संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी ADNOC ने कहा है कि अगर मध्य-पूर्व में चल रहा संघर्ष अभी खत्म भी हो जाता है तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल का पूरी तरह प्रवाह 2027 की पहली या दूसरी तिमाही से पहले बहाल नहीं होगा।

इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान-इजरायल युद्ध का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर लंबे समय तक रह सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया भर के 20% तेल की आपूर्ति होती है लेकिन मिडिल-ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से ऊर्जा की कीमतें बढ़ी हैं और इस वजह से महंगाई और आर्थिक मंदी का डर भी बढ़ गया है।

ADNOC के सीईओ सुल्तान अल जाबेर ने बुधवार को अटलांटिक काउंसिल के एक कार्यक्रम में कहा, “अगर यह संघर्ष कल भी खत्म हो जाए तब भी पहले जैसी सप्लाई का 80% स्तर हासिल करने में कम से कम चार महीने लगेंगे। पूरी सप्लाई 2027 की पहली या शायद दूसरी तिमाही से पहले बहाल नहीं होगी।”

सऊदी अरब की तेल कंपनी Aramco के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमीन नासिर ने इससे पहले चेतावनी दी थी कि अगर इसी तरह के हालात जून के मध्य तक बने रहते हैं तो तेल बाजार 2027 तक अपने पुराने हाल में वापस नहीं आ पाएगा।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चेकपॉइंट, जांच और कुछ मामलों में शुल्क लगाकर अपना नियंत्रण मजबूत कर रहा है। इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने जब ईरान पर हमले शुरू किए थे तो इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई जिससे मिडिल-ईस्ट में तनाव के हालात बन गए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भी नाकेबंदी होने लगी।

जाबेर ने कहा कि इस संघर्ष ने सप्लाई चेन की कमजोरी को दिखाया है। उन्होंने कहा कि ईंधन की कीमतें लगभग 30% बढ़ गई हैं, उर्वरक की कीमतें 50% तक और हवाई किराया लगभग 25% महंगा हो गया है। उन्होंने कहा, “हर खेत, हर कारखाना, हर परिवार इसकी कीमत चुका रहा है और सबसे ज्यादा बोझ कमजोर वर्ग को ही उठाना पड़ता है।”

होर्मुज जलमार्ग में ईरान ने तय की सीमाएं

नई बनाई गई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने होर्मुज जलमार्ग के मैनेजमेंट और निगरानी क्षेत्र की सीमाएं तय कर दी हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।