ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की। इसके बाद मोमेनी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात की।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध-विराम को लेकर हुए अंतरिम समझौते के विफल होने के बाद तेहरान के एक शीर्ष अधिकारी ने मंगलवार को पाकिस्तान में मध्यस्थों के साथ बातचीत शुरू की। दो अधिकारियों ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। हालांकि, अधिकारियों ने बैठक के बारे में कोई अन्य जानकारी नहीं दी। मोमेनी के मंगलवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मिलने की संभावना है।
पाकिस्तान की यात्रा पर ईरान के गृह मंत्री
ईरान और अमेरिका के बीच अंतरिम समझौता टूटने के बाद दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष मंगलवार को लगातार 10वें दिन भी जारी रहा। इसी बीच राजनयिक इस समझौते को बचाने की कोशिशों में जुटे रहे, हालांकि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमले करते रहे। संघर्ष में अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान की यात्रा पर ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी के पहुंचने से कूटनीतिक प्रयास तेज होने के संकेत मिले। हालांकि, युद्ध समाप्त करने के लिए किस नए समझौते पर सहमति बन सकती है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
अमेरिका-ईरान के बीच समझौता कराने में पाकिस्तान के सेना प्रमुख की भूमिका
पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते को कराने में पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की अहम भूमिका रही थी। इस समझौते के बाद इस्लामाबाद लगातार दोनों देशों को फिर से बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है ताकि जून में हुए समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) के तहत लंबित मुद्दों का समाधान निकाला जा सके। दोनों देशों के बीच पिछले महीने हुआ अस्थायी समझौता अब टूट चुका है। वहीं, होर्मुज जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही भी लगभग रुक गई है।
होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर संघर्ष तेज होने के साथ ही दोनों पक्षों ने क्षेत्र के नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया है। अमेरिका के लगातार हवाई हमलों के बावजूद तेहरान ने होर्मुज पर अपनी पकड़ ढीली नहीं की है। मंगलवार तड़के अमेरिका ने ईरान पर अपने हवाई हमले जारी रखे जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने जलमार्ग में एक तेल टैंकर को निशाना बनाया, जिससे चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा।
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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के दूत स्टीव विटकोफ से पूछा कि क्या वह कभी ऐसी बातचीत में शामिल हुए हैं, जिसमें किसी भी पल बमबारी होने का खतरा हो। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
