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J&K पर इसलिए पाकिस्तान के सुर से सुर मिला रहा तुर्की! राष्ट्रपति ने जताई परमाणु बम हासिल करने की हसरत

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब इरदुगान ने हाल ही में अपनी पार्टी की बैठक में कथित तौर पर मुल्क को परमाणु संपन्न बनाने की इच्छा जाहिर की।

Author नई दिल्ली | Published on: October 23, 2019 12:05 PM
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब इरदुगान।

तुर्की के परमाणु हथियार हासिल करने की इच्छा के बाद परमाणु प्रसार के लिए बदनाम पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान एक फिर जांच के घेरे में हैं। करीब 15 साल पहले पाकिस्तान के परमाणु तस्कर अब्दुल कादिर खान ने स्वीकार किया था कि उन्होंने परमाणु हथियारों की स्मलिंग की थी और अवैध निर्यात किया था। दरअसल डेढ़ दशक बाद यह मुद्दा एक बार फिर इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब इरदुगान ने हाल ही में अपनी पार्टी की बैठक में कथित तौर पर मुल्क को परमाणु संपन्न बनाने की इच्छा जाहिर की थी।

इरदुगान ने हाल में अपनी पार्टी के करीबी नेता से कहा, ‘कुछ देशों (यहां उन्होंने पश्चिमी देशों पर जोर दिया।) के पास परमाणु क्षमता से लैस मिसाइलें हैं। हमारे पास यह नहीं हो सकता। यह मैं स्वीकार नहीं कर सकता।’ बीते सोमवार को न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में सवाल उठाया गया कि अगर अमेरिका इस तुर्किश नेता को अपने कुर्द सहयोगियों को बर्बाद करने से नहीं रोक सकता तो वह परमाणु हथियार बनाने से कैसे रोक सकता है।

रिपोर्ट में इस बात का संकेत दिया गया कि तुर्की पहले ही बम बनाने के प्रोग्राम पर काम कर रहा है। उसने युरेनियम का भंडार जमा किया है और रिएक्टरों से जुड़े रिसर्च कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि तुर्की ने पाकिस्तान के अब्दुल कादिर के साथ रहस्यमय समझौता किया है। रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की की कंपनियों ने अब्दुल कादिर खान को यूरोप से परमाणु सामग्रियों को आयात करने में मदद की है।

बता दें कि लंदन के थिंक टैंक इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑप स्ट्रेटिजिक स्टडीज ने कुख्यात परमाणु तस्कर अब्दुल कादिर खान के नेटवर्क पर ‘न्यूक्लियर ब्लैक मार्केट’ नाम से शोध किया था।

रिपोर्ट में संकेत दिया गया कि परमाणु तकनीक बेचने के मामले में तुर्की पाकिस्तान का चौथा ग्राहक हो सकता है। उससे पहले पाकिस्तान कथित तौर पर ईरान, लीबिया और नोर्थ कोरिया को परमाणु तकनीक बेचने के आरोपों का सामना कर चुका है।

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त किए जाने के बाद पाकिस्तान ने भारत की आंतरिक कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें तुर्की और मलेशिया जैसे देशों ने उसका खुलकर साथ दिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी तुर्की ने पाकिस्तान के पक्ष में बयान दिए।

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