अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लंबे वक्त तक चले संघर्ष का असर अब दुबई की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। दुबई में पहले हजारों प्रवासी कामगारों को काम मिल जाता था लेकिन अब वहां नौकरी मिलना आसान नहीं है। इसके अलावा वेतन और नौकरी के मौके भी काफी कम हो गए हैं।
संघर्ष के दौरान ईरान ने यूएई पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इस वजह से ऐसे कारोबार जो पर्यटन, विमानन और विदेशी पर्यटकों पर निर्भर हैं, उन पर काफी असर पड़ा।
फिलिपींस की घरेलू सहायिका विवंदा दुबई की गर्मी में अपने लिए नौकरी खोजती हैं, अजनबी लोगों से पूछती हैं कि क्या उन्हें घर के काम में मदद के लिए किसी की जरूरत है? मार्च में विवंदा की नौकरी चली गई और इस दौरान उनका परिवार दुबई से बाहर चला गया और वापस नहीं आया।
विवंदा फिलिपींस भी नहीं जा सकती क्योंकि दुबई में उन्हें जो भी पैसा मिलता है, उससे वह चार बच्चों को पालती है।
दुबई में बाहर से काम की तलाश में आए बाकी लोगों के साथ ऐसे ही हालात हैं और वे घर-घर जाकर नौकरी के लिए अपना बायोडाटा देते हैं।
नए लोगों की भर्ती बंद
भारतीय मूल के अकाउंटेंट रहमान एक कैटरिंग कंपनी में काम करते थे, अब कंपनी बिल्कुल बंद हो गई है। रहमान बताते हैं कि अब कारोबार खत्म हो चुका है और कंपनी के पास कर्मचारी और सप्लायर को देने के लिए पैसे नहीं हैं।
रहमान बताते हैं कि कई कंपनियों ने नए लोगों को भर्ती करना बंद कर दिया है। कैमरून के रहने वाले वेल्डर यानिक ओबी कहते हैं कि वह हर दिन काम पर जाते हैं लेकिन काम नहीं मिलता।
छंटनी करने की योजना बना रही कंपनियां
546 कंपनियों के बीच किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि हर चार में से एक एम्प्लॉयर 2026 की तीसरी तिमाही में छंटनी करने की योजना बना रहा है। वहीं, हर तीन में से एक कंपनी नई भर्ती नहीं करेगी।
सरकार क्या कर रही है?
यूएई की सरकार ने कारोबारियों को मंदी से उबरने के लिए 680 मिलियन डॉलर से ज्यादा के सहायता पैकेज जारी किए हैं लेकिन ऐसे लोग जो दुबई में काम करके अपने घर पैसे भेजते हैं, उन पर इस मंदी का काफी असर हुआ है। ऐसे ही वेंकट भी हैं, वह दुबई में होटल हाउसकीपर का काम करते थे। इस साल अप्रैल में उनकी नौकरी चली गई और वह घर वापस आ गए।
रहमान कहते हैं कि वह किसी तरह अपना गुजारा कर रहे हैं। रहमान कहते हैं कि अगर वह दुबई वापस नहीं गए तो उनके बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच कुछ समय के लिए युद्धविराम भी हुआ था और लोगों को ऐसा लगता था कि हालात जल्द ठीक हो जाएंगे लेकिन कुछ दिन बाद ही अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर फिर से हमले शुरू कर दिए।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों का विस्तार करने की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान अगर परमाणु वार्ता के लिए लौटने से इनकार करता है तो अगले सप्ताह स्थिति वास्तव में खराब हो जाएगी। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
