होर्मुज जलमार्ग के पास अमेरिका का अपाचे हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी है कि इस हादसे में दो पायलटों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज जलमार्ग के पास एक अमेरिकी सैन्य हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि, हादसे के तुरंत बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया और दोनों पायलटों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यह घटना ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर है। ईरान और इजरायल के बीच लगातार हमले हो रहे हैं और क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

इसी बीच अमेरिका का एएच-64 अपाचे हेलिकॉप्टर क्रैश होने की खबर सामने आई है। हालांकि, यह हादसा किन कारणों से हुआ, इसकी जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

अपाचे हेलिकॉप्टर की खासियत

जानकारी के लिए बता दें कि बोइंग का एएच-64 अपाचे दुनिया के सबसे आधुनिक और घातक लड़ाकू हेलिकॉप्टरों में गिना जाता है। इसे अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग बनाती है। अपाचे को “फ्लाइंग टैंक” के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह दुश्मन के इलाके में घुसकर भारी तबाही मचाने की क्षमता रखता है।

सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिर्फ एक हेलिकॉप्टर नहीं बल्कि हथियारों और अत्याधुनिक रडार सिस्टम से लैस एक उड़ता हुआ किला है। भारत ने भी हाल के वर्षों में अपाचे हेलिकॉप्टरों की खरीद के लिए बड़ा सौदा किया है। भारत सरकार ने करीब 4,168 करोड़ रुपये की लागत से छह नए अपाचे हेलिकॉप्टर खरीदने का फैसला किया है।

अपाचे हेलिकॉप्टर को दुनिया की सबसे खतरनाक कॉम्बैट मशीनों में से एक माना जाता है। इसके निचले हिस्से में 30 मिमी की ऑटोमैटिक चेन गन लगी होती है जो एक मिनट में लगभग 600 से 650 राउंड तक फायर कर सकती है। यही वजह है कि युद्धक्षेत्र में इसे बेहद प्रभावी और घातक हथियार माना जाता है।

क्या है होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक पतला समुद्री मार्ग है। यहां से दुनिया की कुल तेल सप्लाई का 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है। 28 फरवरी, जब से ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू हुआ, तब से ही इस पर असर पड़ा और केवल कुछ ही जहाजों के लिए इसे खोला गया था। इसके कारण दुनिया भर में तेल सप्लाई बाधित हुई थी। खाड़ी देश तेल को एक्सपोर्ट करने के लिए इसी जलमार्ग का उपयोग करते हैं। भारत के तेल इंपोर्ट का 40 फ़ीसदी हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर आता है।

कब शुरू हुई थी ईरान जंग?

जानकारी के लिए बता दें कि इस साल 28 फरवरी को ईरान पर बड़े स्तर पर हमला किया गया था। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई थी। साथ ही उनकी बेटी और दामाद समेत कई अन्य लोगों के मारे जाने की भी सूचना थी। इसके बाद से अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर लगातार बमबारी की गई। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भी खाड़ी देशों को निशाने पर लिया।

पश्चिम-एशिया तनाव का भारत पर असर

खाड़ी और मध्य पूर्व क्षेत्र में भारत के लगभग नौ मिलियन (90 लाख) प्रवासी फैले हुए हैं। पिछले तीन दशकों में, जब इन देशों में भारतीय समुदाय की आबादी में वृद्धि हुई है, तब से उनकी सुरक्षा और कल्याण भारत की प्रवासी कूटनीति का आधार रहा है।

एक तरह से देखा जाए तो केरल, उत्तर प्रदेश, बंगाल, बिहार और ओडिशा के कई परिवारों में ये ही एकमात्र कमाने वाले हैं और ये श्रमिक ही भारत को सबसे अधिक धन भेजने वाले हैं। अनुमानों के अनुसार, भारत को भेजे जाने वाले धन का एक तिहाई से अधिक हिस्सा मध्य पूर्व और खाड़ी देशों से आता है। यह संख्या भारत को भेजे जाने वाले धन का लगभग 38 प्रतिशत है।

दूसरा रणनीतिक प्रभाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लगने वाला झटका है, जो लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष का शिकार हो सकती है, क्योंकि भारत के ऊर्जा आयात का लगभग 60 प्रतिशत इसी क्षेत्र से आता है, जिसमें लगभग 50 प्रतिशत तेल आयात और 70 प्रतिशत एलएनजी आयात शामिल है।

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