अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में अमेरिका जिस शक्तिशाली और सस्ते हमलावर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है, वह किसी निजी स्टार्टअप या सिलिकॉन वैली की कंपनी ने नहीं बनाया है। इसके बजाय, यह ड्रोन खुद अमेरिकी सेना ने तैयार किया है। इसे बनाने में ईरानी तकनीक की नकल की गई और उसी आधार पर इसे विकसित किया गया।

युद्ध की शुरुआत से ही एफएलएम 136 (लुकास) नाम का यह ड्रोन ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि रक्षा क्षेत्र की नई कंपनियों द्वारा बनाए गए महंगे और आधुनिक ड्रोन इस संघर्ष में ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं, जबकि यह कम लागत वाला ड्रोन ज्यादा प्रभावी साबित हुआ है।

यह अमेरिका की सेना की एक बड़ी जीत है। इसने दो साल से कम वक्त में एक ड्रोन का खाका तैयार कर उसे युद्ध के लिए तैयार कर दिया और महंगे उपकरणों को धीरे-धीरे खरीदने की अपनी पुरानी परंपरा को त्याग दिया।

शाहेद ड्रोन जैसा अपना ड्रोन बनाने का फैसला किया

जो बाइडेन के प्रशासन के दौरान, अमेरिका के रक्षा विभाग की एक छोटी टीम ने ईरान के शाहेद ड्रोन जैसा अपना ड्रोन बनाने का फैसला किया। शाहेद ड्रोन एक खतरनाक हमलावर ड्रोन माना जाता है। दुनिया की कई सेनाएं और प्रॉक्सी मिलिशिया इसकी नकल करने की कोशिश कर रही हैं। यूक्रेन सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, रूस हर महीने करीब 4,000 संशोधित शाहेद ड्रोन यूक्रेन पर हमला करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना के अनुसंधान एवं इंजीनियरिंग ऑफिस की एक छोटी टीम ने यूक्रेन से बरामद शाहेद नाम के सैन्य उपकरण के पुर्जों को अलग-अलग करके एक हमलावर ड्रोन बनाने की योजना तैयार की। पेंटागन के एक प्रवक्ता के अनुसार, लुकास मिसाइल की कीमत 10000 डॉलर से 55000 डॉलर के बीच है। यह ईरानी मॉडल के अनुरूप है। ईरान के साथ युद्ध में इस्तेमाल की गई सैकड़ों टोमाहॉक लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों की कीमत कम से कम 20 लाख डॉलर प्रति मिसाइल है।

लुकास ड्रोन की खासियत?

रिपोर्ट के अनुसार, लुकास ड्रोन करीब 6 घंटे तक लगातार उड़ सकते हैं और 500 मील से ज्यादा दूरी तय कर सकते हैं। ये ड्रोन मिशन के दौरान खुद ही (बिना लगातार इंसानी कंट्रोल के) उड़ान भर सकते हैं। इन खासियतों की वजह से अमेरिका को दूर बैठे दुश्मन पर बार-बार और कम खर्च में हमला करने की क्षमता मिल गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मुश्किल हालात में इन ड्रोन को परेशानी हो सकती है। खासकर उन जगहों पर जहां, जीपीएस सिग्नल को जाम किया जाता है या फिर एडवांस इलेक्ट्रोनिक सिक्योरिटी सिस्टम लगाए गए हों। ऐसे माहौल में इन ड्रोन की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

कुवैत से लाए गए भारतीयों के शव

कुवैत से एक दुखद खबर सामने आई है, जहां अलग-अलग घटनाओं में जान गंवाने वाले 20 भारतीयों के पार्थिव शरीर विशेष विमान से कोच्चि एयरपोर्ट पहुंचाए गए। यह उड़ान सिर्फ इन शवों को उनके वतन लाने के लिए चलाई गई थी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण फ्लाइट सेवाएं प्रभावित थीं जिसकी वजह से इन पार्थिव शरीरों को भारत लाने में देरी हुई। मृतकों में अधिकतर लोग केरल और तमिलनाडु के रहने वाले थे। पढ़ें पूरी खबर…