अमेरिका ने चीन पर सीक्रेट तरीके से न्यूक्लियर हथियार के टेस्ट करने का आरोप लगाया है। यह आरोप ऐसे समय में अमेरिका ने लगाया है, जब रूस और अमेरिका के न्यूक्लियर समझौता खत्म हो गया है, और दोनों देशों ने तत्काल नए हथियार नियंत्रण वार्ता शुरू करने की जरूरत को भी स्वीकार किया है।

हाल ही में अमेरिका के अधिकारियों ने भविष्य के किसी भी परमाणु हथियार समझौते का हिस्से बनने के लिए चीन पर दबाव बनना शुरू कर दिया है।

मार्को रुबियो ने जताई चिंता

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि चीन को शामिल न करने वाला हथियार नियंत्रण ढांचा अमेरिका और सहयोगियों को कम सुरक्षित बना देगा। उन्होंने चीन के तेजी से बढ़ते न्यूक्लियर हथियारों की ओर दुनिया को ध्यान देने की ओर इशारा किया।

जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र समर्थित निरस्त्रीकरण सम्मेलन के मंच पर बोलते हुए अमेरिकी हथियार नियंत्रण अधिकारी थॉमस डिनानो ने कहा कि चीन ने गुप्त न्यूक्लियर टेस्ट किए थे और उन्हें छिपाने की कोशिश भी की थी।

न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, उन्होंने कहा, “अमेरिका की सरकार इस बात को जानती है कि चीन ने न्यूक्लियर टेस्ट किए हैं, जिसमें सैकड़ों टन की निर्धारित क्षमता वाले टेस्ट की तैयारी भी शामिल है।”

थॉमस ने आरोप लगाया कि चीन की सेना ने इस गतिविधि को छिपाने की कोशिश की क्योंकि उन्हें पता है कि ऐसे टेस्ट, सस्पेंड न्यूक्लियर टेस्ट करने की प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करते हैं।

चीन ने दावे को खारिज किया

हालांकि चीन ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, राजदूत शेन जियान ने इन आरोपों को झूठे बयान और निराधार आरोप बताते हुए कहा कि चीन सस्पेंड न्यूक्लियर टेस्ट करने के अपने वादे का पालन करता है और वह करता रहेगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी आलोचना का उद्देश्य परमाणु निरस्त्रीकरण की जिम्मेदारी को टालना और अमेरिका न्यूक्लियर वर्चस्व को सही ठहराना है।

अमेरिका और रूस की संधि खत्म

यह बहस ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका और रूस की न्यू स्ट्रैटजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रिटी (START) 50 साल से अधिक समय बाद एक दिन पहले ही समाप्त हो गई है। इस समझौते के तहत दोनों देशों के लिए तैनात न्यूक्लियर हथियारों की संख्या 1550 तक सीमित थी।

रूसी राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन के मुताबिक, यूएई की राजधानी अबूधाबी में हुई बैठक में रूस और अमेरिका के पक्षकारों ने न्यूक्लियर हथियार कंट्रोल के भविष्य पर चर्चा की और बातचीत को जल्द शुरू करने की जरूरत पर सहमत व्यक्त की।

एपी के मुताबिक, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि दोनों पक्ष जिम्मेदारी से काम करने और जितनी जल्दी हो सके बात शुरू करने के महत्व को समझते हैं।

पुतिन ने रखा था प्रस्ताव

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रस्ताव दिया है अगर अमेरिका भी ऐसा करे तो वे न्यू स्टार्ट समझौते को एक और साल से जारी रख सकते हैं,लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। इसके बजाय अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को शामिल करते हुए एक नए और व्यापक समझौते की वकालत की।

ट्रंप प्रशासन ने कहा कि चीन के बढ़ते न्यूक्लियर भंडार के कारण इसे इस सर्वे में शामिल करना जरूरी है। मार्को रुबियो ने पोस्ट में लिखा कि साल 2020 से चीन के शस्त्रागार में 200 से अधिक परमाणु हथियार थे, जो बढ़कर 600 से अधिक हो गए हैं और अनुमान है 2030 तक यह संख्या 1000 हो सकता है। आगे पढ़िए रूस के मिलिट्री इंटेलिजेंस के डिप्टी चीफ को मारी गई गोली, हमलावर ने की कई राउंड फायरिंग