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घाना: महात्मा गांधी की प्रतिमा हटाने के लिए प्रोफेसरों ने छेड़ी मुहिम

महात्मा गांधी की प्रतिमा हटाने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ घाना के प्रोफेसरों और छात्रों ने विश्वविद्यालय में एक याचिका दाखिल की जिसमें गांधी प्रतिमा को हटाने की मांग की गई है।

यूनिवर्सिटी ऑफ घाना के छात्र और प्रोफेसरों ने गांधी प्रतिमा को हटाने की मांग की

पश्चिमी अफ्रीकी देश घाना की एक यूनीवर्सिटी के प्रोफेसरों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा हटाने के लिए मुहिम छेड़ दी है। गांधी प्रतिमा हटाने के लिए इन प्रोफेसरों ने 12 सितंबर को ऑनलाइन याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में 1,250 लोगों ने मूर्ति हटाने के समर्थन में हस्ताक्षर किए। इस मूर्ति का अनावरण राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जून में अपने घाना के दौरे पर किया था। महात्मा गांधी साल 1893 में दक्षिण अफ्रीका गए थे। वे दो दशकों तक अफ्रीका में रहे और भारतीयों के अधिकारों के लिए लड़ते रहे।

घाना प्रोफेसर्स के मुताबिक यूनिवर्सिटी में उन व्यक्तियों का फोटो लगाना चाहिए जो मूल रुप से घाना के हैं न कि किसी और देश के जैसे या असंतेवा जो साल 1900 में ब्रिटेन के कॉलोनीवाद के खिलाफ आवाज उठाई। क्वामे नूरुमाह की मूर्ति लगाने की वकालत इन प्रोफेसर्स ने की। क्वामे नूरुमाह घाना के पहले राष्ट्रपति थे। इन प्रोफेसर्स ने गांधी की इस प्रतिमा को रेसिस्ट आइडेंटिटी बताया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी तक इस पिटीशन का कोई जवाब नहीं दिया है। हालांकि यूनिवर्सिटी के छात्र प्रोफेसर्स की मुहिम के समर्थन में नजर आए। छात्रों का कहना है कि हमारे देश में कई हीरोज है जो हमारी आजादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। तो फिर इस मूर्ति को यहां लगाने का कोई मतलब ही नहीं है। आपको बता दें कि मोहनदास करमचंद गांधी साल 1893 में एक मुकदमे के सिलसिले में अफ्रीका गए थे। अफ्रीका पहुंचकर गांधी जी ने वहां के भारतीयों पर हो रहे अत्याचारों को देखा तो वो भारत वापस नहीं आए और अगले दो दशकों तक वहां के लोगों के अधिकारों के लिए लड़ते रहे। अफ्रीका की यात्रा के दौरान गांधी जी को ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे से बाहर फेंक दिया गया था। जिसके बाद गांधी जी ने अफ्रीका में हो रहे रंगभेद को खत्म करने के लिए कई आंदोलन और जेल यात्राएं की।

 

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