अमेरिका ने खुद भारत से समुद्र में मौजूद रूसी तेल खरीदने का आग्रह किया है ताकि आपूर्ति संबंधी दिक्कतों को कम किया जा सके। ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा है कि अमेरिका ने भारत से आग्रह किया है कि वह समुद्र में मौजूद रूसी तेल को खरीदकर उसे भारतीय रिफाइनरियों की ओर भेजे। अमेरिका ने ऐसा इसलिए कहा है ताकि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच आपूर्ति की कमी और कीमतों में अचानक वृद्धि की आशंकाओं को कम किया जा सके।

उन्होंने कहा कि यह कदम बाजार को स्थिर करने का एक अल्पकालिक, व्यावहारिक प्रयास है और इससे रूस के प्रति अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं दिखता। रविवार को सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में राइट ने कहा कि उन्होंने वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ मिलकर भारतीय अधिकारियों से रूसी कच्चे तेल के उन कार्गो को खरीदने के बारे में बात की है जो वर्तमान में चीनी रिफाइनरियों में उतारे जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

रूस के प्रति अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं

राइट ने कहा, “इस पूरे मामले में भारत एक बेहतरीन सहयोगी रहा है। मैंने और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारतीयों से बात की और उन्हें बताया कि चीनी रिफाइनरियों में बहुत सारा तेल उपलब्ध है जो उतारे जाने की प्रतीक्षा कर रहा है।” उन्होंने कहा, “वहां तेल उतारने के लिए छह सप्ताह तक इंतजार करने के बजाय, आइए तेल को पहले ही भारतीय रिफाइनरियों में उतार लें और तेल की कमी के डर, कीमतों में अचानक वृद्धि और बाजार में दिख रही चिंताओं को कम करें।” हालांकि, राइट ने कहा कि रूस के प्रति अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है और भारत इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट है।

कच्चे तेल के दाम बढ़े

ईरान युद्ध तेज होने के बीच तेल के दाम 2022 के बाद से पहली बार 114 डॉलर प्रति बैरल हो गए। अंतरराष्ट्रीय मानक वाले ब्रेंट कच्चे तेल का दाम 114 डॉलर प्रति बैरल हो गया है जो शुक्रवार की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक है। शुक्रवार को तेल का दाम 92.69 डॉलर प्रति बैरल था। ईरान युद्ध के दूसरे हफ्ते भी जारी रहने से कई देश और स्थान उसकी अपनी चपेट में आ गये हैं, जिसके कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। फारस की खाड़ी में ये वे देश हैं जो तेल और गैस के उत्पादन और परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह “अस्थायी” तेल की बढ़ोतरी स्वीकार्य है अगर इससे ईरान के परमाणु हथियारों का खतरा खत्म किया जा सके। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें

(इनपुट- पीटीआई)