अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने एक 14-बिंदु समझौते (MoU) पर वर्चुअली हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच जारी तनाव और सैन्य कार्रवाई को खत्म करना, होर्मुज जलमार्ग (Strait Of Hormuz) को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम तथा प्रतिबंधों को लेकर 60 दिनों की बातचीत की प्रक्रिया शुरू करना है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, एक व्हाइट हाउस अधिकारी के हवाले से बताया गया कि डोनाल्ड ट्रंप ने यह दस्तावेज बुधवार को पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात के दौरान हस्ताक्षर किए। यह समझौता ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान द्वारा भी हस्ताक्षरित किया गया और इसे तुरंत लागू कर दिया गया।
अमेरिका ने MoU किया जारी
सीएनएन के मुताबिक, अमेरिका ने इस ‘अमेरिका-ईरान इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ (Islamabad Memorandum of Understanding) का आधिकारिक मसौदा भी जारी कर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14-बिंदुओं वाले समझौते का पूरा टेक्स्ट सामने आ गया है। अमेरिका ने बुधवार को इस समझौते को सार्वजनिक किया।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, इस ऐतिहासिक करार के तहत वैश्विक व्यापार के लिए अहम माने जाने वाले होर्मुज जलमार्ग को दोबारा खोला जाएगा। इसके साथ ही अमेरिका, ईरान पर लगे कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने पर भी सहमत हुआ है जबकि बदले में आगे होने वाली बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शामिल किया जाएगा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस समझौते में लेबनान को भी किसी ना किसी रूप में जोड़ा गया है।
तुरंत होर्मुज खोलने की अनुमति
एक अधिकारी के हवाले से CNN ने बताया कि यह समझौता मूल रूप से ऐसा है जिससे तुरंत होर्मुज जलमार्ग को खोलने की अनुमति मिलती है, ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध किया जाता है। इसके बदले एक ऐसी व्यवस्था बनती है जिसमें ईरान के व्यवहार के अनुसार अमेरिका आर्थिक और प्रतिबंधों में राहत बढ़ा या घटा सकता है जिससे वह अधिक समृद्ध देश बन सके।
प्रेस टीवी के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघाई ने पुष्टि की कि इस समझौते का मसौदा अंतिम रूप से तैयार कर दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि ओमान और अन्य देशों के साथ लंबे समय से विचार-विमर्श चल रहा था और होर्मुज जलमार्ग के प्रबंधन को लेकर अधिकतर व्यवस्था पहले ही तय कर ली गई थी। बाघाई ने कहा कि सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। लेकिन साथ ही ईरान की संप्रभुता और अधिकार होर्मुज जलमार्ग पर बने रहेंगे।
अमेरिका-ईरान 14-पॉइंट समझौते में क्या-क्या है?
- 1.सैन्य कार्रवाई और सभी लड़ाई को तुरंत और स्थायी रूप से खत्म करना
अमेरिका और ईरान ने अपने-अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ‘सभी मोर्चों पर (जिसमें लेबनान भी शामिल है ) सैन्य अभियानों को ‘तत्काल और स्थायी’ रूप से समाप्त करने की घोषणा की। दोनों पक्षों ने यह भी सहमति जताई कि वे एक-दूसरे के खिलाफ कोई युद्ध शुरू नहीं करेंगे और नe ही किसी प्रकार की धमकी देंगे या बल प्रयोग करेंगे। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ‘लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता’ बनी रहे।
समझौते में कहा गया है, ”अंतिम समझौता सभी मोर्चों पर (जिसमें लेबनान भी शामिल है) युद्ध की स्थायी समाप्ति और इस अनुच्छेद के अन्य प्रावधानों की पुष्टि करेगा।”
2.आंतरिक मामलों का सम्मान
संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक गणराज्य ईरान, एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने से परहेज करेंगे।
3. 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते के लिए बातचीत पूरी करना
दोनों देशों ने 60 दिनों की समय-सीमा के भीतर अंतिम समझौते पर पहुंचने की प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, इस अवधि को केवल दोनों पक्षों की आपसी सहमति से ही बढ़ाया जा सकेगा।
4. अमेरिकी नाकेबंदी खत्म होगी
समझौते के तहत अमेरिका, ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और अन्य सभी तरह की बाधाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। यह नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिनों के भीतर पूरी तरह समाप्त कर दी जाएगी।
इस अवधि के दौरान खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्गों पर जहाजों की आवाजाही, ईरान द्वारा युद्ध से पहले के स्तर की बहाल की जा रही आवाजाही के अनुपात में होगी। यानी ईरान जितनी तेजी से समुद्री यातायात को सामान्य करेगा, अमेरिका भी उसी अनुपात में प्रतिबंधों में ढील देगा।
इसके अलावा, अमेरिका ने इस्लामिक गणराज्य ईरान के नजदीक तैनात अपनी सैन्य मौजूदगी और बलों को भी 30 दिनों के भीतर हटा लेने की प्रतिबद्धता जताई है।
5. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)
समझौते के तहत ईरान अपनी पूरी क्षमता और हरसंभव प्रयास करेगा ताकि होर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही सुरक्षित तरीके से हो सके। इसके लिए जहाजों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
6. 300 अरब डॉलर से होगा ईरान का पुनर्निर्माण
समझौते के तहत अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी देशों ने ईरान के ‘पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास’ के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर (करीब 25 लाख करोड़ रुपये) का कोष बनाने पर सहमति जताई है।
दस्तावेज़ के मुताबिक, इस योजना को लागू करने का विस्तृत खाका अगले 60 दिनों के भीतर तैयार किया जाएगा। समझौते के टेक्स्ट में कहा गया है, “संबंधित वित्तीय लेनदेन के लिए आवश्यक सभी लाइसेंस, छूट (Waivers) और अनुमतियां संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा दी जाएंगी।”
7. ईरान पर लगे प्रतिबंध हटेंगे
अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान पर लगाए गए सभी प्रकार के प्रतिबंधों को हटाएगा। इनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव यानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्ताव और अमेरिका के सभी एकतरफा प्रतिबंध शामिल होंगे। इन प्रतिबंधों को हटाने की समय-सारिणी अंतिम समझौते के तहत तय की जाएगी।
8. ईरान का ‘परमाणु हथियार नहीं’ का वादा
इस्लामिक गणराज्य ईरान ने वादा किया है कि वह परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा और ना ही उनका विकास करेगा। अमेरिका और ईरान ने आईएईए की निगरानी में संवर्धित यूरेनियम के मौजूदा भंडार के निपटारे के लिए आपसी सहमति से एक व्यवस्था तय करने पर सहमति जताई है।
दोनों देश अंतिम समझौते में यूरेनियम संवर्धन और ईरान की परमाणु जरूरतों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। अंतिम समझौता इस बिंदु के प्रावधानों की पुष्टि करेगा।
9. दोनों देश यथास्थिति बनाए रखेंगे
उपरोक्त दोनों बिंदुओं के महत्व को स्वीकार करते हुए अंतिम समझौते तक अमेरिका और ईरान मौजूदा स्थिति (स्टेटस क्वो) बनाए रखेंगे। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मौजूदा ढांचे को बरकरार रखेगा जबकि अमेरिका कोई नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा और ईरान के आसपास अतिरिक्त सैन्य बल तैनात नहीं करेगा।
10. ईरानी निर्यात पर छूट
प्रतिबंध पूरी तरह समाप्त होने तक अमेरिकी वित्त मंत्रालय ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उनसे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर छूट देगा। इसमें परिवहन, बीमा, बैंकिंग लेनदेन और अन्य संबंधित सेवाएं भी शामिल होंगी।
11. ईरान की जमी हुई संपत्तियां जारी होंगी
अमेरिका इस मेमोरेंडम के लागू होते ही ईरान की फ्रीज या प्रतिबंधित धनराशि और संपत्तियों को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराएगा। बातचीत के दौरान दोनों देश आपसी सहमति से तय करेंगे कि इन फंड्स को किस तरह जारी किया जाएगा। इसके लिए अमेरिका सभी आवश्यक लाइसेंस और मंजूरियां जारी करेगा।
12. ईरान पर लगे प्रतिबंध हटेंगे
अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान पर लगाए गए सभी प्रकार के प्रतिबंधों को हटाएगा। इनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव यानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्ताव और अमेरिका के सभी एकतरफा प्रतिबंध शामिल होंगे। इन प्रतिबंधों को हटाने की समय-सारिणी अंतिम समझौते के तहत तय की जाएगी।
13. ईरान का ‘परमाणु हथियार नहीं’ का वादा
इस्लामिक गणराज्य ईरान ने वादा किया है कि वह परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा और ना ही उनका विकास करेगा। अमेरिका और ईरान ने आईएईए की निगरानी में संवर्धित यूरेनियम के मौजूदा भंडार के निपटारे के लिए आपसी सहमति से एक व्यवस्था तय करने पर सहमति जताई है।
दोनों देश अंतिम समझौते में यूरेनियम संवर्धन और ईरान की परमाणु जरूरतों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। अंतिम समझौता इस बिंदु के प्रावधानों की पुष्टि करेगा।
14. दोनों देश यथास्थिति बनाए रखेंगे
उपरोक्त दोनों बिंदुओं के महत्व को स्वीकार करते हुए अंतिम समझौते तक अमेरिका और ईरान मौजूदा स्थिति (स्टेटस क्वो) बनाए रखेंगे। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मौजूदा ढांचे को बरकरार रखेगा जबकि अमेरिका कोई नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा और ईरान के आसपास अतिरिक्त सैन्य बल तैनात नहीं करेगा।
ईरान जंग का हिसाब-किताब: ट्रंप ने क्या खोया, क्या पाया….
अमेरिका के नेतृत्व वाले अभियान की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को काफी कमजोर कर दिया गया। रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान के लगभग एक-तिहाई मिसाइल भंडार को नष्ट कर दिया गया जबकि उसकी मिसाइल बनाने की क्षमता को कई साल पीछे धकेल दिया गया है।
