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Unwarranted: तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी पर विदेश मंत्रालय का UN को करारा जवाब, उठाए थे गिरफ्तारी पर सवाल

बागची ने कहा भारत कानून के उल्लंघन के खिलाफ सख्ती से काम करता है। इस तरह से कानूनी कार्रवाईयों की सक्रियता को उत्पीड़न के रूप में बताना लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा करने जैसा है।

Teesta Setalvad | Arindam Bagchi | UN
तीस्ता सीतलवाड़ः Photo Credit – Express Archives

पिछले दिनों पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी की याचिका पर जब सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह से क्लीन चिट दे दी थी। तब उसके अगले दिन गुजरात एटीएस ने मुंबई से सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलववाड़ को गुरफ्तार कर लिया था और उन्हें अहमदाबाद ले गई। सीतलवाड़ की इस गिरफ्तारी पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने भारत पर टिप्पणी की थी। विदेश मंत्रालय ने यूएन की इस टिप्पणी पर उसे करारा जवाब दिया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बुधवार को यूएन की उस टिप्पणी को पूरी तरह से गलत और अवांछनीय करार देते हुए एक सिरे से खारिज कर दिया है। इसके साथ ही यूएन को जवाब देते हुए कहा, यह टिप्पणी भारत की स्वतंत्र न्यायिक व्यवस्था में हस्तक्षेप करती है। बागची ने आगे कहा भारतीय प्राधिकार ने स्थापित न्यायिक नियमों के तहत कानून के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई की है।

आपकी टिप्पणी भारतीय न्याय व्यवस्था में अवांछनीय
बागची ने आगे कहा, संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार के लिये उच्चायुक्त कार्यालय (OHCR) की ये टिप्पणी जो तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ कार्रवाई को लेकर की गई है इस मामले में पूरी तरह से गलत और अवांछनीय है। उनकी यह टिप्पणी भारतीय स्वतंत्र न्यायिक व्यवस्था में दखल देती हुए दिखाई देती है। इस सप्ताह की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) के कार्यालय ने सामाजिक कार्यकर्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी और हिरासत पर चिंता व्यक्त की थी और उन्हें तत्काल रिहा करने का आह्वान किया था।

यूएन को बागची का करारा जवाब
बागची ने आगे कहा कि भारत न्यायिक प्रक्रियाओं के अनुसार कानून के उल्लंघन के खिलाफ सख्ती से काम करता है। आपका इस तरह से कानूनी कार्रवाईयो की सक्रियता को उत्पीड़न के रूप में बताना लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा करने जैसा है। ऐसी कानूनी कार्रवाई को उत्पीड़न बताना, देश की जनता को गुमराह करने वाला है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने दी गुजरात दंगों पर क्लीन चिट
इसके पहले साल 2002 के गुजरात दंगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ी साजिश को खारिज कर दिया था। फरवरी 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सहित 62 अन्य आरोपियों को अदालत ने एसआईटी द्वारा दी गई क्लीन चिट को बरकरार रखा था। इसके अगले दिन ही गुजरात एटीएस ने सामाजिक कार्यकर्ता सीतलवाड़ को हिरासत में लिया था। इसके अलावा श्रीकुमार और संजीव भट्ट को इसी मामले में गिरफ्तार किया गया था।

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