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अस्‍पताल में बच्‍चे का महंगा टेस्‍ट कराने से क‍िया इनकार तो मां-बाप को जेल में डाल द‍िया

दंपति प्रकाश सेत्तु और माला पनीरसेल्वम को फोर्ट लौडरडेल स्थित जेल में भेजा था। वहां पर उनकी जमानत की रकम करीब 1 करोड़ 26 लाख रुपये रखी गई थी। बाद में इस रकम को घटाकर 18 लाख 95 हजार रुपये कर दिया गया। दंपति को जुर्माना भरने के कुछ ही घंटों बाद रिहा कर दिया गया।

भारतीय मूल के अमेरिकी दंपति प्रकाश सेत्‍तू और माला पनीरसेल्‍वम। फोटो- Facebook/@Prakash Settu

अमेरिका में गुरुवार (13 सितंबर) को भारतीय मूल के दंपति की जमानत को मंजूरी मिल गई। उन पर आरोप था कि उन्होंने ​कथित तौर पर अपनी छह महीने की बेटी के साथ बुरा बर्ताव और लापरवाही भरा व्यवहार किया था। उन्हें पिछले शुक्रवार को उस वक्त गिरफ्तार किया गया था जब वह फ्लोरिडा प्रांत के ब्रोवार्ड काउंटी के अस्पताल में बच्ची को लेकर पहुंचे थे। बच्ची के बायीं बांह में सूजन थी। अब बाल संरक्षण सेवा के अधिकारियों ने छह महीने की बच्ची को अपनी देखरेख में ले लिया है। जबकि मां-पिता को अब परवरिश का अधिकार नहीं मिलेगा।

अधिकारियों ने तमिलनाडु मूल के दंपति से बच्ची की परवरिश में लापरवाही और अनदेखी पर सवाल पूछे। पूछताछ के दौरान दंपति ने कथित तौर पर अधिकारियों से सवाल किया कि क्यों बच्ची पर अस्पताल में इतने महंगे टेस्ट किए जा रहे हैं? इसके अलावा उन्होंने बच्ची को डॉक्टर की सलाह के विपरीत अस्पताल से ले जाने की भी कोशिश की थी। इसके बाद अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया ।

अधिकारियों ने दंपति प्रकाश सेत्तु और माला पनीरसेल्वम को फोर्ट लौडरडेल स्थित जेल में भेजा था। वहां पर उनकी जमानत की रकम करीब 1 करोड़ 26 लाख रुपये रखी गई थी। बाद में इस रकम को घटाकर 18 लाख 95 हजार रुपये कर दिया गया। दंपति को जुर्माना भरने के कुछ ही घंटों बाद रिहा कर दिया गया।

बच्ची, हिमिशा और उसके जुड़वां भाइयों को कुछ हफ्ते पहले ही बाल संरक्षण सेवा के अधिकारी अपने साथ ले गए थे। दंपति के पारिवारिक मित्रों ने उन पर लगे आरोपों को पूरी तरह से नकार दिया है। उन्होंने कहा आॅनलाइन चंदा जुटाने की मुहिम भी शुरू की है ताकि दंपति अमेरिकी संस्थाओं के खिलाफ मुकदमा लड़ सकें। माला प​नीरसेल्वम की मां मलिका ने मीडिया से कहा ,” नवजात जुड़वां बच्चों को उनके जैविक माता-पिता से दूर करना पाप है। उन्हें नानी होने के नाते मेरे हवाले किया जाए , मैं उनकी परवरिश करूंगी।

दंपति के करीबी पारिवारिक मित्र ने दावा किया कि उन्होंने अधिकारियों से महंगे मेडिकल टेस्ट की जरूरत के बारे में सवाल किया था क्योंकि ये महंगा टेस्ट बीमा के दावे में नहीं था। इसके अलावा वह अपनी बच्ची के लिए महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते थे। अधिकारियों ने इसे बच्चे के प्रति लापरवाही मान लिया। हालांकि इस मामले के संबंध में भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारी अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में हैं।

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