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अमेरिका ने कहा, PAK कोई ऐसा कदम न उठाए जिससे खतरा बढ़े

पाकिस्तान के परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रम पर चिंता जाहिर करते हुए अमेरिका ने उसे इन कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए कहा है।

पाकिस्तान के परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रम पर चिंता जाहिर करते हुए अमेरिका ने उसे इन कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए कहा है। अमेरिका ने पाकिस्तान से कहा है कि वह ऐसा कोई कदम न उठाए, जिससे परमाणु सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता पर खतरा बढ़े।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि रिचर्ड ओल्सन ने सदन की विदेश मामलों की समिति द्वारा पाकिस्तान के मुद्दे पर आयोजित सुनवाई में सांसदों से कहा, ‘मैं यह कहना चाहता हूं कि हम आपकी चिंताओं से वाकिफ हैं, विशेषकर पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के विकास से जुड़ी चिंता से। हमें सबसे ज्यादा चिंता पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम की गति और इसके विस्तार को लेकर है, जिसमें परमाणु तंत्र पर काम करना भी शामिल है।’

कांग्रेस के सदस्य ब्रियान हिगिंस के एक सवाल के जवाब में ओल्सन ने कहा, ‘हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि दक्षिण पश्चिम एशिया का पारंपरिक संघर्ष बढ़कर परमाणु शक्ति के इस्तेमाल तक भी पहुंच सकता है क्योंकि बढ़ते जखीरों के चलते सुरक्षा की चुनौतियां बनी हुई हैं।’

ओल्सन की ये टिप्पणियां एक ऐसे समय पर आई हैं, जब अमेरिकी सांसदों ने अमेरिकी सरकार से इस्लामाबाद के साथ सख्त होने के लिए कहा है। इसके पीछे उनका तर्क यह है कि पाकिस्तान भारत के साथ अपने संबंध सुधारने के मामले में संजीदा नहीं दिखता और उसने हथियारों के उत्पादन की गति भी बढ़ा दी है।

कार्नेगी एनडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के अनुसार, पाकिस्तान के पास अगले दशक में 350 परमाणु हथियार हो सकते हैं। इसके साथ ही वह भारत, फ्रांस, चीन और ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी परमाणु शक्ति बन सकता है।’
उन्होंने कहा, ‘भारत के साथ पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार के कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिल रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान अपने परमाणु प्रसार को बाहरी आक्रमण के खिलाफ तैयारी बताते हुए उचित ठहराता है। जो दोहरा खेल वे खेलते आ रहे हैं, हमें उसे बंद करने के लिए कहना होगा। यह खेल वह पिछले 15 साल से खेल रहे हैं।’

हिगिंस ने कहा, ‘पाकिस्तान दोहरा खेल खेलता है। वे सैन्य साझीदार हैं लेकिन वे हमारे शत्रुओं के संरक्षक एवं रक्षक हैं। यह 15 साल से चल रहा है। वर्ष 2002 के बाद से पाकिस्तान को अमेरिका की ओर से एक साल में दी जाने वाली आर्थिक एवं सैन्य मदद औसतन लगभग दो अरब डॉलर की रही है। पाकिस्तान का वार्षिक रक्षा बजट महज पांच अरब डॉलर प्रति वर्ष का है।’
उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान टूट जाता है या अगर इस्लामी चरमपंथी इस पर कब्जा कर लेते हैं तो यह स्थिति अमेरिका के लिए एक बुरा सपना साबित होगी। इस्लामी चरमपंथियों को परमाणु हथियारों से लैस करना अल-कायदा का प्राथमिक लक्ष्य है। यह उनके लिए एक बड़ी जीत होगी। यह अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट के विस्तार की वजह बनेगी और यह हमारी यानी अमेरिका की बड़ी हार होगी।’

 

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