USA on Russian Oil: ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका का युद्ध लगातार भीषण होता जा रहा है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। कीमतों को बढ़ता देख अमेरिका ने रूसी तेल के प्रति अपनी नरमी दिखाई है। पहले अमेरिका ने दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के उपभोक्ता भारत को रूस से तेल खरीदने की 30 दिनों की अस्थायी अनुमति दी थी, कुछ वैसी ही ढील अब अमेरिका ने कई अन्य देशों को भी दी है।

दरअसल, अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने दूसरे देशों को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने के लिए एक अस्थायी अनुमति की घोषणा की है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ईरान से US युद्ध के जल्दी खत्म होने के कोई संकेत नहीं हैं।

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कीमतें कम करने पर काम कर रहा अमेरिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और सरकार में वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को X पर एक पोस्ट में कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ग्लोबल एनर्जी मार्केट में स्टेबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए अहम कदम उठा रहे हैं और आतंकवादी ईरानी शासन से पैदा हुए खतरे और अस्थिरता से निपटने के लिए कीमतें कम रखने के लिए काम कर रहे हैं।”

स्कॉट बेसेंट ने कहा, “मौजूदा सप्लाई की ग्लोबल पहुंच बढ़ाने के लिए, अमेरिका अन्य देशों को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने की इजाज़त देने के लिए एक टेम्पररी ऑथराइज़ेशन दे रहा है।” उन्होंने कहा कि यह खास तौर पर बनाया गया, शॉर्ट-टर्म उपाय सिर्फ़ उस तेल पर लागू होता है जो पहले से रास्ते में हैं।”

कच्चे तेल की खरीद की वजह से नहीं होगा रूस को फायदा

स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इस रूसी तेल की खरीद की वजह से रूसी सरकार को कोई खास फ़ाइनेंशियल फ़ायदा नहीं होगा। स्कॉट बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की एनर्जी के लिए नीतियों ने US में तेल और गैस का प्रोडक्शन रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचाया है, जिससे मेहनती अमेरिकियों के लिए फ़्यूल की कीमतें कम हुई हैं। तेल की कीमतों में टेम्पररी बढ़ोतरी एक शॉर्ट-टर्म और टेम्पररी रुकावट है, जिससे लंबे समय में हमारे देश और अर्थव्यवस्था को बहुत फ़ायदा होगा।

अमेरिका ने दी भी भारत को छूट

US ने 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से बढ़ रही तेल की कीमतों को कम करने की कोशिशों के तहत भारत को भी रूसी तेल खरीदने के लिए बैन से छूट दी थी। इसका ऐलान अमेरिका की तरफ से 5 मार्च को किया गया था। बता दें कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए थे और किसी भी देश को रूसी तेल न खरीदने की हिदायतें भी दी थीं।

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LPG Crisis in India: क्या ‘पैनिक बाइंग’ है संकट की जड़ (Photo Source: Indian Express)

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