अमेरिका-ईरान सीजफायर से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने एक्स पर मंगलवार को जो पोस्ट किया था, उसकी जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय को पहले से थी। पाक पीएम ने यह पोस्ट व्हाइट हाउस से मंजूरी मिलने के बाद ही एक्स पर पोस्ट की थी। अमेरिका स्थित न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की रिपोर्ट ने ऐसा दावा किया। इसके बाद यह सवाल खड़ा हो गया कि क्या वाशिंगटन ने युद्धविराम की घोषणा करने से पहले इस्लामाबाद का इस्तेमाल एक संकेत के रूप में किया था।
इसको NYT की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि व्हाइट हाउस ने शरीफ के उस सोशल मीडिया पोस्ट को पहले ही मंजूरी दी थी। उसके बाद ही उन्होंने उसे एक्स पर पोस्ट किया। रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि पर्दे के पीछे कूटनीतिक कोशिशें काफी आगे बढ़ चुकी थीं।
शहबाज शरीफ ने मंगलवार में एक्स पर एक पोस्ट किया कि कूटनीति स्थिर, मजबूत और शक्तिशाली तरीके से आगे बढ़ रही है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील की कि ईरान के लिए तय की गई डेडलाइन दो हफ्ते तक आगे बढ़ा दिया जाए। इस पोस्ट में शरीफ ने ट्रंप और उनके प्रमुख सहयोगियों को भी टैग किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, बयान पोस्ट होने से पहले ही व्हाइट हाउस द्वारा देख लिया गया था और उस पर सहमति बन चुकी थी। इससे साफ पता चलता है कि सार्वजनिक रूप से जो तस्वीर दिखाई जा रही थी। उसके मुकाबले पीछे की गतिविधियां ज्यादा सक्रिय थीं। ट्रंप ने ईरान को बड़े हमले की धमकी दी थी, लेकिन उसी दौरान अमेरिकी अधिकारी कूटनीतिक रास्ता निकालने में जुटे हुए थे।
इससे यह पता चलता है कि ट्रंप भले ही ईरान की सभ्यता को नष्ट करने की धमकी दे रहे थे जब तक कि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमत नहीं हो जाता, लेकिन मंगलवार को समय सीमा नजदीक आने के साथ ही संकट से बाहर निकलने का सक्रिय रूप से रास्ता तलाश रहा था।
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इस बात से इनकार किया कि ट्रंप ने यह बयान लिखा था, जबकि कुछ पर्यवेक्षकों ने सोशल मीडिया पर इस बारे में अटकलें लगाई थीं। शरीफ ने शुरू में इस बयान को ” मसौदा – X विषय पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का संदेश ” शीर्षक के साथ पोस्ट किया था। पाकिस्तानी दूतावास ने टिप्पणी के अनुरोध पर तत्काल कोई जवाब नहीं दिया। यह प्रस्ताव कारगर साबित हुआ, कम से कम थोड़े समय के लिए। ट्रंप ने कुछ घंटों बाद घोषणा की कि वह ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हो रहे हैं।
वहीं, फाइनेंशियल टाइम्स की एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि वाशिंगटन कई हफ्तों से इस्लामाबाद के माध्यम से विराम कराने की कोशिश कर रहा था। जिसमें पाकिस्तान की भूमिका “तेहरान को इसके लिए राजी करना” थी। इस प्रयास में पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व शामिल था, जिसमें सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी थे, जो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों और ईरानी समकक्षों के संपर्क में थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका का मानना था कि ईरान एक ऐसे मुस्लिम-बहुल पड़ोसी देश द्वारा दिए गए प्रस्ताव को अधिक आसानी से स्वीकार करेगा जिसने संघर्ष के दौरान तटस्थता बनाए रखी थी। शरीफ ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से संपर्क सहित परामर्श के बाद इस प्रस्ताव को सार्वजनिक किया।
इस पोस्ट के कुछ ही घंटों के भीतर वाशिंगटन और तेहरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम की पुष्टि करते हुए तनाव को कम करने का फैसला किया। हालांकि, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इस बात से इनकार किया कि ट्रंप ने शरीफ का बयान लिखा था, लेकिन इस घटना से पता चलता है कि सार्वजनिक बयानबाजी बढ़ने के बावजूद राजनयिक चैनल कितने सक्रिय थे।
हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल के हवाई हमलों के बाद ईरान ने बुधवार को होर्मुज जलमार्ग को एक बार फिर बंद कर दिया। ईरान ने युद्ध को समाप्त करने के लिए 10 शर्तें रखी हैं। इस मुद्दे पर पहली बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होनी है। इस बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने अमेरिकी वार्ता से पहले युद्धविराम के लिए तीन अलग-अलग प्लान पेश किए जिनमें से पहले ड्राफ्ट को चैटजीपीटी से लिखा गया था। पढ़ें पूरी खबर।
