जब भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ की वजह से बची थी पाकिस्तानी सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ की जान

जब पाकिस्तानी अलगाववादी संगठनों ने पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ की हत्या की योजना बनाई थी तो भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ की वजह से ही उनकी जान बच गई थी। रॉ ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों को अलर्ट कर दिया था।

यह परवेज मुशर्रफ के भारत दौरे के समय की तस्वीर है। एक्सप्रेस आर्काइव

भारत और पाकिस्तान भले ही दो पड़ोसी मुल्क हैं, लेकिन दोनों के बीच भाईचारे जैसा कुछ नहीं है। पाकिस्तान अपनी स्थापना के बाद से आज तक भारत के खिलाफ अकसर गलत कदम उठाता ही रहा है। कई परोक्ष युद्धों में मुंह की खाने के बाद उसने आतंकवाद का रास्ता चुना और आज तक उसे पोस रहा है।

ऐसा नहीं है कि भारत और पाकिस्तान ने कभी आपसी तल्खी कम करने की कोशिश नहीं की। चाहे ताशकंद समझौता रहा हो या फिर शिमला समझौता। लाहौर वार्ता और आगरा समिट भी इसी कड़ी का हिस्सा थी। लेकिन अफसोस कि कभी भी दोस्ती का पौधा पनप नहीं सका। लेकिन कुछ वाकये ऐसे भी हैं, जहां दोनों देशों ने एक-दूसरे की मदद की। 2003 में भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च ऐंड एनालिसिस विंग (रॉ) को यह खबर मिली थी कि कुछ पाकिस्तानी अलगाववादी संगठनों ने तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की हत्या की योजना बनाई है। इस घटना को 15 दिसंबर 2003 को अंजाम दिया जाना था। रॉ ने इस खुफिया जानकारी का इनपुट पाकिस्तान के साथ साझा किया।

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई इससे सतर्क हो गई, लेकिन उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया जिससे हमला न हो, बल्कि उसने हमला होने दिया ताकि साजिशकर्ताओं को पकड़ा जा सके। दूसरी तरफ यह तैयारी भी रखी जिससे मुशर्रफ को कुछ न हो सके। भारत के इस खुफिया इनपुट की वजह से ही मुशर्रफ की जान बची थी और इसकी वजह से दोनों देशों के बीच के रिश्ते कुछ बेहतर होते दिखने लगे थे

अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने अपनी किताब भारत vs पाकिस्तान में लिखा है कि पाक और भारतीय खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों ने आपस में इनुपट शेयर करने की यह परंपरा कई बार निभाई। जिस समय मुशर्रफ पर हमले की योजना बनी थी उस समय सीडी रॉय रॉ के प्रमुख थे। वहीं आईएसआई के मुखिया का पद जनरल एहसान उल हक के पास था। लेकिन 2008 तक यह सूचना आदान प्रदान सिस्टम ध्वस्त हो गया और 26/11 का हमला इसी का परिणाम कहा जा सकता है।

इसके बाद मार्च 2016 में एक बार फिर दोनों देशों के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान प्रदान की कोशिश की गई। इस बार यह काम किया था पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रिटायर्ड लेफ्टिनेंट नसीर खान जंजुआ ने। उन्होंने भारतीय एनएसए अजीत डोवाल से एक खुफिया जानकारी शेयर की, जिसमें बताया गया था कि शिवरात्रि उत्सव के दौरान गुजरात में पाकिस्तानी आतंकवादी हमला करने की योजना बना रहे हैं। जंजुआ ने डोवाल को यह भी बताया कि इस साजिश के पीछे जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है। साथ ही यह भी बताया कि दोनों संगठनों के दस आत्मघाती हमलावर गुजरात में घुस चुके हैं और उनकी साजिश मुंबई जैसा हमला करने की है।

इस इनपुट की वजह से गुजरात में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर दी गई थी। गुजरात के सभी प्रमुख शहरों और स्थानों में किलाबंदी कर दी गई। दिल्ली को भी हाई अलर्ट पर रखा गया था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को यह शक था कि यदि गुजरात में हमला असफल रहा तो आतंकी दिल्ली का रुख कर सकते हैं। अंतत: शिवरात्रि पर कोई आतंकी हमला नहीं हुआ। पाकिस्तान का खुफिया सूचना साझा करने का यह कदम शायद अमेरिका और भारत के दबाव का नतीजा था जो पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के बाद बनाया गया था। हालांकि भारत ने इस घटना के बाद से ही पाकिस्तान के साथ अपनी सभी बैठकों और बातचीत को खत्म कर दिया था।

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