इंडोनेशिया में एक ज्वालामुखी के अचानक सक्रिय होने से हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आसमान में हजारों फीट ऊपर तक पहुंची राख ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया, जिसके बाद देश के आठ एयरपोर्ट बंद करने पड़े। इस प्राकृतिक आपदा के चलते हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंस गए हैं और बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।
ज्वालामुखी से निकल रही राख के कारण स्थिति लगातार बदल रही है। सोमवार सुबह तक करीब 1.70 लाख यात्रियों के प्रभावित होने और 1,550 से ज्यादा उड़ानें रद्द होने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों ने लोगों को ज्वालामुखी के क्रेटर से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। हालांकि, अभी तक किसी की मौत या घायल होने की खबर नहीं है और लोगों को बड़े पैमाने पर इलाका खाली करने का आदेश भी नहीं दिया गया है।
8 एयरपोर्ट बंद, जकार्ता के दोनों प्रमुख एयरपोर्ट भी प्रभावित
इंडोनेशिया के सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी शुक्रवार से सक्रिय है। रविवार को तड़के 3:53 बजे करीब 30 सेकंड तक इसका विस्फोट हुआ। इसके लगभग तीन घंटे बाद एक और छोटा विस्फोट दर्ज किया गया। रविवार रात 8:23 बजे भी ज्वालामुखी में एक और विस्फोट रिकॉर्ड किया गया।
राख के कारण जकार्ता के सोएकार्नो-हट्टा और हलीम पेरदानाकुसुमा एयरपोर्ट समेत कुल आठ एयरपोर्ट के आसपास हवाई क्षेत्र बंद किया गया। शुरुआत में इन एयरपोर्ट को सोमवार सुबह 8:59 बजे तक बंद रखने का आदेश दिया गया था। हालांकि, बाद में सोएकार्नो-हट्टा एयरपोर्ट के संचालक ने बताया कि वहां परिचालन शाम 6 बजे तक बंद रहेगा।
50 हजार फीट तक पहुंचा राख का गुबार
इंडोनेशिया की मौसम एजेंसी बीएमकेजी के मुताबिक, उपग्रहों से ज्वालामुखी की राख के दो बड़े बादल ट्रैक किए गए हैं। इनमें से एक करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंचा और जकार्ता, बैंटन तथा पश्चिमी जावा के ऊपर से गुजरा।
दूसरा और ज्यादा बड़ा राख का बादल करीब 50 हजार फीट तक पहुंच गया। इसका असर बैंटन, लैम्पुंग और बेंगकुलु प्रांतों के साथ-साथ दक्षिणी सुंडा जलडमरूमध्य और सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के कुछ हिस्सों तक देखा गया।
जुलाई से बढ़ी है ज्वालामुखी की गतिविधि
इंडोनेशिया की जियोलॉजिकल एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया के अनुसार, अनाक क्राकाटोआ में जुलाई से गतिविधियां बढ़ी हैं और रविवार का विस्फोट इस अवधि का सबसे शक्तिशाली विस्फोट था। उनके मुताबिक, ज्वालामुखी के नीचे मैग्मा और गैस की लगातार आपूर्ति होने के संकेत मिल रहे हैं।
हालांकि, अधिकारियों के लिए अभी यह कहना संभव नहीं है कि आने वाले समय में इससे बड़ा विस्फोट होगा या नहीं। निगरानी एजेंसी ने फिर भी आने वाले दिनों में और विस्फोट होने की आशंका जताई है। लोगों को क्रेटर से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी गई है।
यात्रियों की बढ़ी परेशानी, स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई
उड़ानें रद्द होने के कारण बड़ी संख्या में यात्री एयरपोर्ट पर फंस गए हैं। स्पेनिश पर्यटक डिएगो उर्डियालेस को मैड्रिड लौटना था, लेकिन वह अपनी एयरलाइन से रीबुकिंग को लेकर जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। एक अन्य यात्री मिशेल गॉ ने स्थिति को प्राकृतिक आपदा बताते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों को स्वीकार करना पड़ता है।
राख के प्रभाव से बच्चों को बचाने के लिए जकार्ता और लैम्पुंग के प्रभावित इलाकों में कई स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी है। आपदा प्रबंधन एजेंसी ने लोगों को बाहर निकलते समय मास्क पहनने की सलाह दी है।
सिंगापुर एयरलाइंस ने रद्द की 10 उड़ानें
ज्वालामुखी के असर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी प्रभावित हुई हैं। सिंगापुर एयरलाइंस ने 6 और 7 सितंबर को सिंगापुर-जकार्ता रूट की 10 उड़ानें रद्द करने की जानकारी दी है। एयरलाइन ने कहा कि स्थिति लगातार बदल रही है और इस रूट पर अन्य उड़ानें भी प्रभावित हो सकती हैं।
एयरलाइन के मुताबिक, सीधे उसके जरिए टिकट बुक करने वाले यात्री ऑनलाइन फॉर्म के माध्यम से उड़ान दोबारा बुक करा सकते हैं या रिफंड मांग सकते हैं। ट्रैवल एजेंट या किसी दूसरी एयरलाइन के जरिए टिकट लेने वाले यात्रियों को संबंधित एजेंसी या एयरलाइन से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
| फ्लाइट | रूट | समय |
| SQ968 | सिंगापुर से जकार्ता | 6 सितंबर 21:55 |
| SQ951 | जकार्ता से सिंगापुर | 7 सितंबर 05:25 |
| SQ950 | सिंगापुर से जकार्ता | 7 सितंबर 06:20 |
| SQ952 | सिंगापुर से जकार्ता | 7 सितंबर 07:40 |
| SQ956 | सिंगापुर से जकार्ता | 7 सितंबर 09:05 |
| SQ953 | जकार्ता से सिंगापुर | 7 सितंबर 08:05 |
| SQ955 | जकार्ता से सिंगापुर | 7 सितंबर 09:25 |
| SQ957 | जकार्ता से सिंगापुर | 7 सितंबर 11:00 |
| SQ958 | सिंगापुर से जकार्ता | 7 सितंबर 12:35 |
| SQ959 | जकार्ता से सिंगापुर | 7 सितंबर 14:20 |
क्राकाटोआ की पुरानी तबाही आज भी डराती है
अनाक क्राकाटोआ का अर्थ है ‘चाइल्ड ऑफ क्राकाटोआ’। यह उसी स्थान पर बना है जहां कभी विशाल क्राकाटोआ ज्वालामुखी मौजूद था। 1883 में क्राकाटोआ के भीषण विस्फोट और उसके बाद आई सुनामी में 36 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। इस घटना का असर वैश्विक जलवायु पर भी पड़ा था और कई वर्षों तक तापमान में गिरावट देखी गई थी।
साल 2018 में भी अनाक क्राकाटोआ के विस्फोट के कारण पानी के भीतर भूस्खलन हुआ था। इससे ज्वालामुखी का एक हिस्सा समुद्र में जा गिरा और सुनामी पैदा हुई। इस हादसे में सुमात्रा और जावा में कम से कम 430 लोगों की मौत हुई थी। उस घटना के बाद ज्वालामुखीय द्वीप अपने मूल आकार का करीब एक चौथाई ही रह गया था।
इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है, जहां भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट आम हैं। मौजूदा स्थिति में अधिकारियों की नजर ज्वालामुखी की गतिविधियों और मौसम की परिस्थितियों पर बनी हुई है।
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