scorecardresearch

भारत बनेगा अमेरिका का वैश्विक रणनीतिक भागीदार, सीनेट में पेश किया गया विधेयक

सीनेट संशोधन 4618 के अनुसार, कांग्रेस की यह भावना है कि अमेरिका और भारत के सामने सुरक्षा संबंधी साझा खतरे हैं और रक्षा भागीदारी को मजबूत बनाना दोनों देशों के हित में है।

US Congress, US senator, India US Relations, Narendra Modi, Modi in US Congress
बुधवार (8 जून) को वॉशिंगटन में यूए कांग्रेस के संयुक्त बैठक को संबोधित करते भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फोटो)

अमेरिका के एक शीर्ष रिपब्लिकन सीनेटर ने राष्ट्रपति से भारत को अमेरिका के ‘वैश्विक रणनीतिक एवं रक्षा भागीदार’ के तौर पर मान्यता देने को कहा है। इस आशय का एक विधेयक पेश कर उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के सामने मौजूद सुरक्षा संबंधी साझा खतरे और रणनीतिक भागीदारी को मजबूत बनाना दोनों देशों के हित में है। रक्षा निर्यात नियंत्रण नियमनों में आवश्यक बदलाव की मांग करते हुए सीनेट की शस्त्र सेवा समिति के अध्यक्ष जॉन मक्केन ने नेशनल डिफेन्स ऑथराइजेशन एक्ट (एनडीएए) 2017 में विधायी संशोधन के लिए विधेयक पेश किया है।

यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित किए जाने के एक दिन बाद उठाया गया। मोदी ने अपने संबोधन में दोनों देशों के बीच व्यापक रक्षा सहयोग का आह्वान किया था। सीनेट संशोधन 4618 के अनुसार, कांग्रेस की यह भावना है कि अमेरिका और भारत के सामने सुरक्षा संबंधी साझा खतरे हैं और रक्षा भागीदारी को मजबूत बनाना दोनों देशों के हित में है। संशोधन में कहा गया है कि अमेरिका और भारत के बीच संबंध बीते दो दशकों में विकसित हो कर बहुपक्षीय, वैश्विक रणनीतिक और रक्षा भागीदारी वाले बन गए हैं जिनकी जड़ें साझा लोकतांत्रिक मूल्यों में, परस्पर समृद्धि, व्यापक आर्थिक भागीदारी, क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता को बढ़ाने में हैं।

इसमें कहा गया है कि ऐसी कार्रवाइयां रक्षा निर्यात नियंत्रण नियमनों में समुचित बदालाव के माध्यम से ‘भारत को अमेरिका के रणनीतिक भागीदार और रक्षा भागीदार के तौर पर मान्यता देने के लिए शायद जरूरी हो सकती हैं।’ संशोधन विधेयक में कहा गया है ‘भारत के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की राष्ट्रपति की प्रतिबद्धता को दक्षिण एशिया में और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाने के लिए प्राथमिकता के तौर पर समझा जाना चाहिए।’

एनडीएए को सीनेट में मतदान के लिए अगले सप्ताह पेश किया जाना है और सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का वर्चस्व है। संशोधन में राष्ट्रपति से अमेरिका-भारत रक्षा प्रौद्योगिकी एवं व्यापार पहल के प्रभाव को तथा रक्षा विभाग के ‘इंडिया रैपिड रिएक्शन सेल’ के टिकाउपन के प्रभाव को मजबूत करने का आग्रह किया गया है।

इसमे अमेरिकी राष्ट्रपति से मानवीय सहायता, आपदा राहत, दस्यु समस्या से निपटने और नौवहन डोमेन जागरूकता जैसे क्षेत्र में मिशन के लिए भारतीय सेना के साथ साझा सैन्य योजना बनाने और संतुष्टि के संदर्भ में आधुनिक प्रौद्योगिकी के स्थानांतरण को मंजूरी देने और उसे सुगम बनाने के लिए भी कहा गया है। इसमें अमेरिका और भारत के बीच रक्षा व्यापार, सुरक्षा सहयोग तथा सह-उत्पादन एवं सह-विकास के अवसरों की राह में बाधक मुद्दों के समाधान के लिए भी कहा गया है।

विधेयक के तहत, अमेरिकी राष्ट्रपति से आदेश पर हुई साइबर सुरक्षा तथा एंड यूज निगरानी व्यवस्था जैसी रक्षा प्रौद्योगिकी सूचना एवं उपकरण की सुरक्षा के प्रमाणन के लिए परस्पर सहमतियोग्य व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से भारत के साथ सहयोग करने को भी कहा गया है। भारत अमेरिका रक्षा संबंधों के सहयोग की द्विदलीय प्रकृति को देखते हुए और मक्केन द्वारा खुद इसे पेश किए जाने के संदर्भ में यह विधेयक पारित होने की उम्मीद है।
प्रतिनिधि सभा में भी ऐसा ही विधायी कदम उठाया गया है।

पढें अंतरराष्ट्रीय (International News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.

अपडेट