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वुहान का कोरोना वायरसः कैसे खतरे सामने और किन-किन की दस्तक

कोरोनावायरस से 80 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे चीन के लिए एक आपातकालीन स्थिति कहा है। विश्व भर में स्वास्थ्य के खतरों के अलावा इससे अहम राजनियक और आर्थिक चुनौतियां खड़ी होने की आशंका जताई जा रही है।

चीन में कोरोनावायरस का कहर

दीपक रस्तोगी
चीन से फैले कोरोना वायरस को प्रकोप भारत समेत दुनिया भर के कई देशों में दिखने लगा है। भारत, अमेरिका, फ्रांस, जापान तिब्बत, थाइलैंड, जापान और मंगोलिया में लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। 80 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे चीन के लिए एक आपातकालीन स्थिति कहा है। विश्व भर में स्वास्थ्य के खतरों के अलावा इससे अहम राजनियक और आर्थिक चुनौतियां खड़ी होने की आशंका जताई जा रही है। भारत पर तो असर पड़ेगा ही।

वुहान से फैलता खतरा
चीन के वुहान शहर से दूसरे देशों में आने वाले यात्रियों के जरिए ही यह वायरस अन्य देशों में कदम रख रहा है। भारत, नेपाल समेत कई देशों में चीन से लौटे यात्रियों के जरिए ही इस वायरस ने कदम रखा है। चीन 12 शहरों के 3.5 करोड़ से ज्यादा निवासियों के यात्रा पर प्रतिबंध लगा चुका है। भारत में मुंबई के बाद राजस्थान और बिहार में कोरोना वायरस ने दस्तक दे दी है।

जैविक हथियारों के आरोप
वाशिंगटन पोस्ट अखबार ने एक इजराइली जैविक हथियार विश्लेषक से बातचीत के आधार पर दावा किया है कि वुहान शहर में चीन की जैविक हथियार तैयार करने की गोपनीय परियोजना है। इजराइली सेना के पूर्व खुफिया अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल डैनी सोहम ने चीन के जैविक हथियार कार्यक्रम को लेकर काफी काम किया है। उसका कहना है कि चीन की गोपनीय जैविक हथियार परियोजना का केंद्र रहा है वुहान इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी। इस संस्थान में मारक विषाणुओं पर काम होता है। यहां की दो प्रयोगशालाएं सिर्फ जैविक हथियारों को लेकर काम करती हैं।
डैनी सोहम ने अखबार को ई-मेल इंटरव्यू में बताया है कि जनसंहार के हथियार विकसित करने का काम ये प्रयोगशालाएं कर रही हैं। यह काम चीन की नागरिक-सैन्य शोध कार्यक्रमों के तहत किया जा रहा है।डैनी सोहम ने मेडिकल मोइक्रोबॉयोलॉजी में डाक्टरेट कर रखा है। उसने 1970 से 1991 तक इजराइली सेना में सैन्य खुफिया अधिकारी के तौर पर काम किया और वह मध्य एशिया समेत दुनिया के कई हिस्सों में काम कर चुका है।

राजनयिक अखाड़ेबाजीं
अमेरिका, रूस, चीन, भारत और यूरोपीय समुदाय के देशों में राजनयिक अखाड़ेबाजी दिखने लगी है। रूस के राजनेता और सांसद व्लादीमीर जेरी नोफेस्की ने चीन में कोरोना वायरस के विध्वंसक फैलाव को अमेरिकी षड्यंत्र करार दिया है। चीनी अर्थव्यवस्था को रोकने के लिए अमेरिकी ने वायरस फैलाने का षड्यंत्र रचा।
दूसरी ओर, चीन के जैविक हथियार कार्यक्रमों को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। इस मामले में भारत ने तटस्थ रुख बना रखा है। लेकिन भारत के लिए असहज स्थिति कोरोना वायरस की आड़ में चीन द्वारा बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा के आधिकारिक निवास पोटाला पैलेस को अनिश्चितकाल के लिए बंद किए जाने से पैदा हो गई है। इस कार्रवाई का कई बड़े बौद्ध संगठनों ने विरोध भी किया है। उन्होंने चीनी सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर संदेह जताया है और भारत सरकार से दखल देने की मांग की है।
आर्थिक चिंताएं
चीन के यातायात, मनोरंजन, पर्यटन व्यवसाय, बीमा क्षेत्र पर कोरोना वायरस के प्रकोप का असर अभी से दिखने लगा है। यात्रा प्रतिबंधों से काफी नुकसान की बात सामने आ रही है। साल 2002-03 के दौरान सार्स की महामारी फैली थी और इसकी शुरुआत भी चीन में हुई थी, तब चीन को करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ था। सार्स महामारी के समय वैश्विक अर्थव्यवस्था को 40 अरब डॉलर का घाटा हुआ था। विकास दर में एक फीसद की कमी आ गई थी। चीन से जुड़ी होने के कारण भारत की अर्थव्यवस्था के भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। भारत समेत चीन में कुछ हिस्सों में यात्रा प्रतिबंध लागू हैं और वह भी ऐसे समय में जब चीनी नव वर्ष का समय है और वहां काफी पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में चीन के पर्यटन व्यवसाय को झटका लगा है। मनोरंजन और तोहफों पर उपभोक्तााओं के खर्च का असर है। कोरोना वायरस का प्रसार जिस वुहान शहर से शुरू हुआ वो चीन का अहम कारोबारी और माल ढुलाई केंद्र है। उद्योगों की आपूर्ति चेन प्रभावित हुई है। बीमा क्षेत्र पर भार बढ़ा है।

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