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संरा ने सहयोगी देशों से विचारविमर्श की जरूरत स्वीकारी

भारत की चिंता को प्रतिबिंबित करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने शांतिरक्षण अभियानों में सैनिकों का योगदान देने वाले देशों से पर्याप्त विचारमिर्श नहीं करने की बात मानी...

Author संयुक्त राष्ट्र | January 1, 2016 11:01 PM
संयुक्त राष्ट्र (फाइल फोटो)

भारत की चिंता को प्रतिबिंबित करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने शांतिरक्षण अभियानों में सैनिकों का योगदान देने वाले देशों से पर्याप्त विचारमिर्श नहीं करने की बात मानी और ऐसे अभियानों में सुधार के लिए फौज भेजने वाले देशों के साथ ‘प्रभावी परामर्श’ और उनकी ‘पूर्ण भागीदारी’ के महत्त्व पर जोर दिया। पंद्रह सदस्यीय सुरक्षा परिषद ने गुरुवार को एक अध्यक्षीय बयान में कहा कि वह मानती है कि किसी भी अभियान के लिए मत बनाने और उसके संचालन के लिए समुचित प्रतिक्रियाओं और उनके जटिल पहलुओं पर साझा सहमति बनाने के लिए सचिवालय, सैनिकों और पुलिस के योगदानकर्ता देशों के साथ सतत विचारविमर्श जरूरी है।

विश्व संस्था के प्रभावशाली निकाय ने हालांकि माना कि सुरक्षा परिषद, सैनिकों व पुलिस के योगदानकर्ता देशों और सचिवालय के बीच मौजूदा विचारविमर्श के बाबत उनकी अपेक्षाओं को पूरा नहीं करती और उसे अभी अपनी पूर्ण क्षमता हासिल करना है। बयान में कहा गया है कि सुरक्षा परिषद मानती है कि खतरनाक अभियानों में, सैनिकों और पुलिस के योगदानकर्ता देशों का अनुभव और विशेषज्ञता अभियानों की योजना बनाने में मददगार हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बयान में कहा कि परिषद मौलिक, प्रतिनिधिपरक व सार्थक आदान प्रदान के महत्त्व पर जोर देती है और तीनों पक्षधारियों की पूर्ण भागीदारी के महत्त्व को रेखांकित करती है ताकि बैठकें उपयोगी और लाभकारी हों।

शांतिरक्षण संबंधी योजनाएं बनाने में जवाबदेही और पारदर्शिता के अभाव को लेकर भारत सुरक्षा परिषद की बार बार आलोचना करता रहा है और उसका कहना है कि विश्व निकाय की इस असफलता के कारण शांतिरक्षकों और नागरिकों के हताहत होने के मामले बढ़ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अशोक मुखर्जी ने विश्व निकाय के विभिन्न मंचों पर कहा कि सुरक्षा परिषद को शांतिरक्षण अभियान की योजना बनाते समय सैनिकों का योगदान देने वाले देशों के साथ विचारविमर्श करना चाहिए क्योंकि दुनिया के अशांत हिस्सों में संघर्ष के हालात में सैनिकों का काम मुश्किल हो गया है।

पिछले महीने सेवानिवृत्त हो चुके मुखर्जी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 44 में सुरक्षा परिषद से निकाय में प्रतिनिधित्व नहीं रखने वाले सदस्य देशों को सदस्य देश के सैन्य बलों की टुकड़ियां तैनात करने के संबंध में परिषद के निर्णय में भागीदारी के लिए आमंत्रित करने का आह्वान किया गया है। लेकिन साथ ही इस बात पर दुख भी जताया गया है कि वास्तव में ऐसा कभी कभार ही होता है। उन्होंने जोर दिया कि सैनिकों और पुलिस के योगदानकर्ता देश प्रस्तावित अभियान के लिए आवश्यक सैनिकों की संख्या और प्रकार, उसके लिए जरूरी उपकरणों की प्रकृति, किसी विशेष भूभाग में अभियान की लागत के बारे में विचार करने में परिषद की सहायता कर सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षण अभियानों में भारत सर्वाधिक सैनिकों का योगदान देता है और उसके 185,000 से ज्यादा सैनिक अब तक 69 में से 48 मिशनों में सेवाएं दे चुके हैं।

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