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उरी हमले में ‘मदद करने वाले’ पाकिस्तानी 10वीं के छात्र हैं, परिजनों का दावा भटककर चले गए थे एलओसी के पार

फैसल और उसके स्कूली दोस्त अहसान खुर्शीद को एनआईए ने 21 सितंबर को गिरफ्तार किया था।

Author Updated: December 8, 2016 11:12 AM
उरी हमले में सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। (फाइल फोटो)

प्रवीण स्वामी/उमर अली

उरी स्थित आर्मी कैंप पर हमले में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए दो पाकिस्तानी 10वीं में पढ़ने वाले स्कूली छात्र हैं जो नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार भटककर आ गए थे। गिरफ्तार पाकिस्तानियों में से एक परिवार और उसके स्कूल के प्रिंसिपल ने ये जानकारी इंडियन एक्सप्रेस को दी। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों पाकिस्तानियों ने “उरी स्थित आर्मी कैंप पर हमला करने वाले जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों को भारत में घुसने में मदद करने की बाद स्वीकार कर ली है।”

फैसल हुसैन अवान पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के कूमी कोटे गांव का रहने वाला है। फैसल और मुजफ्फराबाद के बाला तहसील के रहने वाले उसके स्कूली दोस्त अहसान खुर्शीद को 21 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। उरी आर्मी कैंप पर हमला 18 सितंबर को हुआ था। फैसले और अहसान के गांव उरी के नजदीक एलओसी से एक घंटे की दूरी पर स्थित हैं।

फैसल के भाई और लाहौर स्थित डॉक्टर गुलाम मुस्तफा तबस्सुम ने दावा किया कि दोनों लड़के 17 सितंबर को घर पर थे। भारतीय नेशनल इन्वेस्टिगेश टीम (एनआईए) को मिले जीपीएस उपकरणों के अनुसार उरी हमला करने वाले आतंकवादियों ने 17 सितंबर को एलओसी पार किया था। तबस्सुम कहते हैं, “मैं कोई विवाद या आरोप-प्रत्यारोप नहीं चाहता। इसीलिए मैंने मीडिया से संपर्क नहीं किया। मैं उसका बड़ा भाई हूं और उसकी हिफाजत करना मेरे लिए लाजिम है। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूं। मैं बस इतनी उम्मीद कर सकता हूं कि भारत में कोई प्रभावशाली व्यक्ति ये कहानी पढ़े और लड़कों को घर भेज दे।”

मुजफ्फराबाद के शाहीन मॉडल स्कूल के प्रिंसिपल बशारत हुसैन के अनुसार फैसल विज्ञान का छात्र है और कक्षा नौ में वो प्रथम श्रेणी में पास हुआ था। फैसल की मार्कशीट के अनुसार उसने कक्षा नौ में कुल 525 में 328 अंक हासिल किए थे। बशारत हुसैन मानते हैं कि वो “एक अच्छा, तमीजदार और मिलनसार छात्र है।” हुसैन कहते हैं कि वो हर रोज छह घंटे स्कूल में रहता था और उसका बरताव आदर्श था। हुसैन कहते हैं कि उन्हें नहीं पता था कि दोनों लड़के आपस में दोस्त हैं। वो कहते हैं, “लेकिन ये हैरानी की बात नहीं है क्योंकि दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे।” स्कूल के रिकॉर्ड के अनुसार फैसल और अहसान की उम्र करीब 16 साल है। अगर ये सच है तो भारतीय कानून के अनुसार दोनों नाबालिग हैं और उन्हें कानून के तहत विशेष सुरक्षा प्राप्त होगी, चाहे वो किसी भी देश के नागरिक हों।

भारतीय सेना ने 24 सिंतबर को कहा था कि पकड़े गए दोनों शख्स “पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के रहने वाले हैं और आंतकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम करते हैं।” इंडियन एक्सप्रेस के ई-मेल के जवाब में सेना ने कह कि वो बयान “मौके पर जांच” के आधार पर दिया गया था। हालांकि सेना ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि क्या उन्हें गिरफ्तार किए जाते समय उनकी उम्र पता की गई थी या नहीं। सेना ने इंडियन एक्सप्रेस की खबर का हवाला एनआईए को भी दिया है।

एनआईए के प्रवक्ता ने कहा कि वो “मामले के विश्लेषण की प्रक्रिया में हैं और अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश की जाएगी।” सेना के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों गिरफ्तार पाकिस्तानियों की उम्र उनके बयान के हिसाब से दर्ज की गई है। हालांकि प्रवक्ता ने ये नहीं बताया कि दोनों नाबालिग हैं या बालिग। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दोनों लड़कों के उरी हमले से संबंध होने के अब तक कोई सबूत नहीं मिले हैं। वहीं हमले के लिए अब लश्कर-ए-तैयबा को जिम्मेदार बताया जा रहा है, न कि जैश-ए-मोहम्मद को।

एनआईए के सूत्रों के अनुसार दोनों लड़कों कई बार अपना बयान बदला है। एक लड़के ने अपने बयान में कहा कि उसने खुद हमले में हिस्सा लिया था। उसने बताया कि किस तरह सेना कैंप के अंदर स्थित टेंटों में आग लगाई गई। एनआईए ने तीन अक्टूबर को दावा किया था कि फैसल ने उरी हमले में सेना की जवाबी कार्रवाई में मारे गए चार आतंकवादियों में से एक ही पहचान हाफिज अहमद के रूप में की थी। फैसल के अनुसार हाफिज धारबंग गांव के फिरोज का बेटा था। एनआईए के अनुसार दोनों व्यक्तियों की जांच अभी जारी है। वहीं भारत ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित को सौंपे डोजियर में दोनों को उरी हमले में शामिल बताया है।

फैसल के पिता बढ़ई हैं। अहसान के पिता खानसामा हैं और सऊदी अरब में काम करते हैं। दोनों के परिजनों का कहना है कि दोनों हमले के वक्त अपने घर में थे और बाद में वो किसी तरह भटककर एलओसी पार चले गए होंगे। फैसल के भाई तबस्सुम कहते हैं कि 20 सिंतबर को फैसल स्कूल नहीं गया था। वो सो कर देर से उठा था। उस दिन वो पीट कंथ की दरगाह पर गया था। मुमकिन है कि वो शॉर्ट कट लेने के चक्कर में रास्ता भटक गया हो और एलओसी के पार चला गया हो। दो दिन खोजबीन के बाद फैसल के परिवार वालों ने 22 सितंबर को मुजफ्फराबाद पुलिस थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।  अहसान का घर भी एलओसी से करीब आधे घंटे की दूरी पर है।

जम्मू-कश्मीर के पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार एलओसी पार से भटककर आने की घटनाएं कभी-कभार होती हैं। पिछले पांच सालों में ऐसे करीब एक दर्जन मामले दर्ज किए गए हैं। 20 सितंबर को दोनों लड़कों को पकड़ने वाले उरी के स्थानीय निवासियों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि लड़कों ने पहले किसी भी तरह की कोई गलत हरकत करने से इनकार किया और उन्होंने दावा किया कि वो एलओसी पार से भटककर आ गए हैं।

वीडियोः उरी हमला- पाकिस्‍तान के स्‍कूली बच्‍चे हो सकते हैं पकड़े गए दो 'आतंकी गाइड'

वीडियोः चर्चा: डिजिटल डाटा से पता चला उरी हमला करने वाले आतंकवादी पाकिस्तान से आए थे

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