अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने लगभग हर अमेरिकी व्यापारिक साझेदार से आयात पर व्यापक शुल्क लगाकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया। सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल के एजेंडे के लिए यह एक बड़ा झटका है।
सुप्रीम कोर्ट के 6-3 के फैसले का अमेरिकी अर्थव्यवस्था, उपभोक्ताओं और राष्ट्रपति की व्यापार नीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। ट्रंप पहले ऐसे राष्ट्रपति हैं जिन्होंने यह दावा किया है कि 1970 के दशक के एक आपातकालीन कानून, जिसमें “टैरिफ” शब्द का उल्लेख नहीं है। उन्हें कांग्रेस की मंजूरी के बिना एकतरफा रूप से शुल्क लगाने की अनुमति दी।
बहुमत की ओर से लिखते हुए मुख्य न्यायाधीश जॉन जी. रॉबर्ट्स जूनियर ने कहा कि यह कानून राष्ट्रपति को शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देता है।
चीफ जस्टिस ने लिखा, “राष्ट्रपति असीमित मात्रा, अवधि और दायरे के शुल्क एकतरफा रूप से लगाने की असाधारण शक्ति का दावा करते हैं। इस कथित अधिकार की व्यापकता, इतिहास और संवैधानिक संदर्भ को देखते हुए, उन्हें इसका प्रयोग करने के लिए स्पष्ट रूप से कांग्रेस द्वारा अधिकृत अनुमति प्रस्तुत करनी होगी।” न्यायमूर्ति क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल ए. एलिटो जूनियर और ब्रेट एम. कवानॉ ने असहमति व्यक्त की।
पिछले साल की शुरुआत में ट्रंप ने 1977 के अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम का इस्तेमाल करते हुए 100 से अधिक देशों से आयातित वस्तुओं पर शुल्क निर्धारित किया। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य व्यापार घाटे को कम करना और संयुक्त राज्य अमेरिका में विनिर्माण को बढ़ावा देना था। तब से, उन्होंने राजस्व बढ़ाने और व्यापार वार्ताओं में अन्य देशों पर दबाव बनाने के लिए इन शुल्कों का उपयोग किया है।
एक दर्जन राज्यों और छोटे व्यवसायों के एक समूह ने जिनमें एक शैक्षिक खिलौना निर्माता और एक शराब आयातक शामिल हैं, टैरिफ के खिलाफ मुकदमा दायर किया। उनका कहना था कि राष्ट्रपति ने संविधान के तहत कर लगाने की कांग्रेस की शक्ति का गैरकानूनी रूप से उल्लंघन किया है। आयातित वस्तुओं पर निर्भर इन व्यवसायों ने अदालत में दायर दस्तावेजों में तर्क दिया कि टैरिफ ने उनके संचालन को बाधित किया है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ी हैं और कर्मचारियों की संख्या में कटौती हुई है।
अदालती दस्तावेजों और सोशल मीडिया पोस्टों में राष्ट्रपति और उनके सलाहकारों ने सुप्रीम कोर्ट के इस मामले के नतीजे को अपनी व्यापार और विदेश नीतियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया और स्पष्ट किया कि वे हार को व्यक्तिगत अपमान मानेंगे। सॉलिसिटर जनरल ने न्यायाधीशों को चेतावनी दी थी कि आपातकालीन शक्ति के बिना, महामंदी जैसी आर्थिक तबाही मच जाएगी, साथ ही व्यापार वार्ता में बाधा आएगी और कूटनीतिक रूप से शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी।
लेकिन अदालती लड़ाई के दौरान भी राष्ट्रपति ने 1977 के कानून के विकल्पों की खोज शुरू कर दी। ट्रंप के शीर्ष व्यापार वार्ताकार जैमीसन ग्रीर ने पिछले महीने कहा था कि प्रशासन अदालत द्वारा अमान्य घोषित किए गए किसी भी आपातकालीन शुल्क को अन्य शुल्कों से बदलने के लिए तुरंत कदम उठाएगा। राष्ट्रपति पहले ही अन्य कानूनों का उपयोग करके शुल्क निर्धारित कर चुके हैं, जिनमें कुछ विशिष्ट वस्तुओं और उद्योगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित शुल्क भी शामिल हैं। फिर भी, अन्य कानून जो राष्ट्रपति को शुल्क लगाने की शक्ति अधिक स्पष्ट रूप से प्रदान करते हैं, आपातकालीन कानून की तुलना में अधिक सीमित और कम लचीले हैं।
ट्रम्प ने शुरुआत में चीन, कनाडा और मैक्सिको से अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर शुल्क लगाया था, यह कहते हुए कि ये शुल्क उन देशों द्वारा फेंटानिल के प्रवाह को रोकने में विफल रहने के लिए दंड के रूप में लगाए गए थे। अप्रैल में, उन्होंने लगभग सभी व्यापारिक साझेदारों से आयातित वस्तुओं पर शुल्क का विस्तार किया। यह कहते हुए कि शेष विश्व के साथ व्यापार घाटे को दूर करने के लिए इनकी आवश्यकता थी।
1970 के दशक के कानून के तहत, राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में कुछ कदम उठाने का अधिकार है ताकि “संयुक्त राज्य अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति या अर्थव्यवस्था” के लिए “किसी भी असामान्य और असाधारण खतरे” से निपटा जा सके। इसमें विदेशी संपत्ति के “आयात” को “विनियमित” करने की शक्ति भी शामिल है। पूर्व राष्ट्रपतियों ने इस भाषा का उपयोग अन्य देशों पर प्रतिबंध या व्यापार निषेध लगाने के लिए किया है, लेकिन कर लगाने के लिए नहीं। लेकिन प्रशासन का तर्क है कि यह वाक्यांश श्री ट्रम्प को शुल्क लगाने की शक्ति भी देता है।
नवंबर में मौखिक बहस के दौरान कई रूढ़िवादी न्यायाधीशों ने ट्रम्प प्रशासन के वकील से तीखे सवाल किए कि क्या कांग्रेस ने जानबूझकर राष्ट्रपति को व्यापक कराधान शक्तियां सौंपी थीं, जो संविधान आम तौर पर सांसदों के लिए आरक्षित रखता है। तीन निचली अदालतों द्वारा टैरिफ को गैरकानूनी घोषित करने के बाद यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। अगस्त में फेडरल सर्किट के लिए अमेरिकी अपील न्यायालय ने 7-4 के बहुमत से फैसला सुनाया कि आपातकालीन कानून व्यापक टैरिफ को अधिकृत नहीं करता है, जबकि यह तय करने से इनकार कर दिया कि क्या यह कानून ट्रम्प को अधिक सीमित शुल्क लगाने की अनुमति दे सकता है।
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बोर्ड ऑफ पीस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने हमारे चीफ ऑफ स्टाफ के सामने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत और हमारे बीच युद्ध रोककर 2 करोड़ लोगों की जान बचाई। वह युद्ध भयंकर रूप से चल रहा था। विमानों को मार गिराया जा रहा था। मैंने दोनों से फोन पर बात की और मैं उन्हें थोड़ा-बहुत जानता था। मैं प्रधानमंत्री मोदी को बहुत अच्छी तरह जानता था। मैंने उन्हें फोन किया और कहा कि अगर तुम दोनों इस मामले को नहीं सुलझाते हो तो मैं तुम्हारे साथ कोई व्यापारिक समझौता नहीं करूंगा और अचानक, हमने एक समझौता कर लिया।” पढ़ें पूरी खबर।
