अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) को सीमित करने की कोशिश को खारिज कर दिया। न्यायाधीशों ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें ट्रंप के कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी गई थी। इस आदेश में अमेरिकी सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिया गया था कि अगर अमेरिका में जन्मे किसी बच्चे के माता-पिता में से कोई भी अमेरिकी नागरिक या वैध स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड होल्डर) नहीं है तो उस बच्चे को अमेरिकी नागरिक के रूप में मान्यता न दी जाए।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन इस आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। जन्मसिद्ध नागरिकता का यह अधिकार लंबे समय से अमेरिकी समाज और संविधान का अभिन्न हिस्सा माना जाता रहा है। अदालत के इस फैसले से इमिग्रेशन पर सख्ती से जुड़ी ट्रंप की प्राथमिकताओं को बड़ा झटका लगा है।
अमेरिकी नागरिकता के क्या हैं नियम?
डोनाल्ड ट्रंप के आदेश को चुनौती देने वालों का तर्क था कि यह अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की उस व्यवस्था का उल्लंघन करता है, जिसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले और अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के अधीन आने वाले सभी लोगों को नागरिकता प्रदान की जाती है। आलोचकों ने राष्ट्रपति पर इमिग्रेशन पॉलिसी में नस्लीय और धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि जन्मसिद्ध नागरिकता का मुद्दा अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट 1898 में ‘यूनाइटेड स्टेट्स बनाम वोंग किम आर्क’ मामले में पहले ही स्पष्ट कर चुका है। उस फैसले में अदालत ने माना था कि संविधान का 14वां संशोधन अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाले सभी बच्चों जिनमें विदेशी नागरिकों के बच्चे भी शामिल हैं, उनको जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता प्रदान करता है।
ट्रंप के फैसले पर निचली अदालतों ने लगा दी थी रोक
मंगलवार को फैसला सुनाते हुए कंजरवेटिव चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपने निर्णय में 1898 के ‘यूनाइटेड स्टेट्स बनाम वोंग किम आर्क’ मामले का हवाला दिया। रॉबर्ट्स ने लिखा, “यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि पिछले 128 सालों से हम लगातार वोंग किम आर्क के फैसले को इस रूप में समझते रहे हैं कि अमेरिका में जन्म लेने वाले सभी बच्चों को नागरिकता की गारंटी है। आज इस व्याख्या से हटने का हमें कोई कारण नहीं दिखता।”
न्यायाधीश ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के दृष्टिकोण के समर्थन में बहुत कम सबूत हैं जिसके आधार पर जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित किया जा सके। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप द्वारा अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन 20 जनवरी, 2025 को जारी किया गया कार्यकारी निर्णय संयुक्त राज्य अमेरिका में कहीं भी लागू नहीं हो पाया था क्योंकि इसे कई निचली अदालतों ने रोक दिया था।
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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधा है। उनका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें वह ट्रंप को लूजर बोलते हुए नजर आ रहे हैं, लेकिन भाषण खत्म होने के बाद वह स्टेज से उतरते वक्त कन्फ्यूज नजर आ रहे थे। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
