ईरान ने इसी सप्ताह में होमुर्ज जलमार्ग के पास एक अमेरिका के एडवांस ड्रोन एमक्यू-9 रीपर को मार गिराया। अल जजीरा के रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने इस रीपर ड्रोन को मार गिराने के लिए अपने नए एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया था, जिसका नाम अराश-ए-कमंगीर बताया जा रहा है।
ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी फार्स ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि होमुर्ज में केश्म द्वीप के पास ईरान की ओर से की गई कार्रवाई में इस सिस्टम को पहली बार इस्तेमाल किया है, इसमें स्टेल्थ डिटेक्शन क्षमताएं मौजूद हैं।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में किया हमला
ईरान ने यह हमला अमेरिका के उस कार्रवाई के जवाब में किया, जिसमें अमेरिका ने बंदर अब्बास के पास एक ईरान सैन्य ठिकाने पर हमला किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक अमेरिकी एयरबेस पर हमला किया।
अगर इस हमले की पुष्टि हो जाती है तो यह दुनिया के सबसे बिजी शिपिंग रूटों में से एक होमुर्ज जलमार्ग के आसपास ईरान की ओर बनाई जा रहे एयर डिफेंस सिस्टम में एक अहम घटनाक्रम साबित होगा। साथ ही होमुर्ज में ईरान का दबदबा और प्रभावशाली हो जाएगा।
ईरान ने क्या कहा
अल जजीरा के मुताबिक फार्स एजेंसी ने कहा कि अराश ए कमंगीर सिस्टम का इस्तेमाल कर होमुर्ज जलमार्ग के ऊपर उड़ रहे एक दुश्मन जासूसी ड्रोन को रोकने के लिए किया गया था। यह उन दुश्मनों के लिए चेतावनी थी जो ईरान के एयर स्पेस और उसकी समुद्री सीमाओं के करीब नजर बनाए रखे हैं।
फार्स ने नाम न बताने की शर्त पर कुछ अधिकारियों के हवाले से कहा, “यह ऑपरेशन ईरान की ओर से एक स्पष्ट और निर्णायक संदेश है।” ईरान ने इस सिस्टम को छिपी हुई क्षमताओं वाले सिस्टम में से एक बताया। हालांकि ईरान ने इस सिस्टम के बारे में कोई और तकनीकी जानकारी नहीं दी है।
क्या है अराश-ए-कमंगीर का मतलब?
फार्स की ओर से बताए गए नए इंटरसेप्टर सिस्टम का फारसी मतलब है, धनुर्धारी अराश। अल जजीरा ने बताया कि इसका नाम फारसी पौराणिक कथाओं के एक ऐसे नायक के नाम पर रखा गया है, जिसने ईरान और मध्य एशिया के बीच सीमा निर्धारित करने के लिए एक तीर चलाया था। आगे बताया गया, अराश एक ऐसे नायक का प्रतीक है, जिसने अंतरराष्ट्रीय प्रभुत्व के खिलाफ ईरान की लड़ाई में उसकी सहायता की थी।
इस बदलाव का ईरान के लिए क्या मतलब है?
अल जजीरा के मुताबिक, विशेषज्ञ ईरान की नए सिस्टम को बदलाव, कम लागत वाले एयर डिफेंप सिस्टम की ओर निर्णायक कदम मान रहे हैं। इस सिस्टम में ऐसे छोटे सिस्टम शामिल हैं, जिन्हें आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है, तेजी से लॉन्च किया जा सकता है, छिपाया जा सकता है और आसानी से बदला भी जा सकता है।
इस सिस्टम को इस तरह से बनाया गया है कि इंटरसेप्टर तब तक हवा में इंतजार कर सकता है, जब तक उसका सामना लक्षित ड्रोन या फाइटर जेट न हो जाए।
रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें अन्य हथियार भी शामिल हैं, जैसे कि कम दूरी के एंटी-ड्रोन या एंटी एयरक्राफ्ट। ये हथियार, बड़े एयर डिफेंस बैटिरियों की तुलना में कम उन्नत होते हैं, लेकिन इन्हें बनाना और बदलना कहीं अधिक आसान होता है। इन्हीं विशेषताओं के कारण ही अमेरिकी रीपर , ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम से सामने विशेष रूप से कमजोर साबित हुआ है।
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कई हफ्तों से मध्यस्थ के माध्यम से ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर पहुंचने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं। जिससे मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध का अंत हो सके। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्ष (अमेरिका-ईरान) अंततः एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमत हो गए हैं, जिसके तहत दोनों देश सीजफायर को 60 दिनों के लिए बढ़ाएंगे और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करेंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
