रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिका का दबाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी सीनेट में रूस पर नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने के लिए एक नया विधेयक (बिल) पेश किया गया है। इस बिल में भारत का भी नाम शामिल है। यदि यह कानून बन जाता है, तो अमेरिका भारत समेत पांच देशों पर अतिरिक्त टैरिफ (आयात शुल्क) लगा सकता है, क्योंकि ये देश अब भी रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहे हैं। हालांकि, यह बिल अभी कानून नहीं बना है। इसे लागू होने से पहले अमेरिकी सीनेट, प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना जरूरी है।

यह बिल डेमोक्रेट और रिपब्लिकन, दोनों दलों के कई सांसदों ने मिलकर पेश किया है। इसे रूस की अर्थव्यवस्था पर बड़ा दबाव बनाने की कोशिश माना जा रहा है। बिल के मुख्य प्रस्तावक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि इसका मकसद सिर्फ टैरिफ लगाना नहीं, बल्कि रूस के ऊर्जा, बैंकिंग, रक्षा उद्योग, बड़े कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाना है।

बिल में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को उन पांच देशों में रखा गया है, जो रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीद रहे हैं। इन देशों पर कितना टैरिफ लगाया जाएगा, यह अभी तय नहीं किया गया है। बिल में केवल यह व्यवस्था की गई है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका का व्यापार प्रतिनिधि (यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव) इसकी दर तय करेगा। सीनेटर ब्लूमेंथल ने कहा कि टैरिफ इतना जरूर होगा कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों को इससे बचने के लिए अपनी नीति बदलने पर मजबूर होना पड़े।

इस बिल में राष्ट्रपति को कुछ मामलों में राहत देने का अधिकार भी दिया गया है। यदि भविष्य में किसी देश पर लगाया गया टैरिफ कम किया जाता है, तो इसकी जानकारी अमेरिकी संसद को देनी होगी।

अमेरिकी सांसदों ने बताया कि पहले इस बिल का दायरा काफी बड़ा था और इसमें 60 से अधिक देशों पर कार्रवाई का प्रस्ताव था। लेकिन बाद में इसमें बदलाव कर केवल उन देशों पर ध्यान दिया गया जो रूस से सबसे अधिक तेल या गैस खरीद रहे हैं। उनका कहना है कि इससे बिल के पारित होने की संभावना बढ़ जाएगी।

इस विधेयक को कुछ सांसद दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में से एक बता रहे हैं। ग्राहम ने करीब दो वर्षों तक इस प्रस्ताव पर काम किया था। उनके निधन के बाद उनके सहयोगियों ने इसे आगे बढ़ाया है। कई सांसदों ने कहा कि ग्राहम ने अपने जीवनकाल में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ इस बिल को लेकर बातचीत भी की थी।

इस बीच व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बिल का समर्थन करते हैं। अधिकारी के अनुसार, यदि यह कानून बनता है तो राष्ट्रपति को रूस के ऊर्जा क्षेत्र से कारोबार करने वाले देशों से आने वाले आयात पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।

भारत ने अब तक रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना जारी रखा है। नई दिल्ली का कहना है कि यह फैसला देश की ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों को सस्ती कीमत पर ईंधन उपलब्ध कराने के लिए जरूरी है। भारत का यह भी तर्क है कि इससे वैश्विक तेल बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलती है।

फिलहाल यह बिल शुरुआती चरण में है। इसे कानून बनने से पहले अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पारित होना होगा। इसलिए भारत पर किसी नए टैरिफ या प्रतिबंध को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। लेकिन इस प्रस्ताव ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका आगे और सख्त रुख अपना सकता है।

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