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सूर्य के प्रकाश से उर्वरक बनाने का अनूठा तरीका

अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अनुसंधान में पाया कि एन2 में बदलाव के लिए प्रकाश ऊर्जा का इस्तेमाल करके उससे नाइट्रोजन और हाइड्रोजन के एनएच3 का निर्माण किया जा सकता है

Author वाशिंगटन | April 24, 2016 00:23 am
सूरज। (रॉयटर्स फोटो)

वैज्ञानिकों ने सूर्य के प्रकाश का इस्तेमाल करके उर्वरक के मुख्य घटक अमोनिया की एक नई पर्यावरणोन्मुखी किस्म का निर्माण किया है। अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अनुसंधान में पाया कि डाईनाइट्रोजन (एन2) में बदलाव के लिए प्रकाश ऊर्जा का इस्तेमाल करके उससे नाइट्रोजन और हाइड्रोजन के यौगिक अमोनिया (एनएच3) का निर्माण किया जा सकता है। एन2 एक अणु है, जो नाइट्रोजन के दो परमाणुओं से मिलकर बना होता है।

अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि अमोनिया का निर्माण करने वाली प्रकाश संचालित नई रासायनिक प्रक्रिया से वैश्विक स्तर पर कृषि को बढ़ावा मिलेगा और जीवाश्म र्इंधनों पर निर्भरता घटेगी। अमेरिका के ऊर्जा मंत्रालय के राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा प्रयोगशाला (एनआरइएल) और कोलोराडो बोल्डर (सीयू बोल्डर) यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि प्रकाश की उपस्थिति में कैडमियम सल्फाइड यौगिक के नैनो आकार के रवों का इस्तेमाल करने से रासायनिक परिवर्तन के दौरान इलेक्ट्रॉन में इतनी ऊर्जा जुड़ जाती है कि इसके कारण एन2 अमोनिया में परिवर्तित हो जाता है।

जीवों के इस्तेमाल के लिए धरती के वातावरण में नाइट्रोजन एक आम गैस है। पारंपरिक तौर पर नाइट्रोजन परिवर्तन के दो मुख्य तरीके हैं- पहला जैविक प्रक्रिया है, जिसमें वातावरण में मौजूद नाइट्रोजन फलियों (लेग्यूम) जैसे कुछ पादपों की जड़ों में पाए जाने वाले जीवाणु के संपर्क में आता है और फिर नाइट्रोजीनेज नामक एंजाइम की उपस्थिति में अमोनिया में परिवर्तित होता है। दूसरी, हैबर-बॉश प्रक्रिया है, जो सदियों पहले ईजाद किया गया एक औद्योगिक तरीका है। इस प्रक्रिया में उच्च तापमान और दबाव में जटिल प्रक्रियाओं से गुजार कर एन2 को अमोनिया में बदला जाता है। हैबर-बॉश प्रक्रिया में जीवाश्म र्इंधन के इस्तेमाल की आवश्यकता होती है, जिसके चलते ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वृद्धि होती है।

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