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डिजिटल दुनिया को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाएं: यूनिसेफ

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) का कहना है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाने और सुरक्षित ऑनलाइन सामग्री तक उनकी पहुंच बढ़ाने की दिशा में जो कुछ भी हो रहा है, वह नगण्य है।
Author संयुक्त राष्ट्र | December 12, 2017 22:51 pm
प्रतीकात्मक तस्वीर

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) का कहना है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाने और सुरक्षित ऑनलाइन सामग्री तक उनकी पहुंच बढ़ाने की दिशा में जो कुछ भी हो रहा है, वह नगण्य है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, एजेंसी ने ‘स्टेट ऑफ वल्र्डस चिल्ड्रेन 2017 : चिल्ड्रेन इन ए डिजिटल वर्ल्ड’ नाम से अपनी एक रिपोर्ट में सोमवार को यह जिक्र किया कि दुनियाभर में हर तीसरा इंटरनेट उपयोगकर्ता बच्चा है। रिपोर्ट में डिजिटल विभाजनों को स्पष्ट करते हुए बच्चों की सुरक्षा व स्वास्थ्य पर इंटरनेट और सोशल मीडिया के प्रभावों के संबंध में मौजूदा बहस-मुबाहिसों की छानबीन की। यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक एंथनी लेक ने कहा, “डिजिटल तकनीक अच्छी हो या बुरी, लेकिन यह हमारी जिंदगी की नहीं बदलने वाली हकीकत बन गई है।”

उन्होंने कहा, “डिजिटल दुनिया में हमारे समाने दोहरी चुनौती है कि हर बच्चे को इंटरनेट के अधिकतम फायदे मुहैया करवाने के क्रम में खतरों को कैसे कम कर सकते हैं।”
रिपोर्ट में फायदों की पड़ताल की गई है, जोकि डिजिटल टेक्नोलॉजी सुविधाओं से बिल्कुल ही वंचित बच्चों को प्रदान कर सकती है। उनमें सूचनाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाना, उनमें डिजिटल कार्यस्थल के अनुकूल क्षमता निर्माण करना और उनको संपर्क व अपने विचारों को अभिव्यक्त करने के लिए मंच प्रदान करना शामिल है।

लेक ने कहा कि इंटरनेट को वयस्कों के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन इसका इस्तेमाल ज्यादातर बच्चे और युवा लोग कर रहे हैं और डिजिटल तकनीक का उनके जीवन पर बुरे प्रभाव पड़ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हर जगह मोबाइल पर ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध होने से अनेक बच्चों के लिए इसका इस्तेमाल आसान हो गया है, जो ज्यादा खतरनाक है।

इससे भी बढ़कर ‘डार्क वेब’ और क्रिप्टोकरेंसीज जैसे डिजिटल नेटवर्क के जरिए सबसे ज्यादा शोषण व बुरे बर्ताव किए जा रहे हैं। इनमें अवैध व्यापार व ऑनलाइन बाल यौन दुर्व्यवहार का आर्डर आदि शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर की 48 फीसदी आबादी ऑनलाइन सेवा का इस्तेमाल करती है, जिसमें 71 फीसदी युवा हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि दस यौन दुर्व्यवहार वाले यूआरएल में से नौ कनाडा, फ्रांस, नीदरलैंड्स, रूस और अमेरिका के हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारों, निजी क्षेत्र, परिवारों और खुद बच्चों के सामूहिक कार्य से ही इंटरनेट को ज्यादा सुरक्षित और बच्चों के लिए पहुंचयोग्य बनाया जा सकता है।

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