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माल्या को निर्वासित नहीं कर सकते, प्रत्यर्पण की मांग करे भारत: ब्रिटेन

विजय माल्या ने दो मार्च को देश छोड़ा था। इसके बाद भारत सरकार ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया था।

Author नई दिल्ली | May 12, 2016 02:53 am
व्यवसायी विजय माल्या (पीटीआई फाइल फोटो)

धनशोधन के लिए गिरफ्तारी के खतरे का सामना कर रहे विजय माल्या को जल्द वापस लाने के भारत के प्रयासों को तब झटका लगा जब ब्रिटेन ने साफ कर दिया कि शराब कारोबारी को निर्वासित नहीं किया जा सकता। ब्रिटेन ने भारत से कहा कि वह माल्या के प्रत्यर्पण की मांग करे। भारत प्रत्यर्पण की लंबी प्रक्रिया के बजाय माल्या को निर्वासन के त्वरित जरिए से भारत लाने की उम्मीद कर रहा था।

ब्रिटेन सरकार ने यह भी कहा कि वह माल्या के खिलाफ आरोपों की गंभीरता को स्वीकार करता है और वह भारत सरकार की मदद करने का इच्छुक है। ब्रिटेन सरकार का जवाब भारत की ओर से माल्या को निर्वासित करने के अनुरोध के लगभग 15 दिन बाद आया है। माल्या का पासपोर्ट उनके खिलाफ धनशोधन रोकथाम कानून 2002 के तहत जांच के लिए उनकी मौजूदगी सुनिश्चित करने के प्रयास के तहत रद्द कर दिया गया था।

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माल्या के खिलाफ गैरजमानती वारंट भी जारी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि ब्रिटेन सरकार ने हमें सूचित किया है कि 1971 के आब्रजन कानून के तहत ब्रिटेन में रहने के लिए किसी व्यक्ति के पास वैध पासपोर्ट की जरूरत नहीं है बशर्ते ब्रिटेन में रहने की वह अवधि अभी बाकी हो जिसकी उसने वैध पासपोर्ट रहते ही मंजूरी ले ली हो। स्वरूप ने कहा- ब्रिटेन आरोपों की गंभीरता को समझता है और वह भारत सरकार की मदद करने का इच्छुक है। उन्होंने भारत सरकार से कहा कि वह परस्पर कानूनी सहायता या प्रत्यर्पण का अनुरोध करने पर विचार करे।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार (11 मई) को राज्यसभा में कहा कि सार्वजनिक बैंकों के हजारों करोड़ रुपए का कर्ज नहीं लौटाने और धनशोधन के आरोपी व शराब करोबारी विजय माल्या को देश में लाने के लिए अब आरोपपत्र दाखिल करने के बाद प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू करनी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि भारत को अब आरोपपत्र दाखिल कर माल्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को शुरू करना पड़ेगा।

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माल्या पर सार्वजनिक बैंकों का 9400 करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है। उन पर धनशोधन के आरोप भी लगे हैं। जेटली ने कहा- ब्रिटेन का यह रुख है कि पासपोर्ट रद्द कर देने से स्वत: निर्वासन नहीं होता है। उसने पहले भी कुछ मामलों में यही रुख अपनाया था। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्ज वसूली के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं और जांच एजंसी कानून के उल्लंघनों की जांच कर रही हैं।

ब्रिटेन ने कहा : प्रत्यर्पण की मांग करे भारत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि ब्रिटेन सरकार ने हमें सूचित किया है कि 1971 के आब्रजन कानून के तहत ब्रिटेन में रहने के लिए किसी व्यक्ति के पास वैध पासपोर्ट की जरूरत नहीं है बशर्ते ब्रिटेन में रहने की वह अवधि अभी बाकी हो जिसकी उसने वैध पासपोर्ट रहते ही मंजूरी ले ली हो।

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