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यहां हाथ धोने तक का नहीं है पानी, कोरोना संक्रमण का हो रहा तेजी से प्रसार, 400 करोड़ लोग झेल रहे पानी संकट, यूएन का दावा

यूएन वाटर की प्रमुख गिलबर्ट हुंगबो का कहना है कि 'यह खतरनाक स्थिति है। लंबे समय से पानी को लेकर सरकारों द्वारा निवेश नहीं किया जा रहा है और अब हम उसके परिणाम देख रहे हैं।'

water shortage coronavirus who unकोरोना वायरस के बढ़ने की एक बड़ी वजह दुनिया की बड़ी आबादी के पास पानी की किल्लत होना है।

कोरोना वायरस माहमारी के इस संकट में जो सबसे कारगर बचाव है, वो है समय-समय पर हाथ धोना लेकिन दुनिया की बड़ी आबादी पानी की समस्या से जूझ रही है। कई जगह ऐसी हैं, जहां हाथ धोने के लिए पानी ही उपलब्ध नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि कोरोना संक्रमण के फैलने में पानी की कमी भी एक प्रमुख वजह है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया भर में करीब 300 करोड़ लोगों के पानी पानी और हाथ धोने के लिए साबुन की कमी है।

वहीं यूनाइटेड नेशन्स की संस्था यूएन वाटर का कहना है कि दुनिया में 400 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें साल में एक माह पानी की कमी से जूझना पड़ता है। यूएन वाटर की प्रमुख गिलबर्ट हुंगबो का कहना है कि ‘यह खतरनाक स्थिति है। लंबे समय से पानी को लेकर सरकारों द्वारा निवेश नहीं किया जा रहा है और अब हम उसके परिणाम देख रहे हैं।’सालों तक साफ पानी और सफाई में निवेश को टाला गया और अब इसका असर ये हो रहा है कि इससे वायरस का खतरा बढ़ा है और सभी लोगों की जान पर बन आयी है।

हुंगबो ने कहा कि ‘दुनिया को चाहिए कि साल 2030 तक पानी के इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब 6.7 ट्रिलियन डॉलर की राशि खर्च करे। यूएन के मुताबिक इससे ना सिर्फ सैनेटाइजेशन की जरुरत पूरी होगी बल्कि हम मौजूदा माहमारी जैसी अन्य बीमारियों से भी अच्छी तरह से निपट सकेंगे। इसके अलावा खाने की समस्या को देखते हुए बेहतर सिंचाई व्यवस्था से भी हमें फायदा मिलेगा।’

पानी की कमी के साथ ही पानी का असमान वितरण भी एक बड़ी समस्या है। अब इस माहमारी के समय में पानी की खराब व्यवस्था ज्यादा महसूस हो रही है। दुनिया की गरीब आबादी को जहां पानी की समस्या है, वहीं वह ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाले इलाकों में रहते हैं, जहां सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना मुश्किल है।

एक अनुमान के मुताबिक साल 2050 तक करीब 570 करोड़ लोगों को साल में एक माह पानी की समस्या झेलनी पड़ेगी। जिससे पानी का संकट और गहराएगा। ग्लोबल वार्मिंग के चलते हर साल दुनिया के तापमान में एक डिग्री की वृद्धि पानी की समस्या को और गंभीर बना रही है।

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