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‘पाक से सिर्फ आतंकवाद पर बात होगी, कश्मीर पर नहीं’

कश्मीर के बारे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बयान पर सिंह ने कहा, ‘मैं स्पष्ट करना चाहता हूं और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भी यह संदेश देना चाहता हूं... मुद्दा कश्मीर नहीं है। कश्मीर तो भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा।

केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह। (फाइल फोटोः पीटीआई)

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को यहां कहा कि अगर पाकिस्तान अपने दमखम पर आतंकवाद का मुकाबला नहीं कर पा रहा है तो भारत की मदद ले सकता है। पाकिस्तान से सिर्फ आतंकवाद पर बातचीत हो सकती है। कश्मीर पर उससे कोई बात नहीं होगी। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने यहां चुनाव प्रचार के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, ‘मैं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से पूछना चाहता हूं कि अगर अफगानिस्तान में अमेरिका का सहयोग लेकर तालिबान के खिलाफ लड़ाई हो सकती है तो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई क्यों नहीं हो सकती। पाकिस्तान को अगर लगता है कि वह अकेले अपने दमखम पर आतंकवाद का मुकाबला नहीं कर सकता तो अपने पड़ोसी देश भारत से भी वह सहयोग ले सकता है।’

कश्मीर के बारे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बयान पर सिंह ने कहा, ‘मैं स्पष्ट करना चाहता हूं और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भी यह संदेश देना चाहता हूं… मुद्दा कश्मीर नहीं है। कश्मीर तो भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा। मुद्दा है तो आतंकवाद और अगर आतंकवाद पर पाकिस्तान बात करना चाहता है तो बात हो सकती है।’ गृह मंत्री ने कहा ‘मैं यह दावा नहीं करना चाहता कि आतंकवाद समाप्त हो गया हैं लेकिन साढ़े चार साल में देश में आतंकवाद की कोई बड़ी वारदात नहीं हुई है। यह केवल कश्मीर में सिमट गया है। वहां भी हालात सुधर रहे हैं। हमने पूरे जम्मू-कश्मीर को राजनीतिक प्रक्रिया में लाकर खड़ा किया है। आतंकवाद का जहां तक सवाल है, इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि यह सब कुछ पाकिस्तान प्रायोजित है।’ गृहमंत्री ने कहा कि देश और देश की सीमाएं सुरक्षित हैं, आतंकवाद में कमी आई है और नक्सलवाद अगले कुछ साल में खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा, ‘मैं कह सकता हूं कि देश सुरक्षित है। जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं। देश का मस्तक ऊंचा रहेगा।’ सिंह ने कहा, ‘बीते चार साल में पहले की तुलना में नक्सलवाद में 50-60 फीसद की कमी आई है। 90 जिलों का नक्सलवाद आठ-नौ जिलों में सिमट कर रह गया है। तीन से पांच साल में यह नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा।’

राजस्थान के एक दिन के दौरे के दौरान राजनाथ सिंह ने कई चुनाव सभाओं में हिस्सा लिया। उनका कहना है कि पांच राज्यों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ होगा। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में वसुंधरा राजे को स्पष्ट बहुमत मिलने वाला है। राजस्थान में कांगे्रस हताशा कि स्थिति में अब जाति गौत्र पर अटक गई है। इससे साफ लगता है कि कांग्रेस विकास और सुशासन के हाईवे से उतर कर वह जाति गौत्र की अंधेरी गलियों में भटकने लगी है। यहां पर इन दिनों कांग्रेस हिंदू और हिंदुत्व की भी चर्चा करने लगी है। कांग्रेस पहले इन शब्दों के प्रयोग से बचती थी और परहेज करती थी। कांग्रेस के लोग अब हमसे हिंदुत्व की परिभाषा पूछ रहे हैं। राजनाथ ने कहा कि हिंदुत्व को जाति, पंथ और मजहब से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। कांग्रेस के लोग हिंदू और हिंदुत्व पर क्या बात करेंगे, जिन्होंने 2007 में रामसेतु के मामले में हलफनामा देकर भगवान राम को काल्पनिक कहा था। उन्होंने कहा कि भारत की राजनीति में विश्वास का संकट किसी एक पार्टी ने पैदा किया है तो वो कांग्रेस ही है। कांग्रेस ने चुनाव आने पर मंदिर दौड़ शुरू कर दी है। कांग्रेस के लोग अब गाय और गोशाला की बात कर रहे हैं। समाज की सामाजिक समरसता को तोड़ने वाले मुद्दों पर चुनाव कांग्रेस को नहीं लड़ना चाहिए।

‘लक्षित हमले किए थे तो छुपाया क्यों’

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को सवाल उठाया कि मनमोहन सिंह सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी तो उसे छुपाकर क्यों रखा गया। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को उदयपुर में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक जैसे ‘सैन्य फैसले’ को भी ‘राजनीतिक संपत्ति’ बना दिया जबकि यही काम पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार ने भी तीन बार किया था। इस बारे में पूछने पर सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा- आज बता रहे हैं वे। तब देश को क्यों नहीं बताया गया? अगर हमारी सेना ने अपने शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया था तो क्या इस देश को इस बात की जानकारी नहीं होनी चाहिए थी। क्यों सेना के शौर्य और पराक्रम को छिपाकर रखने की कोशिश की गई? किसका भय था?

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