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2008 के बाद दलाई लामा से मिलने भारत आईं अमेरिकी डेमोक्रेटिक लीडर पेलोसी लंबे

अमेरिकी संसद (कांग्रेस) का एक प्रतिनिधिमंडल दो दिवसीय भारत दौरे पर मंगलवार को यहां पहुंचा।

Author May 9, 2017 6:25 PM
प्रतिनिधि सभा की पूर्व अध्यक्ष पेलोसी लंबे से मिलीं तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा।(Reuters)

अमेरिकी संसद (कांग्रेस) का एक प्रतिनिधिमंडल दो दिवसीय भारत दौरे पर मंगलवार को यहां पहुंचा। दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल में शामिल आठों सदस्य तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा से मुलाकात करेंगे। प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के शीर्ष नेता नैंसी पेलोसी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल में जिम सेनसेनब्रेनर, इलियॉट एंजेल, जिम मैकगॉवर्न, बेट्टी मैक्कुलम, जूडी चू, जॉइस बिटी तथा प्रमिला जयपाल शामिल हैं।

प्रतिनिधि सभा की पूर्व अध्यक्ष पेलोसी लंबे समय से तिब्बत की समर्थक रही हैं और अंतिम बार साल 2008 में धर्मशाला आई थीं। सांसद जयपाल प्रतिनिधि सभा के लिए निर्वाचित होने वाली भारतीय मूल की पहली अमेरिकी महिला हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगवानी यहां केंद्रीय तिब्बत प्रशासन (सीटीए) के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के सचिव सोनम दागपो तथा सूचना सचिव धारदोन शियरलिंग ने की।

प्रतिनिधिमंडल सीटीए के अध्यक्ष तथा निर्वासित प्रधानमंत्री लोबसांग सांगय से भी मुलाकात करेगा। तिब्बत की निर्वासित सरकार को किसी भी देश ने मान्यता नहीं दी है। एक दिन पहले प्रतिनिधिमंडल ने काठमांडू में एक तिब्बती बस्ती का दौरा किया था। सन् 1959 में चीन से भागने के बाद से ही दलाईलामा भारत में रह रहे हैं।

आपको बता दें कि दलाईलामा चीन की नाराजगी को नजरअंदाज कर शुक्रवार (7 अप्रैल) को तवांग मठ पहुंच गए। मठ में बौद्ध भिक्षुओं तथा कई श्रद्धालुओं ने उनका बेहद गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित दलाई लामा तवांग मठ में ठहरेंगे। यह मठ भारत का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध मठ है। दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध मठ तिब्बत का पोटला पैलेस है। बर्फ से घिरे पहाड़ों तथा 10,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित तवांग में मोनपा लोग रहते हैं, जो तिब्बती बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं।

प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू तिब्बती धर्मगुरु के साथ हैं। दलाई लामा सन् 1959 से ही भारत में निर्वासित जीवन जी रहे हैं। दलाई लामा के दौरे के मद्देनजर पूरे तवांग को भारत तथा तिब्बत के झंडों तथा फूलों के अलावा, रंगीन प्रार्थना झंडों से सजाया गया। सड़कों को रंगा गया और नालों की सफाई की गई।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, “सैकड़ों की तादाद में लोग पारंपरिक औपचारिक स्कार्फ लिए हुए सड़क पर अगरबत्तियां जला कर दलाई लामा के दर्शन तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कतार में खड़े थे।”

दलाई लामा की एक झलक पाने के लिए लद्दाख तथा पड़ोसी देश भूटान से हजारों की तादाद में लोग तवांग पहुंच चुके हैं। मठ के सचिव लोबसांग खुम ने कहा, “हम दलाई लामा की यात्रा की तैयारी पिछले दो महीने से कर रहे हैं। हर कोई उनकी एक झलक पाना, उनसे बातें करना और उनका आशीर्वाद लेना चाहता है। दलाई लामा हमारे श्रद्धेय धर्मगुरु हैं।”

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