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100 साल बाद जालियांवाला कांड पर ब्रिटेन ने जताया दु:ख, नहीें मांगी औपचारिक माफी

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे ने 1919 के जलियांवाला बाग नरसंहार की घटना ब्रिटिश भारतीय इतिहास पर शर्मसार करने वाला धब्बा है। जैसा कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 1997 में जलियांवाला बाग जाने से पहले कहा था कि यह भारत के साथ हमारे अतीत के इतिहास का दुखद उदाहरण है।

जलियांवाला नरसंहार कांड के 100 साल पूरे हो गए। (Photo: Sikh-history.com)

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे ने अमृतसर के जलियांवाला नरसंहार कांड की 100वीं बरसी के मौके पर बुधवार (10 अप्रैल) को इस कांड को ब्रिटिश भारतीय इतिहास में ‘शर्मसार करने वाला धब्बा’ करार दिया लेकिन उन्होंने इस मामले में औपचारिक माफी नहीं मांगी। हाउस ऑफ कॉमन्स में प्रधानमंत्री के साप्ताहिक प्रश्नोत्तर की शुरूआत में उन्होंने अपने बयान में इस घटना पर ‘खेद’ जताया जो ब्रिटिश सरकार पहले ही जता चुकी है।

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘1919 के जलियांवाला बाग नरसंहार की घटना ब्रिटिश भारतीय इतिहास पर शर्मसार करने वाला धब्बा है। जैसा कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 1997 में जलियांवाला बाग जाने से पहले कहा था कि यह भारत के साथ हमारे अतीत के इतिहास का दुखद उदाहरण है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जो कुछ हुआ और लोगों को वेदना झेलनी पड़ी, उसके लिए हमें गहरा खेद है। मैं खुश हूं कि आज ब्रिटेन-भारत के संबंध साझेदारी, सहयोग, समृद्धि और सुरक्षा के हैं। भारतवंशी समुदाय ब्रिटिश समाज में बहुत योगदान दे रहा है और मुझे विश्वास है कि पूरा सदन चाहेगा कि ब्रिटेन के भारत के साथ संबंध बढ़ते रहें।’’  विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन ने मांग की कि नरसंहार में मारे गये लोग उस घटना के लिए पूरी तरह स्पष्ट माफी के हकदार हैं।

जलियांवाला बाग नरसंहार अमृतसर में 1919 में अप्रैल माह में बैसाखी के दिन हुआ था। इस दिन हजारों लोग रॉलेक एक्ट और आजादी की मांग करने वाले नेताओं सत्यपाल तथा डॉ. सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में जालियांबवाला बाग में इकट्ठा हुए थे। इस दौरान पंजाब के तत्कालीन गर्वनर माइकल ओड्वायर के आदेश पर अंग्रेज अधिकारी जनरल रेजीनल्ड डायर ने वहां मौजूद भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग करवायी। अचानक फायरिंग होने की वजह से चारो ओर भगदड़ मच गई।

बाग के चारो ओरा ऊंची दीवार होने की वजह से लोग कहीं भाग नहीं सके। कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए वहां मौजूद कुंए में छलांग लगा दी। 100 से ज्यादा लोगों का शव कुंए से बरामद किया गया था। जनरल डायर ने तबतक गोलियां चलवायी, जब तक कि उनके बंदूक खाली नहीं हो गए। उस समय की रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना में करीब 1000 लोग मारे गए थे और 2000 के आसपास घायल हुए थे। उन गोलियों के निशान वहां की दीवारों पर आज भी मौजूद है। (भाषा इनपुट के साथ)

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