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गैस हमलों के बाद सीरियाई बलों पर संरा ने लगाया बैन, रूस ने किया विरोध

संराष्ट्र जांच में इस निष्कर्ष पर पहुंचा था कि वर्ष 2014 से 2015 के बीच सरकारी बलों ने गांवों में क्लोरीन गैस के तीन हमलों को अंजाम दिया था।

Author संयुक्त राष्ट्र | October 28, 2016 4:00 PM
सीरिया के उत्तरी अलेप्पो प्रांत के अब-बाब शहर से उठता धुआं। (REUTERS/Khalil Ashawi)

सीरियाई बलों को तीन रसायनिक हमलों का दोषी ठहराने वाली, संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में की गई जांच के बारे में रूस ने कहा है कि वह ‘विश्वास योग्य नहीं है।’ उसने प्रतिबंध लगाए जाने का भी विरोध किया है। सुरक्षा परिषद की गुरुवार (27 अक्टूबर) को एक बैठक हुई थी जिसके बाद रूस के राजदूत वितली चरकिन ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमारा मानना है कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिसके आधार पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।’ रासायनिक हथियारों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी संयुक्त राष्ट्र के संगठन का संयुक्त पैनल इस निष्कर्ष पर पहुंचा था कि वर्ष 2014 से 2015 के बीच सरकारी बलों ने गांवों में क्लोरीन गैस के तीन हमलों को अंजाम दिया था। यह पहली बार था जब किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की जांच में राष्ट्रपति बशर अल असद के बलों को दोषी बताया गया, जबकि दमिश्क कई वर्षों से इस बात से इनकार करता रहा है।

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बहरहाल, चरकिन ने परिषद से कहा है कि निष्कर्ष इतने ठोस नहीं है कि प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया जा सके। ब्रिटेन और फ्रांस ने प्रतिबंध लगाने की मांग की है। फ्रांस के राजदूत फ्रेंकोईस देलात्रे ने संवाददाताओं से कहा, ‘रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करने के लिए जिम्मेदार लोगों पर प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए। दूसरा और कोई विकल्प नहीं है।’ ब्रिटेन के राजदूत मैथ्यू रेक्रॉफ ने कहा, ‘सीरिया या दुनिया में कहीं भी रसायनिक हथियारों का इस्तेमाल करने वाले हर एक व्यक्ति की जवाबदेही तय होनी चाहिए।’ पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी हेलिकॉप्टरों ने विरोधियों के कब्जे वाले इदलिब प्रांत के तीन गांवों में क्लोरीन बैरल बम डाले थे। रासायनिक हथियार सम्मेलन के तहत क्लोरीन का इस्तेमाल हथियार के तौर पर करने पर पाबंदी है। इस सम्मेलन में सीरिया वर्ष 2013 में शामिल हुआ था।

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