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भारत को अमेरिका से मिलेंगे अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर, मिसाइल

अमेरिका ने भारत को 93 करोड़ डॉलर में छह एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर बेचने के सौदे को मंजूरी दे दी है।

Author वाशिंगटन | Published on: June 13, 2018 4:03 PM
अमेरिका ने भारत को 93 करोड़ डॉलर में छह एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर बेचने के सौदे को मंजूरी दे दी है। (Photo-PTI)

अमेरिका ने भारत को 93 करोड़ डॉलर में छह एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर बेचने के सौदे को मंजूरी दे दी है। अटैक हेलीकॉप्टर के अतिरिक्त इस अनुबंध में अग्नि नियंत्रण रडार ‘हेलफायर लॉन्गबो मिसाइल’, स्टिंगर ब्लॉक क-92ऌ मिसाइल, रात में नजर रखने में सक्षम नाइट विजन सेंसर एवं जड़त्वीय नौवहन प्रणाली (इर्निशयल नेविगेशन सिस्टम्स) की बिक्री भी शामिल है। पेंटागन की डिफेंस सिक्योरिटी कोआॅपरेशन एजेंसी ने इस संबंध में विदेश मंत्रालय के फैसले को लेकर कांग्रेस को अधिसूचित किया।

अगर कोई सांसद इसका विरोध नहीं करता है तो बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। पेंटागन ने कांग्रेस को अधिसूचना अगले महीने वाशिंगटन डीसी में भारत और अमेरिका के बीच होने वाली पहली 2+2 वार्ता से पहले दी है। अगले महीने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज एवं रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और उनके अमेरिकी समकक्षों क्रमश : माइक पोम्पिओ एवं जेम्स मैटिस के बीच बैठक होगी। अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने आज कहा कि इससे अंदरूनी एवं क्षेत्रीय खतरों से मुकाबले की भारत की क्षमता को मजबूती मिलेगी।
अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर बहुभूमिका वाले हेलीकॉप्टर हैं और अमेरिकी सेना एवं कई दूसरे देशों के रक्षा बल इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। हेलीकॉप्टर अपने आगे लगे सेंसर की मदद से रात में उड़ान भर सकता है।

कांग्रेस को भेजी गयी अपनी अधिसूचना में पेंटागन ने कहा, ‘‘इससे अंदरूनी एवं क्षेत्रीय खतरों से मुकाबले की भारत की क्षमता को मजबूती मिलेगी।’’ पेंटागन ने कहा, ‘‘एएच-64ई के सहयोग से जमीनी बख्तरबंद खतरों से मुकाबले की भारत की रक्षा क्षमता बढ़ेगी और इसका सैन्य बल आधुनिक होगा।’’ इसके अनुसार, ‘‘उपकरणों की प्रस्तावित बिक्री एवं सहयोग से क्षेत्र में मूलभूत सैन्य संतुलन नहीं बिगड़ेगा।’’ भारत एवं अमेरिका के बीच द्विपक्षीय रक्षा कारोबार वर्ष 2008 से करीब शून्य से 15 अरब डॉलर तक बढ़ा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया, ‘‘अगले दशक तक सैन्य आधुनिकीकरण पर भारत के अरबों डालर खर्च करने की संभावना है और हम अमेरिकी उद्योग जगत के लिये यह मौका हासिल करने को इच्छुक हैं।

ऐसी बिक्रियों से ना सिर्फ हमारे रक्षा सहयोग को समर्थन मिलेगा बल्कि इनसे देश के अंदर नौकरियां भी पैदा होंगी।’’ हाल के वर्षों में अमेरिका ने सरकारी स्तर पर भारत को सी-17 परिवहन विमान, 155 मिमी लाइट-वेट टोड होवित्जर, यूजीएम-84एल हारपून मिसाइल, सपोर्ट फॉर सी-130जे सुपर हरक्युलिस विमान और रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल एवं परमाणु (सीबीआरएन) सहयोग उपकरण बेचे हैं।

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