
विशेषज्ञों की सभा
ईरान की विशेषज्ञ सभा में 86 “नेक और विद्वान” धर्मगुरु शामिल हैं। यह संस्था साल में एक बार मिलती है और जनता द्वारा आठ साल के कार्यकाल के लिए चुनी जाती है। संरक्षक परिषद राष्ट्रपति, संसदीय और विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की जांच-पड़ताल करती है। 2017 से, ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद पर उच्च पद के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अपने कार्यकाल के दौरान अहमदीनेजाद का अली खामेनेई के साथ एक चर्चित विवाद हुआ था और उनके बीच टकराव भी हुआ था।
विशेषज्ञों की सभा के सदस्य अपने बीच से किसी व्यक्ति का चयन करते हैं और उसे सर्वोच्च नेता के पद पर आसीन करते हैं। विशेषज्ञों की सभा समय-समय पर सर्वोच्च नेता की नियुक्ति की पुष्टि भी करती है। सभा के सदस्य सर्वोच्च नेता के किसी भी फैसले को चुनौती नहीं देते हैं।
कार्यपालिका परिषद
एक्सपीडिएंसी काउंसिल ईरान की संसद और गार्जियन काउंसिल के बीच एक सेतु का काम करती है। इसकी स्थापना 1988 में अयातुल्ला खुमैनी के फरमान द्वारा की गई थी, जब इन दोनों निकायों के बीच टकराव हुआ था। 1989 में, संशोधन के माध्यम से ईरान के संविधान में कार्यपालिका परिषद को शामिल किया गया। ईरान के सर्वोच्च नेता परिषद के सदस्यों का चुनाव करते हैं। इनका कार्यकाल पांच साल का होता है। कार्यपालिका परिषद को सरकार के संचालन का अधिकार दिया गया है। कार्यपालिका परिषद सर्वोच्च नेता को सलाह भी देती है, जिससे यह ईरान के सबसे शक्तिशाली निकायों में से एक बन जाती है।
खुफिया एवं सुरक्षा मंत्रालय
खुफिया एवं सुरक्षा मंत्रालय (एमओआईएस) का काम देश के अंदर और बाहर से जरूरी जानकारी जुटाना, उसका विश्लेषण करना और उसे व्यवस्थित करना है। यह मंत्रालय सीधे सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करता है और इस्लामी गणराज्य के खिलाफ किसी भी साजिश की जांच करता है।
ईरान के सशस्त्र बल
ईरान के सशस्त्र बलों में शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर और ईरानी सेना शामिल हैं। ईरान के संविधान के अनुसार, इस्लामिक गणराज्य की नियमित सेना देश की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए जिम्मेदार है। सेना सीधे सर्वोच्च नेता के नियंत्रण में है और उसे इस्लामी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध होना चाहिए।
मई 1979 में खुमैनी ने आईआरजीसी की स्थापना की थी। इसका मुख्य काम इस्लामी क्रांति और उसकी उपलब्धियों की रक्षा करना है। आईआरजीसी, ईरान की नियमित सेना से अलग एक सैन्य बल है। इस्लामी गणराज्य बनने के बाद से ही इन दोनों के बीच अक्सर तनाव की स्थिति बनी रही है। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार , आईआरजीसी ईरान के परमाणु कार्यक्रम का भी संचालन करता है और कुद्स फोर्स और लेबनान, सीरिया, इराक और यमन में उसके सहयोगियों के माध्यम से विदेश नीति को प्रभावित करता है।
युद्ध की वजह से पश्चिम एशिया अराजकता और हिंसा की चपेट में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से युद्ध खत्म करने के लिए संभावित वार्ता की बात करने के बावजूद लड़ाई जारी है। जानिए तेल की कीमतों से लेकर मानवीय त्रासदी तक, कितनी भारी पड़ रही यह जंग?
