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अमेरिकी सेना ने दी सैनिकों के लिए पगड़ी, दाढ़ी और हिजाब को मंजूरी

इस मंजूरी के बाद हुआ बदलाव यह सुनिश्चित करेगा कि धार्मिक पहचान का समावेश स्थायी हो।

Author वॉशिंगटन | January 5, 2017 3:28 PM
US Army news, US Army Latest News, US Army turbans, US Army in hijab, US Army in beardsअमेरिक सैनिक (एपी फाइल फोटो)

अमेरिकी सेना ने सिखों समेत सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों को सेना में स्वतंत्र तरीके से अपनी सेवाएं दे सकने का अधिकार देते हुए धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े नए नियम जारी किए हैं। इस नियमन के जरिए सेना ने पगड़ी, हिजाब पहनने वाले या दाढ़ी रखने वाले लोगों को सेना में भर्ती होने की मंजूरी दे दी है। सैन्य सचिव एरिक फैनिंग की ओर से जारी किए गए ये नए नियम ब्रिगेड स्तर पर धार्मिक पहचानों को समाहित करने की मंजूरी देते हैं। इससे पहले यह मंजूरी सचिव स्तर तक के लिए थी। इस मंजूरी के बाद हुआ बदलाव यह सुनिश्चित करेगा कि धार्मिक पहचान का समावेश स्थायी हो और अमेरिकी सेना में अधिकतर पदों पर लागू हो।

नए नियमन मूल रूप से उन सिख सैनिकों की याचिका एवं पैरोकारी पर आए हैं, जो धार्मिक कारणों के चलते दाढ़ी रखते हैं और पगड़ी बांधते हैं तथा सक्रिय सेवा के दौरान भी इन्हें रखना चाहते हैं। ये नियम कहते हैं कि दुर्लभ परिस्थितियों के अलावा, सिख धर्म के अनुयायियों को देश की सेवा के दौरान उनकी धार्मिक पगड़ियों, बढ़ाए हुए केशों या दाढ़ी को त्यागने के लिए विवश नहीं किया जाएगा। कांग्रेस सदस्य जो क्राउले ने अमेरिकी सैन्य सचिव की ओर से जारी निर्देश का स्वागत करते हुए कहा, ‘यह न सिर्फ सिख अमेरिकी समुदाय के लिए, बल्कि हमारे देश की सेना के लिए एक बड़ी प्रगति है। सिख-अमेरिकी इस देश से प्यार करते हैं और हमारे देश में सेवा का उचित अवसर चाहते हैं। आज की घोषणा ऐसा करने में मददगार साबित होगी।’

क्राउले ने कहा, ‘हम एक मजबूत सेना से लैस मजबूत देश हैं क्योंकि हम धार्मिक एवं निजी स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं।’ सिख-अमेरिकियों और अमेरिकी सांसदों ने इस कदम का स्वागत किया है। ये लोग पिछले कई साल से इस संदर्भ में चल रहे राष्ट्रीय अभियान के अगुवा रहे हैं। अमेरिकी सेना की ओर से तीन जनवरी को घोषित इन बदलावों से पहले सिख अमेरिकियों और अन्य को अपने धर्म से जुड़ी चीजों को अपने साथ रखते हुए सेना में सेवा देने की अनुमति सीमित थी। ये समावेश स्थायी नहीं थे और हर नियत कार्य के बाद इसकी एक तरह से समीक्षा की जाती थी। सेवाकर्मियों को तब तक के लिए भी अपने धर्म से संबंधित पहचानें हटानी पड़ती थीं, जब तक उनका इन पहचानों के साथ काम करने का अनुरोध स्वीकार नहीं होता था।

ऐसे एक अभियान के अगुवा रहे सिख-अमेरिकन कोएलिशन ने इस कदम का स्वागत किया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह उनकी ओर से की जा रही मांग की तुलना में कम है। इस संगठन की विधि निदेशक हरसिमरन कौर ने कहा, ‘हम अब भी नीति में एक स्थायी बदलाव चाहते हैं, जो सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों को स्वतंत्र तरीके से सेवा देने की अनुमति दे। हम इस नई नीति के जरिए हमारे देश के सबसे बड़े नियोक्ता की ओर से धार्मिक सहिष्णुता एवं विविधता की दिशा में दिखाई गई इस प्रगति से खुश हैं।’ कई सिख सैनिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली विधि कंपनी बेकेट लॉ के वरिष्ठ अधिवक्ता एरिक बेक्स्टर ने कहा, ‘सिख सैनिकों से लैस सेना कहीं अधिक मजबूत होती है।’’

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