पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश को नई सरकार मिलने जा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के 18 महीने बाद बांग्लादेश में आम चुनाव हो रहे हैं। देश भर की कुल 299 सीटों पर बृहस्पतिवार को हुए मतदान के दौरान हिंसा की भी खबरें आई हैं।

मतदान के बाद वोटों की गिनती का काम चल रहा है। चुनाव के शुरुआती नतीजों में बीएनपी ने बढ़त हासिल कर ली है जबकि जमात-ए-इस्लामी संसद में मुख्य विपक्षी दल बन सकती है। 

बांग्लादेश में हिंसा एक चिंताजनक मुद्दा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1 से 10 फरवरी के बीच हिंसा की कम से कम 58 घटनाएं दर्ज की गईं। पिछले कुछ वक्त में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया। देश की खराब अर्थव्यवस्था के साथ ही ये तमाम चुनौतियां हैं जिनका सामना नए प्रधानमंत्री को करना होगा।

आंकड़े बोलते हैं: बांग्लादेश में कितने निष्पक्ष होते हैं चुनाव, 53 साल का ट्रैक रिकॉर्ड

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री पद के लिए लंबे वक्त तक खालिदा जिया और शेख हसीना के बीच मुकाबला होता रहा लेकिन शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने और चुनाव से ठीक पहले खालिदा जिया के निधन के बाद अब बांग्लादेश एक बड़े बदलाव के लिए तैयार है। प्रतिबंध की वजह से शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग चुनाव नहीं लड़ रही है।

आइए, जानते हैं कि ऐसे पांच कौन नेता हैं जो शुक्रवार को चुनाव नतीजों का ऐलान होने के बाद बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

1- तारिक रहमान (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी)

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है। तारिक रहमान 17 साल तक लंदन में निर्वासन में रहे हैं। वह पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। बीएनपी ने अपने घोषणा पत्र में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, विदेश नीति में सुधार, बांग्लादेश को एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य और हसीना के ‘फासीवादी’ शासन में किए गए अपराधों के लिए न्याय जैसे कई वादे किए हैं।

2- शफीकुर रहमान (जमात-ए-इस्लामी)

11 दलों के गठबंधन का नेतृत्व करते हुए जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश (जेआईबी) के प्रमुख शफीकुर रहमान ने पार्टी को बीएनपी के मुकाबले में मुख्य प्रतिद्वंद्वी के तौर पर स्थापित किया है। यदि यह गठबंधन बहुमत हासिल कर लेता है तो वह देश के इतिहास में पहली इस्लामिक पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार का नेतृत्व संभाल सकते हैं।

शफीकुर रहमान का चुनाव अभियान नैतिक शासन और सामाजिक न्याय पर फोकस रहा और उन्होंने युवा मतदाताओं को साधने की कोशिश की। जमात-ए-इस्लामी ने पार्टी की महिला विरोधी छवि को सुधारने के लिए महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और सहभागी राज्य बनाने का वादा किया है। इसके साथ ही युवाओं को सशक्त बनाने, कानून व्यवस्था को सुधारने और भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने का भी वादा इस पार्टी की ओर से किया गया है।

शफीकुर रहमान ने कहा है कि वह आधुनिक बांग्लादेश के विकास के लिए भारत के साथ काम करने को तैयार हैं।

बांग्लादेश में बनेगी किसकी सरकार, जानिए चुनाव से पहले किए गए सर्वे का अनुमान

3- नाहिद इस्लाम (नेशनल सिटीजन पार्टी)

‘Gen Z क्रांतिकारी’ नाहिद इस्लाम 2024 में हुए विद्रोह के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। उन्होंने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में सलाहकार के रूप में काम किया था। नाहिद इस्लाम बांग्लादेश के राजनीति में Gen Z का प्रतिनिधित्व करते हैं। नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) का गठबंधन जमात-ए-इस्लामी के साथ है लेकिन नाहिद इस्लाम को युवा काफी पसंद करते हैं। गठबंधन सरकार बनने की स्थिति में शफीकुर रहमान को युवाओं को संतुष्ट करने के लिए नाहिद इस्लाम को प्रधानमंत्री का पद देना पड़ सकता है।

4- मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर (बीएनपी)

बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान के लिए मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ‘प्लान बी’ नेता हैं। अगर रहमान के सामने किसी तरह की कानूनी पेचीदगी या फिर प्रस्तावित ‘जुलाई चार्टर’ की वजह से मुश्किल आती है तो ऐसी स्थिति में आलमगीर एक विकल्प हो सकते हैं। आलमगीर केंद्र में मंत्री रहे हैं और छात्र नेता के तौर पर भी काम कर चुके हैं।

मतदान से पहले एक और हिंदू की हत्या, चाय के बागान में मिली लाश

5- सैयद रेजाउल करीम (इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश)

सैयद रेजाउल करीम “चारमोनाई पीर” के नाम से प्रसिद्ध हैं और इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश (आईएबी) का नेतृत्व करते हैं। आईएबी इस चुनाव में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही है। सैयद रेजाउल करीम इस्लामिक विद्वान हैं और बांग्लादेश में उनके काफी संख्या में धार्मिक अनुयायी हैं।

अगर बीएनपी या जेआईबी के नेतृत्व वाले गठबंधन को बहुमत नहीं मिलता है तो करीम किंगमेकर बन सकते हैं। किसी गठबंधन को समर्थन देने के बदले वह प्रधानमंत्री पद की मांग कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें- बांग्लादेश: जानिए पड़ोसी देश से जुड़ी पांच बड़ी बातें