अमेरिका के एक न्यायाधीश ने अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ आपराधिक मामला खारिज कर दिया है। अमेरिका की अदालत ने अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे के खिलाफ आपराधिक आरोप खारिज कर दिए हैं। इसके साथ ही कथित धोखाधड़ी और रिश्वत के मामले में करीब दो साल से जारी कानूनी अब कार्यवाही समाप्त हो गई है।
न्यूयॉर्क के ‘यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट फॉर द ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट’ ने न्याय मंत्रालय के नियम 48(A) के तहत दायर उस याचिका को मंजूरी दे दी जिसमें गौतम अडानी, सागर अडानी और अडानी ग्रीन के पूर्व सीईओ वनीत जैन के खिलाफ आरोपपत्र को खारिज करने का अनुरोध किया गया था। न्यायाधीश निकोलस गारोफिस ने अभियोजन पक्ष से मामले को वापस लेने के फैसले पर अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगने के बाद न्याय मंत्रालय की याचिका को मंजूरी दी।
आपराधिक कार्यवाही हमेशा के लिए समाप्त
आरोपों को स्थायी रूप से खारिज किए जाने का अर्थ है कि आपराधिक कार्यवाही हमेशा के लिए समाप्त हो गई है और इन आरोपों को दोबारा दायर नहीं किया जा सकता। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने आरोपों की सत्यता या आधार पर कोई न्यायिक निष्कर्ष दिया है। वहीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए गौतम अडानी ने कहा कि उन्होंने अदालत के फैसले का स्वागत किया और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया।
ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गारोफिस ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। मामले को समाप्त करने पर सहमति जताने से पहले, उन्होंने अभियोजन पक्ष से विस्तार से पूछा कि वे इसे क्यों समाप्त करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या अमेरिका में 10 अरब डॉलर का निवेश करने के अडानी के पूर्व वादे का इस निर्णय में कोई योगदान था।
अडानी के वकीलों से मुलाकात के बाद आरोप वापस लेने का फैसला
न्याय विभाग के अधिकारी ट्रेंट मैककोटर ने कहा कि उन्होंने अडानी के वकीलों और अन्य अधिकारियों से मुलाकात करने और फिर अपनी समीक्षा करने के बाद आरोप वापस लेने का फैसला किया। 4 जुलाई को दायर एक याचिका में उन्होंने इस मामले को मुख्य रूप से एक विदेशी मामला बताया, जिसे साबित करना मुश्किल था और जो विभाग की मौजूदा प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं था। उन्होंने यह भी इनकार किया कि अडानी के निवेश प्रस्ताव ने उनके फैसले को प्रभावित किया।
यह आपराधिक मामला नवंबर 2024 में शुरू हुआ था जब अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि गौतम अडानी, सागर अडानी, अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) के पूर्व सीईओ वनीत जैन और अन्य लोग भारत के सरकारी अधिकारियों को 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर की रिश्वत देने की साजिश में शामिल थे। अडानी ग्रुप ने लगातार इन आपराधिक आरोपों से इनकार किया था। समूह ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि उसने सभी लागू कानूनों और नियामकीय आवश्यकताओं का पालन करते हुए काम किया है।
इस बीच, गौतम अडानी ने एसईसी से संबंधित दीवानी दावों को निपटाने के लिए 60 लाख डॉलर और उनके भतीजे सागर अडानी ने 120 लाख डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई। अडानी एंटरप्राइजेज ने ईरान प्रतिबंधों से जुड़े दावों को निपटाने के लिए अमेरिकी राजकोष को 275 लाख डॉलर का भुगतान करने पर भी सहमति व्यक्त की।
अडानी का अमेरिका में निवेश का वादा
15 जुलाई को दायर एक शपथ पत्र में गौतम अडानी ने पुष्टि की कि उन्होंने पहले अमेरिका में 10 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि उनके वकीलों ने न्याय विभाग को बताया था कि यह वादा मामले के समाधान का हिस्सा बन सकता है। अडानी के वकील रॉबर्ट गिफ्रा ने एक अलग याचिका में कहा कि बचाव पक्ष की टीम ने न्याय विभाग को बताया कि अडानी ग्रुप समझौते के हिस्से के रूप में निवेश को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। न्यायाधीश गारोफिस ने कहा कि वे इस बात पर फैसला नहीं दे रहे हैं कि ये बार-बार दिए जाने वाले प्रस्ताव उचित थे या नहीं। उन्होंने लिखा कि कानून के निष्पक्ष क्रियान्वयन पर ऐसे प्रस्तावों का क्या प्रभाव पड़ता है, यह तय करना जनता पर निर्भर है।
यह भी पढ़ें: गौतम अडानी ‘रिश्वत’ मामला : 2024 से 2026 तक कब क्या हुआ?
भारत के बड़े उद्योगपति गौतम अडानी पर अमेरिका में लगे कथित रिश्वतखोरी और फ्रॉड के आरोप 2024 से लगातार चर्चा में हैं। मामला सोलर एनर्जी कॉन्ट्रैक्ट्स, अमेरिकी निवेशकों और कथित रिश्वत भुगतान से जुड़ा है। आइए जानते हैं इस पूरे विवाद की टाइमलाइन। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
