स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में गुरुवार शाम दो तेल टैंकरों पर ड्रोन हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। दोनों जहाज अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) द्वारा संचालित थे। हमले में किसी के घायल होने की खबर नहीं है, लेकिन जहाजों को मामूली नुकसान पहुंचा है। इस घटना ने दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक से होकर गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, इसी बीच अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक और सैन्य दबाव और बढ़ाने के संकेत दिए हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिकी नौसेना ईरान की नाकाबंदी को अनिश्चितकाल तक जारी रखने की क्षमता रखती है।
दो तेल टैंकरों पर ड्रोन से हमला
यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) केंद्र के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजर रहे दो जहाजों पर ड्रोन से हमला किया गया। हमले में दोनों जहाजों को मामूली नुकसान हुआ। UKMTO ने शुरुआत में जहाजों की पहचान सार्वजनिक नहीं की, लेकिन बाद में सामने आई जानकारी में इनका संबंध ADNOC से बताया गया।
ADNOC ने कहा कि हमले में कोई घायल नहीं हुआ और स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया है। हालांकि, इस घटना ने उस समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
UAE के विदेश मंत्रालय ने हमले को संयुक्त राष्ट्र के समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता से जुड़े सिद्धांतों का ‘घोर उल्लंघन’ बताया। मंत्रालय ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को आर्थिक दबाव और ब्लैकमेल के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। ईरान की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में घटा जहाजों का आवागमन
हमले के बाद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई। शिप-ट्रैकिंग कंपनी Kpler के अनुसार, गुरुवार को नौ जहाज इस जलमार्ग से गुजरे, जबकि बुधवार को यह संख्या पांच थी। हालांकि, अगस्त के औसत दैनिक आंकड़े 12 जहाजों की तुलना में यह संख्या कम रही।
शुक्रवार की शुरुआत में स्ट्रेट से किसी जहाज के गुजरने की जानकारी नहीं मिली। हालांकि, यह भी संभव है कि कुछ जहाजों ने अपने ट्रांसपोंडर बंद कर रखे हों और इसलिए उनकी स्थिति ट्रैक नहीं हो सकी। युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी में प्रतिदिन 130 से ज्यादा जहाज इस जलमार्ग से गुजरते थे। ऐसे में मौजूदा गिरावट वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ी चिंता का संकेत मानी जा रही है।
ईरान ने रखी हैं स्ट्रेट खोलने की शर्तें
जून में संघर्षविराम टूटने के बाद ईरान ने उन जहाजों के खिलाफ फिर से कार्रवाई शुरू कर दी, जिन पर उसने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से बिना अनुमति गुजरने का आरोप लगाया। तेहरान पहले ही संकेत दे चुका है कि वह अपनी शर्तें पूरी होने तक इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को दोबारा पूरी तरह नहीं खोलेगा।
उसकी प्रमुख मांगों में आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना और ईरान की जमी हुई संपत्तियों को जारी करना शामिल है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसलिए यहां लंबे समय तक किसी भी तरह की बाधा पैदा होने से तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका ने ईरान पर और दबाव बनाने के दिए संकेत
तेल टैंकरों पर हमले के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति को और सख्त करने के संकेत दिए हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी नौसेना क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए रख सकती है और ईरान की नाकाबंदी को अनिश्चितकाल तक लागू कर सकती है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने जहाजों को लगातार रोटेट करता रहेगा और क्षेत्र में नौसैनिक मौजूदगी जारी रख सकता है। वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वॉशिंगटन ईरान को और आर्थिक नुकसान पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि अगले सप्ताह ईरान के खिलाफ नए आर्थिक उपायों की घोषणा की जा सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई बढ़ाने की चेतावनी देते रहे हैं। हालांकि, हाल में उन्होंने संकेत दिया था कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक दबाव को प्राथमिकता दे सकता है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बढ़ते तनाव का असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया से बड़ी मात्रा में तेल और गैस आयात करता है। ऐसे में इस समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक व्यवधान आने से ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत को कतर से LNG यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में पहले ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पेट्रोनेट LNG ने इस सप्ताह कहा था कि सितंबर की LNG शिपमेंट को लेकर अभी भी स्पष्टता नहीं है।
कंपनी के मुताबिक, कतर की ‘फोर्स मेज्योर’ स्थिति के कारण अब तक 56 कार्गो प्रभावित हो चुके हैं। आपूर्ति में कमी को पूरा करने के लिए भारत अमेरिका, ओमान, नाइजीरिया और अंगोला जैसे देशों से विकल्प तलाश रहा है।
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में दो तेल टैंकरों पर हमला केवल एक स्थानीय समुद्री घटना नहीं है। यह वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है। यदि इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है, तो तेल और LNG की आपूर्ति प्रभावित होने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी आ सकती है।
पहले से ही पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच व्यापारिक जहाजों पर हमलों की घटनाएं बढ़ने से शिपिंग कंपनियों को वैकल्पिक मार्गों और सुरक्षा उपायों पर विचार करना पड़ सकता है। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए इसका असर ईंधन की कीमतों से लेकर उद्योग और महंगाई तक दिखाई दे सकता है।
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