अमेरिका की एक पनडुब्बी ने इस सप्ताह श्रीलंका से करीब 40 नॉटिकल मील दूर ईरान के युद्धपोत ‘IRIS Dena’ को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया। इसके बाद ईरान ने इजरायल और अमेरिका के कई अड्डों पर नये सिरे से हमले किए और धमकी दी कि हिंद महासागर में ईरान के एक युद्धपोत को टॉरपीडो के हमले से डुबोने के लिए अमेरिका को बहुत पछताना पड़ेगा। यह घटना समुद्री युद्ध से जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी ध्यान खींचती है।

फारस की खाड़ी से इतनी दूर और चीन को पश्चिम एशिया से जोड़ने वाले अहम समुद्री व्यापार मार्ग के पास इस तरह का हमला यह संकेत देता है कि ईरान से जुड़ा यह संघर्ष व्यापक क्षेत्र में फैल सकता है। लोगों के मन में यह सवाल भी उठा कि क्या यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध था? साथ ही जहाज डूबने के बाद बचे लोगों को बचाने की जिम्मेदारी किसकी होती है?

क्या है समुद्री युद्ध का कानून?

समुद्री युद्ध का कानून, सशस्त्र संघर्ष के कानून का एक हिस्सा है जो समुद्र में होने वाले युद्ध में शामिल लड़ाकों, नागरिकों और तटस्थ देशों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े नियम तय करता है। यह कानून इस बात से ही स्वतंत्र रूप से लागू होता है कि युद्ध शुरू करने का फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध था या नहीं। भले ही युद्ध की शुरुआत पर विवाद हो लेकिन युद्ध के दौरान समुद्र में होने वाली सैन्य कार्रवाइयों को इन नियमों का पालन करना होता है। समुद्र में सैन्य अभियानों का संचालन समुद्री युद्ध के कानून द्वारा नियंत्रित होता है चाहे युद्ध की औपचारिक घोषणा की गई हो या नहीं। जहां समुद्री युद्ध के कानून और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOAS) के बीच टकराव होता है, वहां समुद्री युद्ध का कानून प्राथमिकता रखता है।

यह अंतरराष्ट्रीय कानून के उस सिद्धांत को दर्शाता है जिसे ‘लेक्स स्पेशलिस’ कहा जाता है। कानून के अनुसार किसी भी ऐसे देश के युद्धपोत जो अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्ष में शामिल हों, स्वाभाविक रूप से सैन्य लक्ष्य माने जाते हैं इसलिए उन पर हमला करना वैध होता है। ऐसे हमले खुले समुद्र में या संघर्ष में शामिल देशों के 12 नॉटिकल मील के क्षेत्रीय जल के भीतर किए जा सकते हैं। हालांकि, तटस्थ देशों के क्षेत्रीय जल के भीतर हमला करना वैध नहीं माना जाता।

‘IRIS Dena’ श्रीलंका के क्षेत्रीय जल से बाहर संचालित हो रहा था

खबरों के अनुसार ‘IRIS Dena’ श्रीलंका के क्षेत्रीय जल से बाहर संचालित हो रहा था। ऐसे में वह समुद्री युद्ध के कानून के तहत एक वैध सैन्य लक्ष्य माना जाता है। वह अगर श्रीलंका के तट से 12 नॉटिकल मील के भीतर होता तो हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध माना जाता। समुद्री युद्ध का कानून जहाज डूबने के बाद बचे लोगों को बचाने की जिम्मेदारी भी तय करता है।

जहाज डूबने के बाद बचे लोगों को बचाने की जिम्मेदारी किसकी?

1949 के दूसरे जिनेवा कन्वेन्शन के अनुसार, संघर्ष में शामिल पक्षों को हर सैन्य मुठभेड़ के बाद जहाज डूबने से प्रभावित लोगों, घायलों और बीमारों की तलाश करने और उन्हें बचाने के लिए हर संभव कदम उठाने होते हैं। हालांकि पनडुब्बियों के लिए यह दायित्व निभाना व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकता है। सतह पर आकर बचाव करने से उन्हें खतरा हो सकता है और पनडुब्बियों में लोगों को रखने की क्षमता भी सीमित होती है। ऐसी स्थिति में पनडुब्बी सीधे बचाव करने के बजाय अन्य जहाजों या अधिकारियों को बचे लोगों की जानकारी दे सकती है।

श्रीलंका की नौसेना ने IRIS Dena के 32 नाविकों को बचाया और अधिकारियों के अनुसार 87 शव भी बरामद किए गए। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि श्रीलंकाई अधिकारियों को घटना की सूचना कैसे मिली लेकिन संभावना है कि अमेरिकी नौसेना ने ही बचे लोगों के स्थान की जानकारी दी हो। विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका की भूमिका की कानूनी वैधता पर बहस जारी हो लेकिन समुद्र में हुई यह सैन्य कार्रवाई समुद्री युद्ध के कानून के तहत एक वैध सैन्य लक्ष्य पर हमला मानी जा सकती है।

ईरान ने यूएई और जॉर्डन में अमेरिकी रडार सिस्टम पर किए हमले

यूएई और जॉर्डन में स्थित कई अमेरिकी सैन्य रडारों को ईरानी मिसाइलों और ड्रोन द्वारा सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया है। यह जानकारी सैटेलाइट इमेज से सामने आयी। सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन में स्थित कई अमेरिकी सैन्य रडारों को ईरानी मिसाइलों और ड्रोन द्वारा सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें

(भाषा के इनपुट के साथ)