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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने की PM मोदी की तारीफ, बोले- एक अरब से ज्यादा के देश ने मिडिल क्लास को भरपूर मौके दिये

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि, 'इंडिया आजादी की 70वीं सालगिरह मना रहा है, ये एक संप्रभु देश है। इसके बारे में सोचिए यहां एक अरब से ज्यादा लोग रहते हैं।'

शुक्रवार को ट्रंप ने कहा कि भारत ने दुनिया के लिए अपनी इकोनॉमी के दरवाजे खोल शानदार तरक्की हासिल की है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आर्थिक नीतियों की तारीफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की है। ट्रंप ने कहा है कि भारत ने पिछले कुछ सालों में जबर्दस्त कामयाबी हासिल की है। वियतनाम में एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) समिट को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी भारत जैसे विशाल देश और इसके लोगों को एक जुट करने के लिए बेहद कामयाबी के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत अपनी आजादी की 70वीं सालगिरह मना रहा है। और एक अरब से ज्यादा लोगों के इस देश ने अपनी अर्थ व्यवस्था को दुनिया के लिए खोलने के बाद बहुत कामयाबी हासिल की है। इसी मंच से ट्रंप ने चीन की आर्थिक नीतियों की आलोचना की और कहा कि चीन की गलत व्यापारिक नीतियों की वजह से कई अमेरिकी रोजगार से हाथ धो बैठे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका चीन की इस पक्षपात पूर्ण नीति को ज्यादा दिनों तक सहन नहीं करेगा।

चीन से वियतनाम के दा नांग शहर पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि, ‘इंडिया आजादी की 70वीं सालगिरह मना रहा है, ये एक संप्रभु देश है। इसके बारे में सोचिए यहां एक अरब से ज्यादा लोग रहते हैं।’ अपने चिर परिचित अंदाज में ट्रंप ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। आगे उन्होंने कहा कि, ‘जब से भारत ने अपने अर्थ व्यवस्था के दरवाजे दुनिया के लिए खोले इसने काफी तरक्की हासिल की, और अपने उभरते मध्य वर्ग के लिए मौकों का नया संसार ढूंढ़ा।’ भारत को अपना दोस्त बता चुके ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी इस विशाल देश और इसके लोगों को एक साथ लाने के लिए काम कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि मोदी बेहद ही कामयाबी के साथ इस काम को अंजाम दे रहे हैं।’

ट्रंप ने अपने भाषण में चीन को भी लताड़ लगाई। खास बात ये है कि ये इस कार्यक्रम से तुरंत पहले ट्रंप चीन में ही थे। उन्होंने कहा कि चीन की गलत व्यापारिक नीतियों के बारे में उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से साफ साफ बात की है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के साथ चीन का ट्रेड सरप्लस जो इस साल के 10 महीनों में 223 बिलियन डॉलर हो गया है ये उन्हें मंजूर नहीं है। इस सम्मेलन में जापान, चीन, रूस और दक्षिण कोरिया के राजनीतिज्ञ भी शिरकत कर रहे हैं।

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