पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने मई 2025 में भारत के साथ सैन्य संघर्ष को लेकर बयान दिया कि भारत ने अमेरिका से सीजफायर के लिए संपर्क साधा था। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तानी सेना के फील्ड मार्शल ने ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष बाद दावा किया। इधर अमेरिका ने इस खुलासे को लेकर तरह-तरह की बातें की जिसमें अपने आप में विरोधाभास है।
पाकिस्तानी न्यूज डॉन ने कहा कि भारत ने अमेरिका के माध्यम से मध्यस्थता की इच्छा जाहिर की, जिसे पाकिस्तान ने क्षेत्रीय शांति के हित में स्वीकार कर लिया। स्वघोषित फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने रविवार को रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना के जनरल मुख्यालय में आयोजित एक समारोह में कहा कि भारत ने अमेरिकी नेतृत्व से सीजफायर के लिए संपर्क किया था।
अमेरिकी दस्तावेजों से चला पता
हालांकि न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, अमेरिका विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम के तहत दर्ज किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि अकेले 6 मई से 9 मई तक पाकिस्तान ने अमेरिका सांसदों, कांग्रेसी सहायकों, रक्षा से जुड़े कर्मियों,वित्त अधिकारियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और पत्रकारों से जुड़ी लगभग 60 बातचीत दर्ज कीं।
रिकॉर्ड से पता चलता है कि जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया तो पाकिस्तान और पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी अड्डों पर हमले किए तब पाकिस्तान ने अमेरिका में प्रभावशाली राजनेताओं से संपर्क किया।
भारत ने 9 आतंकी अड्डों पर किया था हमला
ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के बाद भारत ने साफ किया कि यह अभियान तीनों सेनाओं की साझा कार्रवाई थी, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान और पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर में आतंकी अड्डे को नष्ट करना था। भारत ने 6 और 7 मई की मध्य रात्रि को हमला शुरू किया था। रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा था कि भारतीय सेनाओं ने आतंकी गतिविधियों से जुड़े नौ ठिकानों पर सटीक हमले किए।
बयान में इस बात पर भी जोर दिया गया कि किसी भी पाकिस्तानी सैन्य ढांचे को निशाना नहीं बनाया गया है और इस कार्रवाई को लक्षित, संयमित और गैर-आघातकारी बताया।
पहले ही दिन 30 लोगों से संपर्क
वाशिंगटन डीसी में भारत की ओर 6 मई 2025 को हमले शुरू करने के बाद पाकिस्तान ने करीब 30 अलग-अलग संपर्क स्थापित किए जिनमें से अधिकांश में पाकिस्तानी राजदूत के लिए कांग्रेस और सीनेट कार्यालयों के साथ मीटिंग आयोजित करने का अनुरोध किया गया था। इन सभी दस्तावेजों में बार-बार राजदूत के साथ बैठक का अनुरोध का जिक्र है।
दस्तावेजों से पता चला कि 7 से 8 मई तक पाकिस्तान का अब क्षेत्र में तनाव पर केंद्रित था। 7 मई को अध्यक्ष ब्रायन मास्ट की क्षेत्र में तनाव से संबंधित एक कॉल दर्ज है। ब्रायन मास्ट प्रभावशाली हाउस विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हैं, जिससे तनाव बढ़ने की अवधि के दौरान यह संपर्क राजनीतिक रूप से अहम हो जाता है।
7 मई को दर्ज एक अन्य दस्तावेज में प्रतिनिधि हकीम जेफरीज की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विंडी पार्कर के साथ हुई बातचीत का जिक्र है, जिसमें अल्पसंख्यक नेता हकीम जेफरीज से मुलाकात तय करने की बात की गई थी। अल्पसंख्यक नेता हकीम जेफरीज अमेरिकी प्रतिनिधि सभी में विपक्षी दल के सर्वोच्च नेता हैं।
8 मई को 20 से 25 संपर्क
8 मई को दस्तावेज में बताया गया कि सीनेट के बहुमत नेता जॉन थून के कार्यालय से रयान काल्डाहल को क्षेत्र में तनाव के बारे में राजदूत से चर्चा के लिए एक मीटिंग का अनुरोध किया गया था। दस्तावेजों से पता चलता है कि 9 मई को गतिविधि का सबसे आक्रामक चरण देखा गया, जिसमें रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े करीब 20 से 25 संपर्क किए गए।
9 मई को प्राप्त कई मैसेजों पर रक्षा अटैची से मुलाकात का अनुरोध लिखा हुआ था। वाशिंगटन डीसी स्थित पाकिस्तानी दूतावास की वेबसाइट के मुताबिक, पाकिस्तान के वर्तमान रक्षा अटैची ब्रिगेडियर इरफान अली है।
इन संपर्कों में सीनेट सशस्त्र सेवा समिति से जुड़े कर्मी और अमेरिकी रक्षा एवं सुरक्षा मामलों के प्रभावशाली शख्स शामिल थे, जिसमें माइक रोजर्स सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल, सीनेटर रोजर विकर और सीनेटर टॉम कॉटन नाम शामिल थे।
इन दस्तावेजों से सीनेट सशस्त्र सेवा समिति से जुड़े कर्मचारियों, रक्षा विशेषज्ञ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों, जिमें कैरोलिन चुटा, रिक हीली, रॉबर्ट केली और कोल्बी कुहंस के नाम शामिल हैं।
एक समाचार पत्र के पत्रकार से भी संपर्क किया
9 मई के कई दस्तावेजों में सीनेट अल्पसंख्यक नेता चक शूमेर और वरिष्ठ कांग्रेसी कार्यालयों से जुड़े कर्मचारियों की बातचीत भी शामिल थी।
दस्तावेजों से पता चला कि इस अवधि के दौरान एक अमेरिका समाचार पत्र के पत्रकार से भी बात की गई थी। इन खुलासों से इस बात की पुष्टि होती है कि जिसे सीएनएन न्यूज ने भी पहले रिपोर्ट किया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच कई दिनों से सीजफायर पर बातचीत चल रही है।
हालांकि अंत में पाकिस्तान सेना के डीजीएमओ की ओर से भारतीय सेना के डीजीएमओ को भेजे गए हॉटलाइन मैसेज में सीजफायर की बात कही गई, जिस भारत ने मान लिया। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि अमेरिका से बात करने में पाकिस्तान और भारत की गतिविधियों में अंतर था।
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पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के दूसरे दौर को लेकर सस्पेंस लगातार बरकरार है। ट्रंप की टीम उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की लीडरशिप में बातचीत के इस्लामाबाद जाने वाला है लेकिन ईरान अभी राजी नहीं है। इस बीच पाकिस्तानी सेना के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन मिलाया और होर्मुज जलमार्ग को लेकर एक खास गुजारिश की है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
