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चीन के लॉकडाउन की आपबीती: 13-13 घंटे देखा मोबाइल, ड‍िप्रेशन बढ़ा-दवाएं खत्म हुईं, तो ऐसे किया मुकाबला

चीन में दिसंबर 2019 में कोरोनावायरस महामारी का फैलना शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत हुबेई प्रांत के वुहान शहर से हुई, इसलिए अफसरों ने इस प्रांत को पूरी तरह लॉकडाउन कर दिया था।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र वुहान | Updated: March 27, 2020 4:30 PM
चीन के हुबेई प्रांत में 23 जनवरी को लॉकडाउन का ऐलान हुआ था, यह दो महीने बाद यानी 25 मार्च को खत्म हुआ।

China Coronavirus Lockdown: भारत में कोरोनावायरस के खतरे के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मार्च से 14 अप्रैल तक पूरे देश में लॉकडाउन का ऐलान कर दिया था। वजह थी संक्रमण को फैलने से रोकना। मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कोरोना को मानवजाति के लिए खतरा बताते हुए लोगों से अपने घरों में रहने की अपील की थी। उनकी इस याचना के बावजूद भारत में अब तक कई लोग इसे नहीं मान रहे हैं। हाल ही में चीन के हुबेई प्रांत से लॉकडाउन का खात्मा हुआ है। यहां के वुहान शहर में ही सबसे पहले कोरोनावायरस के मामले सामने आए थे, जिसके बाद चीन सरकार ने पूरे प्रांत को लॉकडाउन कर दिया था। वुहान के एक शख्स ने दो महीने तक लॉकडाउन में रहने का अनुभव साझा किया है।

संयुक्त राष्ट्र को दिए इंटरव्यू में वुहान के एक नागरिक ने बताया- “23 जनवरी को जब लॉकडाउन शुरू हुआ, तो हम सबको यह कुछ अचानक लगा। मैं अपने माता-पिता के पास रुकने आया था। लॉकडाउन इतनी जल्दी शुरू हुआ कि हमें कुछ करने का समय भी नहीं मिला। ऐसा लगा कि महामारी काफी तेजी से फैल रही है। मुझे अंदाजा नहीं था कि महामारी कितने दिनों तक फैली रहेगी। उस समय लग रहा था कि लॉकडाउन सिर्फ कुछ दिनों तक ही रहेगा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतने लगा लॉकडाउन और कड़ा होने लगा। पहले दो हफ्तों में तो लोगों को घर के बाहर जाकर सब्जी और जरूरी सामान खरीदने की छूट दी गई। सुपरमार्केट भी खुले रखे गए। लेकिन जैसे वायरस संक्रमण के मामले बढ़ने लगे, हमें हिदायत दी गई कि सब अंदर रहें और अब कोई घरों से बाहर भी न निकले।”

लॉकडाउन में समय काटने के लिए अच्छी आदतें डालना जरूरी
व्यक्ति ने इंटरव्यू में बताया- “लॉकडाउन के वक्त पहले कुछ दिन मैंने मोबाइल पर 13-13 घंटे तक ध्यान लगाया। यानी जब भी मैं जागता तब मेरा ध्यान मोबाइल पर होता और मैं वायरस के बारे में न्यूज जानने की कोशिश करता। किसी को नहीं पता था कि क्या हो रहा है, इसलिए सब परेशान और डरे थे। शटडाउन से पहले मेरे डिप्रेशन का इलाज चल रहा था। जैसे ही महामारी फैली मेरी दवाइयां खत्म हो गईं। इसके बाद मैंने समस्याओं से निपटने के लिए एक्सरसाइज शुरू की, धूप में जाना शुरू किया और किताब पढ़ना आदत बनाया।”

परिवार के साथ पुराना समय वापस बिताने और एडजस्ट करने का मौका
“पहले उम्मीद लगाई जा रही थी कि लॉकडाउन ज्यादा से ज्यादा एक हफ्ते चलेगा, लेकिन देखते ही देखते यह पहले 15 दिन, फिर एक महीने और इसके बाद दो महीने लंबा खिंच गया। ऐसे में लॉकडाउन का समय काटने के लिए एक फिक्स रूटीन होना बेहद जरूरी है। इसमें किताबें पढ़ना सबसे आसान है। इसके बाद कोई म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट सीखना और किसी कला से जुड़ी गतिविधि में शामिल होना, जो कि आपको अच्छा महसूस करा सकती हैं। इसके साथ ही परिवार के साथ अगर आपको लंबे समय तक रहने की आदत छूट चुकी है, तो एक बार फिर लॉकडाउन में आप उनके साथ जीना सीख लेते हैं। इसी के साथ परिवार में प्यार वापस आता है।”

महामारी से लड़ने वालों के लिए मन में सम्मान पैदा हुआ
युवक ने बताया कि घर में रहने के साथ ही हमें संचार की अहमियत का अंदाजा हुआ। काफी जानकारी इंटरनेट से मिल जाती थी, लेकिन सिर्फ इंटरनेट के भरोसे ही नहीं रहा जा सकता। आपको अपने दोस्तों और करीबियों से बात करते रहना होगा। एक बार जब लॉकडाउन का समय कट जाता है, तो आप उनसे फिर से अच्छे संबंध शुरू कर सकते हैं। इसलिए लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया के निगेटिव पोस्ट देखकर समय बिताने की जगह अपनों को समय देना ज्यादा जरूरी है।

“लॉकडाउन के समय ने हमें उन लोगों की इज्जत करना सिखाया जो हर वक्त महामारी के बावजूद वायरस के खिलाफ लड़ाई में शामिल रहे। हमें सीख मिली की बेवजह हमें बीमार होकर अस्पताल नहीं जाना है, ताकि किसी पर बोझ न पड़े। शायद जब महामारी खत्म होगी, तब हम भी कुछ डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों से मिलकर उन्हें पहले से ज्यादा और जरूरी सम्मान देंगे।”

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