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अमेरिका ने चीन की 28 संस्थाओं को किया ब्लैक लिस्ट, तेज हुई व्यापारिक जंग

द वॉल स्ट्रीट जनरल में छपी एक खबर के मुताबिक ब्लैक लिस्ट में जिन संस्थानों को शामिल किया गया है उनमें हिकविजन के अलावा मेगवी टेक्नोलॉजी, सेंस टाइम ग्रुप लिमिटेड शामिल हैं।

Author नई दिल्ली | Updated: October 8, 2019 1:08 PM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने चीन के अशांत शिनजियांग क्षेत्र में उइगर मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने तथा उनके साथ दुर्व्यवहार करने के मामले में चीन की 28 संस्थाओं को सोमवार को ब्लैक लिस्ट में डाला दिया। अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रोस ने इस फैसले की घोषणा की। इससे ये संस्थाएं अब अमेरिकी सामान नहीं खरीद पाएंगी। माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक जंग और तेज होने जा रही है। रॉस ने कहा कि अमेरिका ‘चीन के भीतर जातीय अल्पसंख्यकों के क्रूर दमन को बर्दाश्त नहीं करता है और ना ही करेगा।’ अमेरिकी फेडरल रजिस्टर में अद्यतन की गई जानकारी के अनुसार काली सूची में डाली कई संस्थाओं में वीडियो निगरानी कम्पनी ‘हिकविजन’, कृत्रिम मेधा कम्पनियां ‘मेग्वी टेक्नोलॉजी’ और ‘सेंस टाइम’ शामिल हैं।

एशियन इकॉनोमिक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के वरिष्ठ सलाहकार मैथ्यू गुडमैन ने कहा, ‘मुझे लगता है कि इस सप्ताह यह चर्चाओं को जटिल बनाने वाला है। समय चीनियों के लिए चिंताजनक होने वाला है। द वॉल स्ट्रीट जनरल में छपी एक खबर के मुताबिक ब्लैक लिस्ट में जिन संस्थानों को शामिल किया गया है उनमें हिकविजन के अलावा मेगवी टेक्नोलॉजी, सेंस टाइम ग्रुप लिमिटेड शामिल हैं।

जानकारी के मुताबिक अमेरिका चीनी कंपनी डाहुआ टेक्नोलॉजी कंपनी, IFLYTEK, जियामी मिया पिको सूचना कंपनी, यितु टेक्नोलॉजीज एंड यिक्सिन साइंस एंड टेक्नोलॉजी कंपनी, कॉमर्स डिपार्टमेंट के साथ-साथ झिंजियांग पब्लिक सिक्योरिटी ब्यूरो और 19 मातहत संस्थाओं इस सूची में शामिल करेगा। एक दस्तावेज में कहा गया कि नई नीतियों को इस सप्ताह के आखिर तक प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।

इसी बीच हिकविजन के प्रवक्ता ने अमेरिका के इस फैसले का विरोध करते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज करवाई है। संस्था ने अपने बयान में कहा कि वो मानवाधिकारों का सम्मान करती है और अमेरिका में अपने लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेती है। संस्था का कहना है कि अमेरिका का फैसला दुनिया के लिए चिंताजनक है। हालांकि ब्लैक लिस्ट में शामिल की गई अन्य कंपनियों की मामले में प्रतिक्रिया नहीं ली जा सकी है।

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