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दो कत्ल के बाद इस गांव में बच गया केवल एक आदमी, साथ के लिए पाल रखे हैं हजारों मक्खियां, कुत्ते-बिल्लियां…

गरीसा मुनटेन भले ही अकेले हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि कोई उनके साथ नहीं रहता। बता दें कि गरीसा के पास दो बिल्लियां, पांच कुत्ते, 9 टर्की पक्षी, 42 मुर्गियां, 50 कबूतर, 120 बत्तखें और कई हजार मधुमक्खियां हैं।

नई दिल्ली | July 16, 2019 10:14 AM
पूरे गांव में अकेले इंसान हैं गरीसा मुनटेन। (photo credit-NYC)

रुस की सीमा के नजदीक एक गांव है डोबरुसा, 30 साल पहले तक इस गांव में करीब 200 लोग रहते थे। लेकिन आज इस गांव में सिर्फ एक व्यक्ति रहता है। बता दें कि सोवियत संघ के टूटने के बाद इस गांव के लोग शहरों और अन्य जगहों पर चले गए। वहीं कुछ लोगों का देहांत हो गया। इस साल की शुरुआत में डोबरुसा में कुल तीन लोग थे, जिनमें एक गरीसा मुनटेन और एक दंपत्ति जेना और लिडा लोजिंस्की रहते थे। बीती फरवरी में जेना और लिडा लोजिंस्की की हत्या हो गई। इसके बाद से डोबरुसा गांव में सिर्फ गरीसा मुनटेन रहते हैं।

हालांकि गरीसा मुनटेन भले ही अकेले हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि कोई उनके साथ नहीं रहता। बता दें कि गरीसा के पास दो बिल्लियां, पांच कुत्ते, 9 टर्की पक्षी, 42 मुर्गियां, 50 कबूतर, 120 बत्तखें और कई हजार मधुमक्खियां हैं। गरीसा मुनटेन बताते हैं कि उनके गांव के करीब 50 घर थे, लेकिन अब अधिकतर लोग सोवियत संघ के टूटने के बाद नजदीकी शहर मालडोवा, रुस या फिर यूरोप में जाकर बस चुके हैं। मुनटेन का कहना है कि अकेलापन आपको बहुत परेशान करता है।

अकेलेपन के दूर करने के लिए मुनटेन ने अपना ही तरीका ईजाद कर लिया है। दरअसल मुनटेन बताते हैं कि खेतों में काम करने के दौरान वह पेड़ों से, पक्षियों से, जानवरों से ही बातें करते रहते हैं। गरीसा बताते हैं कि उनसे बात करने के लिए यहां कोई नहीं है। 65 वर्षीय गरीसा मुनटेन के अनुसार, पहले गांव के दूसरे छोर पर जेना और लिडा लोजिंस्की रहते थे और वह अक्सर उनसे फोन पर या मिलकर बातें करते रहते थे, लेकिन अब उनकी मौत के बाद वह यहां बिल्कुल अकेले हो गए हैं। बताया गया कि जेना और लिडा लोजिंस्की दंपत्ति की एक कामगार ने हत्या कर दी थी।

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